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किसानों का आंदोलन रंग लाया, पुल का निर्माण शुरू
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बिजनौर में गंगा खादर में पैदल गंगा की धारा से निकलकर पशुओं के लिए चारा लाती महिलाएं।
- फोटो : BIJNOR
किसानों का आंदोलन रंग लाया, पुल का निर्माण शुरू
बिजनौर। पुल निर्माण के लिए ग्रामीणों का आंदोलन रंग लाया। आखिरकार खादर के किसानों को पैंटून पुल की सौगात मिल ही गई है। गांव डैबलगढ़ के सामने पैंटून पुल बनाने का काम जल्दी ही शुरू हो जाएगा। इससे किसानों को गंगा की उफनती लहरों को पार करके चारा लाने के लिए मजबूर नहीं होना होगा। पुल से करीब एक दर्जन गांवों को सीधा फायदा होगा। ग्रामीणों के आंदोलन को अमर उजाला ने प्रमुखता से छापा था।
गंगा खादर में कई गांव बसे हैं। इन गांववालों के खेत गंगा की धारा के दूसरी ओर है। किसानों को खेत में जाने के लिए नाव से गंगा पार करनी पड़ती है। बरसात में किसान उफनती धारा के बीच खेतों में जाते हैं। किसान अपनी बुग्गी, ट्रैक्टर ट्राली आदि जोड़े वाली नाव पर लेकर आते-जाते हैं। गंगा की धारा में किसान आए दिन हादसों का शिकार होते रहते थे। अगस्त 2018 में गांव डैबलगढ़ के सामने गंगा में नाव डूबने से पांच महिलाएं डूब गईं थी। पांच महिलाओं का आज तक कुछ पता नहीं चला। तब विधायक सुचि मौसम चौधरी ने पैंटून पूल बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। पिछले साल भाकियू के मंडल महासचिव राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में गांव डैबलगढ़ में किसानों ने जल आंदोलन शुरू करते हुए गंगा पर पैंटून पुल बनवाने की मांग की थी। किसानों का आंदोलन 32 दिन तक चला था। प्रशासन ने शासन को पैंटून पुल बनवाने के लिए प्रस्ताव भेजा था जो स्वीकार कर लिया गया था। अब पैंटून पुल बनाने के लिए मंगलवार से माल आना शुरू हो गया है। पुल से जुड़ी सामग्री देखने पर किसानों के चेहरे खिल गए हैं। सामग्री के पास हुई बैठक में राजेंद्र सिंह ने कहा कि जनता की समस्या का समाधान हो गया है। कहा कि अब किसानों को जान हथेली पर रखकर गंगा पार करने को मजबूर नहीं होना होगा। इस दौरान वीरेंद्र चौधरी, जगदीश कुमार, मास्टर शोभाराम, सतीश कुमार, रमेश राजपूत आदि मौजूद रहे।
ये गांव होंगे लाभान्वित
गंगा पर गांव डैबलगढ़ के सामने पुल बनने से डैबलगढ़, राजारामपुर, रघुनाथपुर, वीरूवाला, चौहड़वाला, औरंगाबाद शकूरपुर, बादशाहपुर, कोहरपुर, मीरापुर, सीमली, सीमला, दयालवाला के किसानों को सीधा फायदा होगा। बाकी गांवों के किसान भी पुल से अपने खेतों में जा सकते हैं।
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शुक्रताल की दूूरी केवल छह किमी रह जाएगी
डैबलगढ़ के सामने पुल बनने से शुक्रताल से गांव वालों की दूरी केवल छह किलोमीटर रह जाएगी। मुजफ्फरनगर जाने के लिए भी इसी पुल का सहारा लिया जाएगा। मुजफ्फरनगर की दूूरी केवल 30 किमी रह जाएगी। पहले ये दूरी 80 किमी थी।
पैंटून पुल बड़ी सौगात
भाजपा विधायक सुचि मौसम चौधरी का कहना है कि डैबलगढ़ की घटना के तुरंत बाद उन्होंने पुल बनवाने का प्रस्ताव दे दिया था जो सरकार ने स्वीकृत कर लिया था।
अमर उजाला बना किसानों की आवाज
बिजनौर। अमर उजाला ने हमेशा ही खादर के किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। पिछले महीने गंगा द्वारा किए जा रहे कटान की खबर अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद ही अफसरों ने गंगा तट का दौरा किया था और वहां लकड़ी के स्टड बनवाए थे। पेंटून पुल के लिए पिछले साल गांव डैबलगढ़ में 31 दिन तक चले आंदोलन को अमर उजाला ने रोज प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अमर उजाला किसानों की आवाज बनकर उनके साथ खड़ा रहा। पुल के संबंध में प्रशासनिक व राजनीतिक प्रयासों को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। आज किसानों और अमर उजाला की मुहिम रंग लाई है। जल्दी ही गंगा पर पुल बनना शुरू हो जाएगा। भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि अमर उजाला ने किसानों के आंदोलन को हमेशा धार दी है। अमर उजाला एक तरह से खुद आंदोलन में शामिल रहा है।
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बिजनौर। पुल निर्माण के लिए ग्रामीणों का आंदोलन रंग लाया। आखिरकार खादर के किसानों को पैंटून पुल की सौगात मिल ही गई है। गांव डैबलगढ़ के सामने पैंटून पुल बनाने का काम जल्दी ही शुरू हो जाएगा। इससे किसानों को गंगा की उफनती लहरों को पार करके चारा लाने के लिए मजबूर नहीं होना होगा। पुल से करीब एक दर्जन गांवों को सीधा फायदा होगा। ग्रामीणों के आंदोलन को अमर उजाला ने प्रमुखता से छापा था।
गंगा खादर में कई गांव बसे हैं। इन गांववालों के खेत गंगा की धारा के दूसरी ओर है। किसानों को खेत में जाने के लिए नाव से गंगा पार करनी पड़ती है। बरसात में किसान उफनती धारा के बीच खेतों में जाते हैं। किसान अपनी बुग्गी, ट्रैक्टर ट्राली आदि जोड़े वाली नाव पर लेकर आते-जाते हैं। गंगा की धारा में किसान आए दिन हादसों का शिकार होते रहते थे। अगस्त 2018 में गांव डैबलगढ़ के सामने गंगा में नाव डूबने से पांच महिलाएं डूब गईं थी। पांच महिलाओं का आज तक कुछ पता नहीं चला। तब विधायक सुचि मौसम चौधरी ने पैंटून पूल बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। पिछले साल भाकियू के मंडल महासचिव राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में गांव डैबलगढ़ में किसानों ने जल आंदोलन शुरू करते हुए गंगा पर पैंटून पुल बनवाने की मांग की थी। किसानों का आंदोलन 32 दिन तक चला था। प्रशासन ने शासन को पैंटून पुल बनवाने के लिए प्रस्ताव भेजा था जो स्वीकार कर लिया गया था। अब पैंटून पुल बनाने के लिए मंगलवार से माल आना शुरू हो गया है। पुल से जुड़ी सामग्री देखने पर किसानों के चेहरे खिल गए हैं। सामग्री के पास हुई बैठक में राजेंद्र सिंह ने कहा कि जनता की समस्या का समाधान हो गया है। कहा कि अब किसानों को जान हथेली पर रखकर गंगा पार करने को मजबूर नहीं होना होगा। इस दौरान वीरेंद्र चौधरी, जगदीश कुमार, मास्टर शोभाराम, सतीश कुमार, रमेश राजपूत आदि मौजूद रहे।
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ये गांव होंगे लाभान्वित
गंगा पर गांव डैबलगढ़ के सामने पुल बनने से डैबलगढ़, राजारामपुर, रघुनाथपुर, वीरूवाला, चौहड़वाला, औरंगाबाद शकूरपुर, बादशाहपुर, कोहरपुर, मीरापुर, सीमली, सीमला, दयालवाला के किसानों को सीधा फायदा होगा। बाकी गांवों के किसान भी पुल से अपने खेतों में जा सकते हैं।
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शुक्रताल की दूूरी केवल छह किमी रह जाएगी
डैबलगढ़ के सामने पुल बनने से शुक्रताल से गांव वालों की दूरी केवल छह किलोमीटर रह जाएगी। मुजफ्फरनगर जाने के लिए भी इसी पुल का सहारा लिया जाएगा। मुजफ्फरनगर की दूूरी केवल 30 किमी रह जाएगी। पहले ये दूरी 80 किमी थी।
पैंटून पुल बड़ी सौगात
भाजपा विधायक सुचि मौसम चौधरी का कहना है कि डैबलगढ़ की घटना के तुरंत बाद उन्होंने पुल बनवाने का प्रस्ताव दे दिया था जो सरकार ने स्वीकृत कर लिया था।
अमर उजाला बना किसानों की आवाज
बिजनौर। अमर उजाला ने हमेशा ही खादर के किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। पिछले महीने गंगा द्वारा किए जा रहे कटान की खबर अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद ही अफसरों ने गंगा तट का दौरा किया था और वहां लकड़ी के स्टड बनवाए थे। पेंटून पुल के लिए पिछले साल गांव डैबलगढ़ में 31 दिन तक चले आंदोलन को अमर उजाला ने रोज प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अमर उजाला किसानों की आवाज बनकर उनके साथ खड़ा रहा। पुल के संबंध में प्रशासनिक व राजनीतिक प्रयासों को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। आज किसानों और अमर उजाला की मुहिम रंग लाई है। जल्दी ही गंगा पर पुल बनना शुरू हो जाएगा। भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि अमर उजाला ने किसानों के आंदोलन को हमेशा धार दी है। अमर उजाला एक तरह से खुद आंदोलन में शामिल रहा है।

बिजनौर के ग्राम डैबलगढ़ में गंगा में बैठकर धरना प्रदर्शन करते ग्रामीण।(फाइल फोटो)- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम डैबलगढ़ में गंगा किनारे धरना प्रदर्शन करने वाली महिलाओ से वार्ता करते राकेश टिक?- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम डैबलगढ़ में गंगा किनारे धरना प्रदर्शन करते ग्रामीण। (फाइल फोटो)- फोटो : BIJNOR

मंडावर में पेंटून पुल की सामग्री के पास मौजूद किसान।- फोटो : BIJNOR