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गन्ने की अगेती फसल को दी किसानों ने तरजीह
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sun, 23 Aug 2015 12:47 AM IST
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धामपुर। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार क्षेत्र के किसानों ने अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई को ज्यादा पसंद किया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 51 प्रतिशत ज्यादा क्षेत्रफल में अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई हुई है।
जबकि पिछले वर्ष जितना अगेती प्रजाति के गन्ने को क्षेत्र के किसानों ने पसंद किया उस हिसाब से गन्ना क्षेत्रफल में खास इजाफा नहीं हुआ है। पिछले साल की तुलना में केवल दो प्रतिशत ज्यादा गन्ना क्षेत्रफल में बुआई हुई। धामपुर गन्ना परिषद के अफजलगढ़ में तो गन्ने का क्षेत्रफल पिछले साल के बराबर ही रहा है। जबकि धामपुर में दो प्रतिशत गन्ना क्षेत्रफल बढ़ा है।
एससीडीआई देवेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि जिस हिसाब से गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ना चाहिए, नहीं बढ़ा है। जिले में दो लाख हैक्टेयर में गन्ने में पिछले साल बुआई हुई थी। जो इस बार दो हजार हेक्टेयर ज्यादा है। किसानों ने इस बार सामान्य प्रजाति के गन्ने की तुलना में अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई को पंसद किया है। कुल क्षेत्रफल में 51 प्रतिशत रकबे में अगेती प्रजाति के गन्ने की फसल है। जबकि शेष में सामान्य प्रजाति के गन्ने की।
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किसानों को एकल आंख से गन्ने की बुआई करने पर जोर
एससीडीआई ने बताया कि गन्ना विभाग की मंशा है कि किसान एक आंख विधि से गन्ने की बुआई कर ज्यादा मुनाफा लें। एकल आंख से बुआई कर एक बीघा में आठ कुंतल गन्ने के स्थान पर केवल 50 किलोग्राम गन्ने की आंख से बुआई की जा सकती है। ऐसा इस बार क्षेत्र में कई किसानों ने किया है।
इससे उनको बेहतर पैदावार मिली है। गन्ने की एकल आंख की दूरी दो फिट और गूल से गूल से दूरी साढे़ चार फिट है। इस विधि से गन्ने की बुआई धान की रोपाई के तरह से होती है। इस विधि से गन्ने की बुआई का समय चल रहा है। किसान इस विधि से गन्ने की बुआई जरूर करें। इस विधि से बुआई करने पर लागत कम और उपज प्रति हेक्यटेयर करीब सवा सात सौ कुंतल से ज्यादा होती है।
पौधे की ऊंचाई सामान्यत: 20 फिट से कम नहीं रहती। एक आंख से करीब 30 से ज्यादा गन्ने निकलते हैं। दो गूलों के बीच खाली पड़ी जगह में सहफसली के रूप में बागान व अन्य फसलों को उगा कर खासा लाभ कमाया जा सकता है। दो पोरियों के बीच बनी को आंख को काट कर एकल आंख तैयार की जाती है।
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जबकि पिछले वर्ष जितना अगेती प्रजाति के गन्ने को क्षेत्र के किसानों ने पसंद किया उस हिसाब से गन्ना क्षेत्रफल में खास इजाफा नहीं हुआ है। पिछले साल की तुलना में केवल दो प्रतिशत ज्यादा गन्ना क्षेत्रफल में बुआई हुई। धामपुर गन्ना परिषद के अफजलगढ़ में तो गन्ने का क्षेत्रफल पिछले साल के बराबर ही रहा है। जबकि धामपुर में दो प्रतिशत गन्ना क्षेत्रफल बढ़ा है।
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एससीडीआई देवेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि जिस हिसाब से गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ना चाहिए, नहीं बढ़ा है। जिले में दो लाख हैक्टेयर में गन्ने में पिछले साल बुआई हुई थी। जो इस बार दो हजार हेक्टेयर ज्यादा है। किसानों ने इस बार सामान्य प्रजाति के गन्ने की तुलना में अगेती प्रजाति के गन्ने की बुआई को पंसद किया है। कुल क्षेत्रफल में 51 प्रतिशत रकबे में अगेती प्रजाति के गन्ने की फसल है। जबकि शेष में सामान्य प्रजाति के गन्ने की।
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किसानों को एकल आंख से गन्ने की बुआई करने पर जोर
एससीडीआई ने बताया कि गन्ना विभाग की मंशा है कि किसान एक आंख विधि से गन्ने की बुआई कर ज्यादा मुनाफा लें। एकल आंख से बुआई कर एक बीघा में आठ कुंतल गन्ने के स्थान पर केवल 50 किलोग्राम गन्ने की आंख से बुआई की जा सकती है। ऐसा इस बार क्षेत्र में कई किसानों ने किया है।
इससे उनको बेहतर पैदावार मिली है। गन्ने की एकल आंख की दूरी दो फिट और गूल से गूल से दूरी साढे़ चार फिट है। इस विधि से गन्ने की बुआई धान की रोपाई के तरह से होती है। इस विधि से गन्ने की बुआई का समय चल रहा है। किसान इस विधि से गन्ने की बुआई जरूर करें। इस विधि से बुआई करने पर लागत कम और उपज प्रति हेक्यटेयर करीब सवा सात सौ कुंतल से ज्यादा होती है।
पौधे की ऊंचाई सामान्यत: 20 फिट से कम नहीं रहती। एक आंख से करीब 30 से ज्यादा गन्ने निकलते हैं। दो गूलों के बीच खाली पड़ी जगह में सहफसली के रूप में बागान व अन्य फसलों को उगा कर खासा लाभ कमाया जा सकता है। दो पोरियों के बीच बनी को आंख को काट कर एकल आंख तैयार की जाती है।