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ट्रैंच विधि के बाद गन्ना बोने के लिए अपनाई रिंग पिट विधि
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बिजनौर में रिंग पिट विधि से बोया गया गन्ना।
- फोटो : BIJNOR
ट्रैंच के बाद किसानों ने अपनाई रिंग पिट विधि
बिजनौर। जिले के किसानों ने गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए अब ट्रैंच विधि से आगे बढ़ते हुए रिंग पिट विधि को अपनाना शुरू कर दिया है। इससे गन्ने का उत्पादन तो बढ़ेगा ही साथ ही किसान सहफसली खेती भी कर सकेंगे। रिंग पिट विधि से पहली बार गन्ना बोया जा रहा है।
किसान कुछ साल पहले तक केवल सामान्य तरीके से ही गन्ना बोते थे। उसके बाद ट्रैंच विधि को अपनाया। इससे गन्ने के उत्पादन में इजाफा हुआ। किसानों ने ट्रैंच विधि से गन्ना बोने के साथ-साथ सहफसली खेती भी की। अब किसान रिंग पिट विधि को भी अपनाया है। किसान अगस्त से नवंबर तक शरदकालीन गन्ना बोते हैं। इस बार रिंग पिट विधि से गन्ना बो रहे हैं। इस विधि में गन्ने की बड ज्यादा बोई जाती हैं और गुल से गुल के बीच दूरी भी अधिक होती है।
ये होती है रिंग पिट विधि
रिंग पिट विधि में दो फीट गोलाई के गोले बनाए जाते हैं। गोलों की गहराई एक फीट रहती है। एक गोले से दूसरे गोले के बीच में तीन फीट की दूूूरी रखी जाती है। एक गुल से दूसरी गुल के बीच में पांच फीट का अंतर रहता है। इन गोलों को एक नाली से जोड़ा जाता है। नाली गोलों से दस सेंटीमीटर ऊपर रहती है। गोले में सिंगल बड वाला गन्ना गोलाई में व लंबाई में बोई जाती हैं। एक गोले में नौ आंख तक आ जाती हैं। इसके ऊपर चार से पांच इंच मिट्टी रखी जाती है।
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ऐसे की कमाई
नजीबाबाद के पास गांव चौकपुरी के रहने वाले नीटू राजपूत ने पिछले साल ट्रायल के तौर पर एक बीघा जमीन में रिंग पिट विधि से गन्ना बोया था। गन्ने के साथ उन्होंने खेत में पीली सरसों भी बोई। खेत में करीब दो हजार रुपये की आधा क्विंटल पीली सरसों निकली। इसके बाद घर के खाने के लिए सब्जी बोई। खेत में करीब 130 से 140 क्विंटल औसत का गन्ना खड़ा है।
रिंग पिट नवीनतम विधि
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार किसान इस बार गन्ना बोने में रिंग पिट विधि का प्रयोग कर रहे हैं। यह गन्ना बोने की नवीनतम विधि है। इससे गन्ने की पैदावार अच्छी निकलती है।
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बिजनौर। जिले के किसानों ने गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए अब ट्रैंच विधि से आगे बढ़ते हुए रिंग पिट विधि को अपनाना शुरू कर दिया है। इससे गन्ने का उत्पादन तो बढ़ेगा ही साथ ही किसान सहफसली खेती भी कर सकेंगे। रिंग पिट विधि से पहली बार गन्ना बोया जा रहा है।
किसान कुछ साल पहले तक केवल सामान्य तरीके से ही गन्ना बोते थे। उसके बाद ट्रैंच विधि को अपनाया। इससे गन्ने के उत्पादन में इजाफा हुआ। किसानों ने ट्रैंच विधि से गन्ना बोने के साथ-साथ सहफसली खेती भी की। अब किसान रिंग पिट विधि को भी अपनाया है। किसान अगस्त से नवंबर तक शरदकालीन गन्ना बोते हैं। इस बार रिंग पिट विधि से गन्ना बो रहे हैं। इस विधि में गन्ने की बड ज्यादा बोई जाती हैं और गुल से गुल के बीच दूरी भी अधिक होती है।
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ये होती है रिंग पिट विधि
रिंग पिट विधि में दो फीट गोलाई के गोले बनाए जाते हैं। गोलों की गहराई एक फीट रहती है। एक गोले से दूसरे गोले के बीच में तीन फीट की दूूूरी रखी जाती है। एक गुल से दूसरी गुल के बीच में पांच फीट का अंतर रहता है। इन गोलों को एक नाली से जोड़ा जाता है। नाली गोलों से दस सेंटीमीटर ऊपर रहती है। गोले में सिंगल बड वाला गन्ना गोलाई में व लंबाई में बोई जाती हैं। एक गोले में नौ आंख तक आ जाती हैं। इसके ऊपर चार से पांच इंच मिट्टी रखी जाती है।
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ऐसे की कमाई
नजीबाबाद के पास गांव चौकपुरी के रहने वाले नीटू राजपूत ने पिछले साल ट्रायल के तौर पर एक बीघा जमीन में रिंग पिट विधि से गन्ना बोया था। गन्ने के साथ उन्होंने खेत में पीली सरसों भी बोई। खेत में करीब दो हजार रुपये की आधा क्विंटल पीली सरसों निकली। इसके बाद घर के खाने के लिए सब्जी बोई। खेत में करीब 130 से 140 क्विंटल औसत का गन्ना खड़ा है।
रिंग पिट नवीनतम विधि
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार किसान इस बार गन्ना बोने में रिंग पिट विधि का प्रयोग कर रहे हैं। यह गन्ना बोने की नवीनतम विधि है। इससे गन्ने की पैदावार अच्छी निकलती है।