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किसान को चाहिए समर्थन मूल्य में वृद्धि, फसल बिकने की गारंटी
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चौधरी विरेंद्र सिंह।
- फोटो : BIJNOR
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किसान को चाहिए समर्थन मूल्य में वृद्धि, फसल बिकने की गारंटी
बिजनौर। केंद्र सरकार ने गेहूं सहित दलहन, तिलहन की छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। इससे साफ हो गया है कि कृषि अध्यादेशों में किसानों की फसलों का समर्थन मूल्य न दिए जाना सिर्फ अफवाह है। हालांकि किसान नेता इस वृद्धि को कम बता रहे हैं। साथ ही फसल बिकने की गारंटी की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार का कहना है कि महंगाई और लागत के अनुसार गेहूं का दाम 7500 रुपये क्विंटल होना चाहिए। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट इस बात को कहती है। समर्थन मूल्य बढ़ने के बाद भी बाजार में गेहूं के दाम 1500 रुपये प्रति क्विंटल हैं। फसल बिकने की कोई गारंटी नहीं है।
आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विरेंद्र सिंह का कहना है कि गेहूं बोने में क्या 50 रुपये की ही लागत बढ़ी है। सरकार बिजली, डीजल सभी के दाम बेतहाशा बढ़ा चुकी है और गेहूं के दामों में केवल 50 रुपये की वृद्धि की गई है। गेहूं के दामों में और इजाफा होना चाहिए। साथ ही फसल बिकने की गारंटी भी होनी चाहिए।
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भाकियू अंबावता के जिला प्रवक्ता शिव कुमार के अनुसार फसलों के दाम तो बढ़ाए गए हैं लेकिन फसल बिकने की कोई गारंटी सरकार लेने को तैयार नहीं है। अध्यादेशों में भी यह नहीं लिखा गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रहेगा। सरकार को अध्यादेशों में यह बात लिखनी चाहिए।
भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि का कहना है कि जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं वे किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रहे हैं। इस पर काम भी बहुत हो रहा है। कहा कि किसानों के बीच कृषि अध्यादेशों को लेकर गलत फहमी है। प्रधानमंत्री खुद किसानों की गलतफहमी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
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बिजनौर। केंद्र सरकार ने गेहूं सहित दलहन, तिलहन की छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। इससे साफ हो गया है कि कृषि अध्यादेशों में किसानों की फसलों का समर्थन मूल्य न दिए जाना सिर्फ अफवाह है। हालांकि किसान नेता इस वृद्धि को कम बता रहे हैं। साथ ही फसल बिकने की गारंटी की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार का कहना है कि महंगाई और लागत के अनुसार गेहूं का दाम 7500 रुपये क्विंटल होना चाहिए। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट इस बात को कहती है। समर्थन मूल्य बढ़ने के बाद भी बाजार में गेहूं के दाम 1500 रुपये प्रति क्विंटल हैं। फसल बिकने की कोई गारंटी नहीं है।
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आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विरेंद्र सिंह का कहना है कि गेहूं बोने में क्या 50 रुपये की ही लागत बढ़ी है। सरकार बिजली, डीजल सभी के दाम बेतहाशा बढ़ा चुकी है और गेहूं के दामों में केवल 50 रुपये की वृद्धि की गई है। गेहूं के दामों में और इजाफा होना चाहिए। साथ ही फसल बिकने की गारंटी भी होनी चाहिए।
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भाकियू अंबावता के जिला प्रवक्ता शिव कुमार के अनुसार फसलों के दाम तो बढ़ाए गए हैं लेकिन फसल बिकने की कोई गारंटी सरकार लेने को तैयार नहीं है। अध्यादेशों में भी यह नहीं लिखा गया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रहेगा। सरकार को अध्यादेशों में यह बात लिखनी चाहिए।
भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि का कहना है कि जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं वे किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रहे हैं। इस पर काम भी बहुत हो रहा है। कहा कि किसानों के बीच कृषि अध्यादेशों को लेकर गलत फहमी है। प्रधानमंत्री खुद किसानों की गलतफहमी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

शिव कुमार।- फोटो : BIJNOR

विनोद कुमार।- फोटो : BIJNOR

सुभाष वाल्मीकि।- फोटो : BIJNOR