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तिरपाल में रहने को विवश है परिवार
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तिरपाल में रहने को विवश है परिवार
अफजलगढ़। तीन सप्ताह पूर्व हुई बारिश में गांव सुआवाला में एक कच्चा मकान गिर गया था। मलबे में परिवार के तीन बच्चे दबकर घायल हो गए थे। तीन सप्ताह बीतने के बाद भी प्रशासनिक की ओर से पीड़ित परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली। परिवार हाड़ कंपा देने वाली ठंड में तिरपाल डालकर रहने को विवश है।
गांव सुआवाला निवासी पीड़ित मो. यामीन पुत्र छुट्टू ने बताया कि तीन सप्ताह पूर्व उसका कच्चा मकान बारिश में गिर गया था, जिसमें दबने से उसके तीन बच्चे भी घायल हो गए थे। खबर का संज्ञान लेकर राजस्व विभाग व विकास विभाग की टीम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया था। पीड़ित को भरोसा दिया था कि उनकी रिपोर्ट पर दैवीय आपदा के तहत पीड़ित को लाभ मिलेगा, लेकिन अभी तक पीड़ित को कोई लाभ नहीं मिला है। पीड़ित परिवार कड़क सर्दी में आंगन में तिरपाल डालकर रहने को विवश है। पेशे से मजदूर मो. यामीन दिनभर मजदूरी कर बच्चों का पेट पालने में लगा है। पीड़ित परिवार अभी भी प्रशासन की ओर से आशियाना बनने और आर्थिक मदद की आस दिल में संजोए बैठा है, लेकिन बेपरवाह अधिकारियों द्वारा पीड़ित को मदद के नाम पर केवल भरोसे पर भरोसा ही मिल रहा है। पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से आर्थिक मदद व पक्का मकान बनवाने की गुहार लगाई है। उधर, राजस्व विभाग के कानूनगो वीरेंद्र कुमार का कहना है कि पीड़ित परिवार से जरूरी कागजात मांगे गए हैं। पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी।
उधर, ग्राम विकास अधिकारी करुणा चौहान ने बताया कि राजस्व विभाग से प्राकृतिक आपदा की धनराशि मिलते ही पीड़ित परिवार का नाम मुख्यमंत्री आवास योजना में आ जाएगा। इस योजना के तहत उसका आवास बन जाएगा।
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अफजलगढ़। तीन सप्ताह पूर्व हुई बारिश में गांव सुआवाला में एक कच्चा मकान गिर गया था। मलबे में परिवार के तीन बच्चे दबकर घायल हो गए थे। तीन सप्ताह बीतने के बाद भी प्रशासनिक की ओर से पीड़ित परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली। परिवार हाड़ कंपा देने वाली ठंड में तिरपाल डालकर रहने को विवश है।
गांव सुआवाला निवासी पीड़ित मो. यामीन पुत्र छुट्टू ने बताया कि तीन सप्ताह पूर्व उसका कच्चा मकान बारिश में गिर गया था, जिसमें दबने से उसके तीन बच्चे भी घायल हो गए थे। खबर का संज्ञान लेकर राजस्व विभाग व विकास विभाग की टीम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया था। पीड़ित को भरोसा दिया था कि उनकी रिपोर्ट पर दैवीय आपदा के तहत पीड़ित को लाभ मिलेगा, लेकिन अभी तक पीड़ित को कोई लाभ नहीं मिला है। पीड़ित परिवार कड़क सर्दी में आंगन में तिरपाल डालकर रहने को विवश है। पेशे से मजदूर मो. यामीन दिनभर मजदूरी कर बच्चों का पेट पालने में लगा है। पीड़ित परिवार अभी भी प्रशासन की ओर से आशियाना बनने और आर्थिक मदद की आस दिल में संजोए बैठा है, लेकिन बेपरवाह अधिकारियों द्वारा पीड़ित को मदद के नाम पर केवल भरोसे पर भरोसा ही मिल रहा है। पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से आर्थिक मदद व पक्का मकान बनवाने की गुहार लगाई है। उधर, राजस्व विभाग के कानूनगो वीरेंद्र कुमार का कहना है कि पीड़ित परिवार से जरूरी कागजात मांगे गए हैं। पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी।
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उधर, ग्राम विकास अधिकारी करुणा चौहान ने बताया कि राजस्व विभाग से प्राकृतिक आपदा की धनराशि मिलते ही पीड़ित परिवार का नाम मुख्यमंत्री आवास योजना में आ जाएगा। इस योजना के तहत उसका आवास बन जाएगा।
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