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25 साल में तीन किमी दूर पहुंचा मेला, पांच गुणा बढ़ी भीड़

Tue, 01 Nov 2022 12:04 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 12:04 AM IST
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Fair reached three km away in 25 years, crowd increased five times
25 साल में तीन किमी दूर पहुंचा मेला, पांच गुणा बढ़ी भीड़
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बिजनौर। समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है, गंगा स्नान मेला भी बदलाव का साक्षी है। जी हां, 25 सालों में गंगा के साथ साथ मेला भी दूर होता चला गया। इस बार महात्मा विदुर की कुटी से 3700 मीटर की दूरी पर मेला लग रहा है जबकि दो दशक पहले कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही तंबुओं का शहर बस जाता था। वहीं भीड़ भी पांच गुणा बढ़ी है।
मेला आयोजन की जिम्मेदारी जिला पंचायत के पास है। इस संस्था का पुराना रिकार्ड तस्दीक करता है कि करीब 25 साल पहले मेला आयोजन पर छह से सात लाख रुपया खर्च किया जाता था। पूरे मेले में 150 हैंडपंप से काम चलता रहा। अब हैंडपंपों की संख्या बढ़कर साढ़े चार सौ हो गई है, इनके अलावा सात पंपिंग सेट भी लगाने पड़ते हैं।
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समय के साथ यह बदलाव होता गया
जिला पंचायत के अधिकारी बताते हैं कि करीब पच्चीस साल पहले तक मेले में लगाने के लिए जिला पंचायत के पास बीस टैंट हुआ करते थे। उन्हीं से काम चल जाता है, अब 120 तंबू लगाने पड़ते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं मेले का दायरा भी हर साल बढ़ रहा है। इस पर 12 लाख वर्ग फुट में मेला लग रहा है। मुख्य रास्ते की चौड़ाई तीस फुट रखी गई है, जबकि दो दशक पहले तक पंद्रह फुट चौड़े रास्ते से काम चलता रहा।
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दस सालों से बन रहा वैकल्पिक मार्ग
मेले में भीड़ बढ़ी तो निजी वाहनों से जाने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ। रास्ते पर जाम की समस्या बनने लगी। इससे निपटने के लिए दस पहले वैकल्पिक मार्ग बनाया गया, जिसके बाद से इसकी लगातार जरूरत समझी जा रही है।
विदुरकुटी से 3700 मीटर दूर है मेला
इस बार विदुरकुटी से 3700 मीटर दूर गंगा के तट पर मेला लग रहा है। जबकि दो दशक पहले तक मेला विदुरकुटी के आस पास ही लग जाता था। इसकी वजह यह है कि लगातार गंगा की धारा विदुरकुुटी से दूर हो रही है।
मेले में ही तय कर लिए जाते थे रिश्ते
गंगा स्नान मेले का सामाजिक रूप में बड़ा महत्व रहा है। बुजुर्ग बताते हैं कि गंगा स्नान मेले में दूर दराज के गांव या दूसरे क्षेत्र के लोगों से मिलना जुलना होता था। लोग अपने बेटे या बेटियों के रिश्ते भी मेले में एक दूसरे के परिवार के संग बैठकर तय कर लिया करते थे। साथ ही खरीदारी का भी उपयुक्त स्थान रहा है। हालांकि समय के साथ बदलाव हुआ है। पहले भैंसा बुग्गी और बैल बुग्गी से लोग मेले में पहुंचते थे, अब उनकी जगह ट्रैक्टर ट्राली और कारों ने ले ली है।

तीन के बजाये इस बार एक रहेगी पार्किंग
यातायात पुलिस की ओर से मेले में तीन तीन पार्किंग बनती रही हैं लेकिन इस बार मेले के नजदीक ही केवल एक पार्किंग बनाई जा रही है। हालांकि इस पार्किंग का दायरा बढ़ाया गया है। उधर इस बार मेले में भारत माता का अस्थाई मंदिर बनाया जा रहा है।
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