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जल है तो कल है... जल संचय को सभी निभा रहे अपनी जिम्मेदारी

Wed, 23 Mar 2022 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2022 12:21 AM IST
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Everyone is fulfilling their responsibility for water conservation
जल संचय को सभी निभा रहे अपनी जिम्मेदारी
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बिजनौर। जल है, तो कल है। स्लोगन पढ़ने में ही अच्छा नहीं है, वास्तव में हमें कल सुरक्षित रखने को पानी का संचय करना होगा। शासन और सरकारी विभागों द्वारा जल संचयन करने के लिए लगातार प्रयास चल रहा है। सरकारी बिल्डिंगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। शहरों में कॉलोनियों में इसके बिना नक्शा पास नहीं किया जा रहा है। जिले में जलसंरक्षण का असर भी दिख रहा है। तीन ब्लॉक अब डॉर्क जोन से सामान्य स्थिति की ओर लौट आए हैं।
विश्व जल दिवस पर भूजल स्तर की स्थिति देखी, तो जनपद में जलसंचय के लिए चल रहे अभियान सफल दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2012 में जनपद में चार ब्लॉक नूरपुर, जलीलपुर, स्योहार और नहटौर ब्लाक डार्क जोन में चल गए थे। इस कारण यहां किसानों को भी फसलों की सिंचाई के लिए नलकूप लगाने को कनेक्शन नहीं मिल रहे थे। जनपद में नहरों का जाल फैलने और जल संचय के कारण इनमें से जलीलपुर ब्लॉक को छोड़कर तीन ब्लॉक सामान्य स्थिति में पहुंच गई है। नगरपालिका बिजनौर, विकास भवन आदि सरकारी कार्यालयों में भी कई साल पहले ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हुए हैं। छत पर एकत्र होने वाला पानी सीधा इनमें पहुंच रहा है।
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प्रयास के परिणाम आ रहे सामने : सीडीओ
सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि जल संचय की जागरूकता, सिस्टम लगाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। उसके अनुरूप परिणाम भी अच्छे सामने आ रहे हैं। तीन जोन सामान्य स्थिति में लौट आए हैं। जिले में अब केवल जलीलपुर ब्लॉक ही डॉर्क जोन में है। उम्मीद है, यह भी कुछ समय बाद सामान्य स्थिति में आ जाएगा।
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स्लोगन से ग्रामीणों को किया जा रहा जागरूक
पंचायत राज विभाग की ओर से जल संचय, पानी बर्बाद न करने, जल है, तो जीवन है आदि स्लोगन दीवारों पर लिखकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही वर्ष 2019-20 में सभी पंचायतों में सरकारी नलों के पानी को संचय करने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए थे। भवनों पर सिस्टम स्थापित हो गए है और बाकी भवनों पर स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है।

फसल की ड्रिप विधि से सिंचाई को बढ़ावा
गन्ना विभाग फसलों की सिंचाई के लिए ड्रिप एवं स्प्रिंकलर विधि अपनाने पर जोर दे रहा है। जनपद में गत वर्ष करीब छह किसानों ने उक्त विधि को अपनाया था। इस योजना पर किसानों को अनुदान भी दिया जाता है। साथ ही खेतों में छोटी छोटी क्यारी बनाकर फसलों सिंचाई करने की सलाह दी जा रही है।
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