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Bijnor News: जिन मरीजों ने छिपाई एचआईवी बीमारी उन पर दवा भी हारी

Fri, 08 May 2026 12:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 12:54 AM IST
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Even medicine fails on patients who hide their HIV disease.
अमन कुमार शर्मा
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बिजनौर। जिन मरीजों ने एचआईवी बीमारी छुपाई और समय से इलाज शुरू नहीं किया। उन पर दवा भी बेअसर रही। महात्मा विदुर मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में चिकित्सकों की टीम द्वारा एचआईवी मरीजों पर किए गए शोध में इसकी पुष्टि हुई। यह शोध मेटचनिकॉफ रिसर्च इंस्टीट्यूट जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा शर्मा, डॉ. कृति गुप्ता, राधा चौहान, मोहम्मद शारिक ने एचआईवी मरीजों पर शोध किया। शोध का उद्देश्य एचआईवी पॉजिटिव रोगियों में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) शुरू करने से पहले और बाद में सीडी4 कोशिका गणना और वायरल लोड की तुलना करना रहा।
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जनवरी 2015 से फरवरी 2025 तक के 1008 एचआईवी पॉजिटिव मरीजों पर यह अध्ययन किया गया। इसमें उन रोगियों को शामिल किया गया, जिन्होंने कम से कम 12 महीनों तक अपनी प्रारंभिक एआरटी रेजिमेन प्राप्त की थी। जिनके पास एआरटी शुरू करने से पहले और 12 महीने बाद सीडी4 कोशिका गणना और वायरल लोड के परिणाम उपलब्ध थे।
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डॉ. कृति गुप्ता ने बताया कि अध्ययन में पाया कि जिन मरीजों की सीडी4 सेल काउंट बढ़ी हुई थी, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत थी और एआरटी शुरू करने के बाद उनकी सीडी4 सेल काउंट में वृद्धि हुई। वहीं, जिन मरीजों की सीडी4 सेल काउंट कम थे, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर रही।

एआरटी शुरू होने के बाद भी उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर रही। उन पर दवा बेअसर रही। इससे पता चला है कि सीडी4 सेल काउंट में कम बढ़ोतरी हुई, उन्होंने देरी से अपना इलाज शुरू कराया।
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