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विषम परिस्थितियों में भी डाक बांटकर निभा रहीं फर्ज
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डाकिया बबीता।
- फोटो : BIJNOR
विषम परिस्थितियों में भी डाक बांटकर निभा रहीं फर्ज
बिजनौर। एक ओर जहां लोग कोरोना संक्रमण को लेकर भयभीत हैं, वहीं महिला डाकिया अपने फर्ज को बिना किसी डर के अंजाम दे रही हैं। वे लोगों को उनके घरों तक डाक पहुंचा रही हैं। ये ऐसे लोगों के लिए सीख हैं, जो सरकार की ओर से सुख सुविधा मिलने के बाद भी लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे और अपने साथ साथ दूसरों के जीवन से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही इस लड़ाई में महिलाएं भी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। अन्य विभागों के साथ डाक विभाग में कार्यरत महिला कर्मचारी भी सरकार की इस मुहिम का हिस्सा हैं। विशेषकर डाकिया घर-घर जाकर डाक बांटकर लोगों को उनके घरों तक ही आवश्यक सेवाएं दे रही हैं। जिला मुख्यालय पर कार्यरत प्रधान डाकघर में कुल तीन डाकिया कार्यरत हैं।
परिस्थितियां विषम हैं, लेकिन डाक बांटना फर्ज
प्रधान डाकघर में कार्यरत डाकिया सुशीला देवी ने बताया कि उनके पास मोहल्ला चाहशीरी का एरिया है। कुछ दिन पूर्व वहां के एक जमाती के कोरोना संक्रमित निकलने पर इस पूरे इलाके को सील कर दिया गया था। इसके बावजूद कभी कभी आवश्यकता पड़ने पर उन्हें डाक बांटने जाना पड़ता है। ये उनकी ड्यूटी में शामिल है, ऐसी परिस्थिति में सरकार का सभी को साथ देना चाहिए।
जोखिम तो है, लेकिन देश सेवा सर्वोपरि
पोस्टमैन बबीता का कहना है कि कुछ दिन पूर्व ही उन्होंने डाक विभाग नौकरी पाई है और ऐसी स्थिति जीवन में पहली बार देखी है। वे उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन करती हैं। वर्तमान में डाक बांटना ही सबसे मुश्किल का काम है, क्योंकि उन्हें इस काम के लिए घर घर जाना पड़ता है।
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बिजनौर। एक ओर जहां लोग कोरोना संक्रमण को लेकर भयभीत हैं, वहीं महिला डाकिया अपने फर्ज को बिना किसी डर के अंजाम दे रही हैं। वे लोगों को उनके घरों तक डाक पहुंचा रही हैं। ये ऐसे लोगों के लिए सीख हैं, जो सरकार की ओर से सुख सुविधा मिलने के बाद भी लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे और अपने साथ साथ दूसरों के जीवन से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही इस लड़ाई में महिलाएं भी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। अन्य विभागों के साथ डाक विभाग में कार्यरत महिला कर्मचारी भी सरकार की इस मुहिम का हिस्सा हैं। विशेषकर डाकिया घर-घर जाकर डाक बांटकर लोगों को उनके घरों तक ही आवश्यक सेवाएं दे रही हैं। जिला मुख्यालय पर कार्यरत प्रधान डाकघर में कुल तीन डाकिया कार्यरत हैं।
परिस्थितियां विषम हैं, लेकिन डाक बांटना फर्ज
प्रधान डाकघर में कार्यरत डाकिया सुशीला देवी ने बताया कि उनके पास मोहल्ला चाहशीरी का एरिया है। कुछ दिन पूर्व वहां के एक जमाती के कोरोना संक्रमित निकलने पर इस पूरे इलाके को सील कर दिया गया था। इसके बावजूद कभी कभी आवश्यकता पड़ने पर उन्हें डाक बांटने जाना पड़ता है। ये उनकी ड्यूटी में शामिल है, ऐसी परिस्थिति में सरकार का सभी को साथ देना चाहिए।
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जोखिम तो है, लेकिन देश सेवा सर्वोपरि
पोस्टमैन बबीता का कहना है कि कुछ दिन पूर्व ही उन्होंने डाक विभाग नौकरी पाई है और ऐसी स्थिति जीवन में पहली बार देखी है। वे उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन करती हैं। वर्तमान में डाक बांटना ही सबसे मुश्किल का काम है, क्योंकि उन्हें इस काम के लिए घर घर जाना पड़ता है।

प्रधान डाकघर में कार्यरत डाकिया सुशीला देवी।- फोटो : BIJNOR
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