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एक माह बाद भी दूर नहीं हुई बसों की खामियां
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एक माह बाद भी दूर नहीं हुई बसों की खामियां
बिजनौर। जिन बसों को सड़क पर दौड़ना चाहिए था, उनके पहिये थमे हुए हैं। दरअसल, खराबी के चलते दस बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। पिछले एक महीने से अभी तक मरम्मत नहीं हो पाई है। अगर ये बसें भी चालू हालत में होती तो कई सड़कों पर बसों के फेरे बढ़ गए होते।
बिजनौर रोडवेज डिपो के पास 114 बसें हैं। जिसमें 84 बसें निगम और 29 बसें अनुबंधित हैं। डिपो से प्रदेश के लगभग सभी रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। वहीं, बिजनौर से लखनऊ और प्रयागराज तक जाती हैं। जिले से लेकर पूरे प्रदेश में बिजनौर से बसें जाती हैं। उधर, डिपो की दस बसें पिछले एक महीने से सड़कों पर नहीं हैं। कारण है तकनीकी खराबी। ये बसें खराब हुई तो इन्हें वर्कशॉप में खड़ा कर दिया गया। जहां इन बसों के सही होने का इंतजार किया जा रहा है। बताया गया कि इन बसों में जो पार्ट्स लगाए जाने हैं वे उपलब्ध नहीं है। बिजनौर डिपो से नजीबाबाद या मेरठ रूट पर रात के किसी भी समय आपको बस मिल जाएगी, लेकिन कुछ रूट ऐसे हैं जिन पर शाम ढलने के बाद बस नहीं मिलती। खासकर बिजनौर से नगीना, बिजनौर से नहटौर और चांदपुर के मुश्किल से बस मिलती है।
प्रयागराज तक जा रहीं बिजनौर की बसें
बिजनौर डिपो की बसों का रूट सिर्फ जिले या फिर आसपास के जनपदों तक सीमित नहीं है। डिपो इंचार्ज कुसुमलता ने बताया कि यहां से प्रयागराज, लखनऊ, पीलीभीत, कोटद्वार, दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद तक बसों का संचालन होता है। उधर, कानपुर होते हुए भी बस लखनऊ जाती हैं। वहीं, फोरमैन राजीव ने बताया कि बसों के जो पार्ट्स खराब हुए हैं, वे मिल नहीं रहे हैं। जिस कारण बसें वर्कशॉप पर खड़ी हुई हैं। हर रोज दो-चार बसे खराबी होने के कारण वर्कशॉप पर आती रहती हैं।
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बिजनौर। जिन बसों को सड़क पर दौड़ना चाहिए था, उनके पहिये थमे हुए हैं। दरअसल, खराबी के चलते दस बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। पिछले एक महीने से अभी तक मरम्मत नहीं हो पाई है। अगर ये बसें भी चालू हालत में होती तो कई सड़कों पर बसों के फेरे बढ़ गए होते।
बिजनौर रोडवेज डिपो के पास 114 बसें हैं। जिसमें 84 बसें निगम और 29 बसें अनुबंधित हैं। डिपो से प्रदेश के लगभग सभी रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। वहीं, बिजनौर से लखनऊ और प्रयागराज तक जाती हैं। जिले से लेकर पूरे प्रदेश में बिजनौर से बसें जाती हैं। उधर, डिपो की दस बसें पिछले एक महीने से सड़कों पर नहीं हैं। कारण है तकनीकी खराबी। ये बसें खराब हुई तो इन्हें वर्कशॉप में खड़ा कर दिया गया। जहां इन बसों के सही होने का इंतजार किया जा रहा है। बताया गया कि इन बसों में जो पार्ट्स लगाए जाने हैं वे उपलब्ध नहीं है। बिजनौर डिपो से नजीबाबाद या मेरठ रूट पर रात के किसी भी समय आपको बस मिल जाएगी, लेकिन कुछ रूट ऐसे हैं जिन पर शाम ढलने के बाद बस नहीं मिलती। खासकर बिजनौर से नगीना, बिजनौर से नहटौर और चांदपुर के मुश्किल से बस मिलती है।
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प्रयागराज तक जा रहीं बिजनौर की बसें
बिजनौर डिपो की बसों का रूट सिर्फ जिले या फिर आसपास के जनपदों तक सीमित नहीं है। डिपो इंचार्ज कुसुमलता ने बताया कि यहां से प्रयागराज, लखनऊ, पीलीभीत, कोटद्वार, दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद तक बसों का संचालन होता है। उधर, कानपुर होते हुए भी बस लखनऊ जाती हैं। वहीं, फोरमैन राजीव ने बताया कि बसों के जो पार्ट्स खराब हुए हैं, वे मिल नहीं रहे हैं। जिस कारण बसें वर्कशॉप पर खड़ी हुई हैं। हर रोज दो-चार बसे खराबी होने के कारण वर्कशॉप पर आती रहती हैं।
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