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Bijnor News: आठ वेंटिलेटर की थम गई धड़कन, नौ नहीं ले पा रहे सांस
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बिजनौर। मेडिकल कॉलेज में 17 वेंटिलेटर भी हैं और इन्हें चलाने वाले एनेस्थेटिक चिकित्सक भी हैं। लेकिन सहायक स्टाफ नहीं होने से वेंटिलेटर वार्ड में रखे धूल फांक रहे हैं। इनमें से आठ वेंटिलेटर क्रियाशील न होने से बंद पड़ गए हैं। जो नौ बचे भी हैं उन पर मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे। ऐसा ही रहा तो वह भी जल्द खराब हो जाएंगे।
सरकार ने कोरोना काल में जिला संयुक्त चिकित्सालय को 17 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए थे। इनके संचालन के लिए बाकायदा आईसीयू बना हुआ है। मगर, आईसीयू रूम के गेट पर ताला लटका है। इससे साफ जाहिर है कि वेंटिलेटर वार्ड में रखे धूल फांक रहे हैं। वेंटिलेटर चलाने के लिए एनेस्थेटिक चिकित्सक जरूरी हैं। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में छह एनेस्थेटिक डॉक्टर कार्यरत हैं। मगर, स्टाफ नर्स और टेक्नीशियन की कमी होने का हवाला देकर वेंटिलेटर का संचालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। असुविधाओं से बचने के लिए मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
रोजाना रेफर होते हैं गंभीर मरीज
स्टाफ के अभाव में आईसीयू वार्ड संचालित नहीं होने से मरीजों को मेडिकल कॉलेज से हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। रोजाना एक से दो मरीज गंभीर स्थिति में भेजे जाते हैं। इनमें ज्यादातर मरीज ऐसे होते हैं, अगर वेंटिलेटर की व्यवस्था तो उनका इलाज यहीं संभव है।
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बिना चले ही बंद पड़ गए आठ वेंटिलेटर
मिली जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में इस समय 17 वेंटिलेटर हैं। इनमें से वर्तमान में केवल नौ वेंटिलेटर ही कार्यशील हैं जबकि, आठ वेंटिलेटर बिना चले ही बंद पड़ गए हैं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि धूल में रखे-रखे वेंटिलेटर खराब हो रहे हैं।
स्टाफ नर्स की भर्ती की चल रही प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल स्टाफ और स्टाफ नर्स की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए शासन को पत्र भी लिखा है। शासन ने कॉलेजों में पैरामेडिकल, तकनीकी संवर्ग के पदों पर भर्ती के लिए अटल बिहारी बाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ और स्टाफ नर्स के नियमित चयन के लिए एसजीपीजीआई, लखनऊ द्वारा लिखित परीक्षा कराने के लिए नामित किया गया है।
मेडिकल काॅलेज में स्टाफ नर्स की नियुक्ति के लिए फाइल प्रक्रियाधीन है। शासन स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद ही भर्ती की जाएगी। पहले एक बार स्टाफ नर्स भर्ती की फाइल कैंसिल हो चुकी है। ....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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सरकार ने कोरोना काल में जिला संयुक्त चिकित्सालय को 17 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए थे। इनके संचालन के लिए बाकायदा आईसीयू बना हुआ है। मगर, आईसीयू रूम के गेट पर ताला लटका है। इससे साफ जाहिर है कि वेंटिलेटर वार्ड में रखे धूल फांक रहे हैं। वेंटिलेटर चलाने के लिए एनेस्थेटिक चिकित्सक जरूरी हैं। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में छह एनेस्थेटिक डॉक्टर कार्यरत हैं। मगर, स्टाफ नर्स और टेक्नीशियन की कमी होने का हवाला देकर वेंटिलेटर का संचालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। असुविधाओं से बचने के लिए मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
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रोजाना रेफर होते हैं गंभीर मरीज
स्टाफ के अभाव में आईसीयू वार्ड संचालित नहीं होने से मरीजों को मेडिकल कॉलेज से हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। रोजाना एक से दो मरीज गंभीर स्थिति में भेजे जाते हैं। इनमें ज्यादातर मरीज ऐसे होते हैं, अगर वेंटिलेटर की व्यवस्था तो उनका इलाज यहीं संभव है।
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बिना चले ही बंद पड़ गए आठ वेंटिलेटर
मिली जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में इस समय 17 वेंटिलेटर हैं। इनमें से वर्तमान में केवल नौ वेंटिलेटर ही कार्यशील हैं जबकि, आठ वेंटिलेटर बिना चले ही बंद पड़ गए हैं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि धूल में रखे-रखे वेंटिलेटर खराब हो रहे हैं।
स्टाफ नर्स की भर्ती की चल रही प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल स्टाफ और स्टाफ नर्स की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए शासन को पत्र भी लिखा है। शासन ने कॉलेजों में पैरामेडिकल, तकनीकी संवर्ग के पदों पर भर्ती के लिए अटल बिहारी बाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ और स्टाफ नर्स के नियमित चयन के लिए एसजीपीजीआई, लखनऊ द्वारा लिखित परीक्षा कराने के लिए नामित किया गया है।
मेडिकल काॅलेज में स्टाफ नर्स की नियुक्ति के लिए फाइल प्रक्रियाधीन है। शासन स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद ही भर्ती की जाएगी। पहले एक बार स्टाफ नर्स भर्ती की फाइल कैंसिल हो चुकी है। ....डॉ. तुहीन वशिष्ठ, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर