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सूखे के साथ गन्ना व धान पर बीमारी का ‘ग्रहण’

Sun, 11 Sep 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Sep 2022 12:15 AM IST
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'Eclipse' of disease on sugarcane and paddy with drought
बिजनौर में फसलों पर सूखे के असर का आकलन करते एडीएम अरविंद कुमार सिंह व तहसीलदार सदर अनुराग सिंह। - फोटो : BIJNOR
सूखे के साथ गन्ना व धान पर बीमारी का ‘ग्रहण’
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बिजनौर। मौसम के साथ फसलों को लग रही बीमारी किसानों की कमर तोड़ रही हैं। बारिश कम होने से फसलों के उत्पादन पर असर पड़ा है, वहीं गन्ना व धान की फसल बीमारी की चपेट में आने से किसान चिंतित है। बारिश कम होने व तापमान में बढ़ोतरी होने से धान की फसल सफेद, पीठवाला फुदका और गन्ने में तनाभेदक आदि बीमारी लग रही है। बीमारी व सूखे के आंकलन के लिए जनपद व तहसील स्तर पर अफसरों की टीमें गठित की गई हैं। यह टीमें 12 सितंबर तक ग्राम वार कम बारिश के कारण फसलों की क्षति का आकलन करेंगी। अफसरों के अभी तक के आंकलन में गन्ने के सापेक्ष धान की फसल को ज्यादा नुकसान सामने आ रहा हैं।
जनपद में 55,345 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल तथा सवा दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना फसल है। जनपद में गन्ना मुख्य फसल है। शासन के निर्देश पर कम बारिश से फसलों की क्षति का आकलन करने के लिए जनपद स्तर पर एडीएम वित्त एवं राजस्व की अध्यक्षता एवं तहसील स्तर एसडीएम की अध्यक्षता में टीमें गठित की गई। इसके अतिरिक्त तहसीलवार नोडल अधिकारी व कृषि वैज्ञानिक नामित किए गए। यह टीमें कई बिंदुओं पर बारिश कम होने फसलों के नुकसान का आकलन कर रही है। आंकलन कर रहे अफसरों के अनुसार अभी तक गन्ना फसल को नौ से दस प्रतिशत ही नुकसान सामने आ रहा है, जबकि धान की फसल को अभी तक करीब पंद्रह प्रतिशत नुकसान दिखाई दे रहा है। अभी आंकलन काफी क्षेत्र का शेष है। 12 सितंबर तक ग्राम वार आंकलन पूर्ण हो जाएगा। उसके बाद ही सही स्थिति स्पष्ट होगी।
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इन बिंदुओं पर हो रहा सर्वे
टीमें दस बिंदुओं के प्रारूप पर क्षति का आंकलन भर रही है। फसल का नाम, सामान्य बुवाई का क्षेत्र, सिंचित क्षेत्र, वर्तमान सीजन में वास्तविक बोया गया क्षेत्र, गैर बोया क्षेत्र, सूखा से प्रभावित बोया क्षेत्र, बोया हुआ क्षेत्र जिसमें फसल क्षति 33 से 50 प्रतिशत के बीच है। बोया गया क्षेत्र जिसमें फसल क्षति 50 प्रतिशत से अधिक है आदि बिंदुओं पर सर्वे हो रहा है।
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इन बीमारियों की चपेट में फसल
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने कहा कि कम बारिश व तापमान ज्यादा होने से जनपद में धान की फसल में सफेद पीठवाला फुदका, वायरस, गन्ना फसल तनाभेदक आदि बीमारी की चपेट में है। प्रकोपित कल्ले मुरझाने लगते हैं। जड़ों का विकास रुक जाता है एवं धीरे-धीरे भूरे रंग में बदल जाती है।
इस बार सितंबर माह में हुई 442 एमएम बारिश
वर्ष बारिश एमएम
2020-21 941.20
2021-22 1351. 60
2022-23 442.00
सितंबर माह में औसतन अधिकतम तापमान
वर्ष 2020 33.9 डिग्री सेल्सियस
वर्ष 2021 32.0 डिग्री सेल्सियस
वर्ष 2022 37.0 डिग्री सेल्सियस
बोले अफसर
जिले भर में सूखे को लेकर सर्वे कराया जा रहा है जो 12 सितंबर तक पूरा हो जायेगा। टीम द्वारा किए गए सर्वे की जांच के लिए हम स्वयं खेतों पर पहुंच कर आकलन कर रहे है।

-अरविंद कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व।
धान की फसल पर बीमारी दिखाई दे रही है। स्वयं भी लगातार धान के प्लांटों का निरीक्षण कर रहे हैं। कम बारिश व बीमारी से फसलों की क्षति का आंकलन चल रहा है।
- मनोज रावत, जिला कृषि रक्षा अधिकारी।
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