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दुष्यंत की गजलें आज भी प्रासंगिक : प्रोफेसर बटुक

Sun, 07 Sep 2025 05:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Sep 2025 05:30 PM IST
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Dushyant's ghazals are still relevant today: Professor Batuk
- मास्टर सुंदरलाल स्मृति न्यास की ओर से हुआ विचार गोष्ठी का आयोजन
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गढ़ रोड पर कैलाशपुरी स्थित मास्टर सुंदरलाल स्मृति न्यास की ओर से विचार गोष्ठी हुई। यह क्रांतिकारी साहित्यकार दुष्यंत कुमार को समर्पित रही। वक्ताओं ने दुष्यंत की चर्चा के अलावा देश में हिंदी की दशा और दिशा पर भी विस्तार से विमर्श किया। गोष्ठी की अध्यक्षता समाजसेवी एवं पूर्व कमिश्नर डॉक्टर आरके भटनागर ने की।
कार्यक्रम आयोजक लेखक और कवि प्रोफेसर वेद प्रकाश बटुक ने कहा कि आज हम आजाद भारत में रहकर भी स्वयं को स्वतंत्र महसूस नहीं कर रहे हैं, क्योंकि यहां पर गोरे अंग्रेजों के बजाय काले अंग्रेजों का राज है। दुष्यंत की गजलें आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी रचनाओं ने समाज को आईना भी दिखाया है।
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गोष्ठी में लेखक प्रभात राय ने कहा कि दुष्यंत कुमार की गजलें हमें याद दिलाती हैं कि लेखकों और कवियों को आम आदमी की तकलीफों और परेशानियों से बेखबर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए जिन लोगों ने बलिदान दिया। आज हम उनके सपनों का भारत नहीं बना पाए हैं।
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मनोविज्ञान की छात्रा शाहीन ने अनुरोध किया कि साहित्यकार भी अपने दायित्वों के प्रति सजग रहें। इसके बाद युवा कवि अजय कुमार ने अपनी अपने विचार प्रकट करते हुए कहा- कोई लगा न सका उसके कद का अंदाजा, क्योंकि वह आसमान था और सर झुका के चलता रहा।

संचालन गजलकार डॉ. रामगोपाल भारतीय ने किया। गोष्ठी में वक्ताओं ने समसामयिक विषयों पर चर्चा के अलावा वर्तमान समय में कवियों के सामने आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया। युवा कवि उस्मान भारत ने कहा कि भागते हुए लड़के अक्सर भाग जाया करते हैं, समाज के कलंकित रीति रिवाज से...। शहर के युवा गीतकार नीतीश राजपूत ने सुनाया- जमाना भूल जाएगा जमानेभर की बातों को, मगर दुनिया मोहब्बत को हजारों साल गाएगी। डॉ. रामगोपाल भारतीय ने कहा- अगर सब कुछ यहां पैसा नहीं तो गरीबों का निरादर क्यों हुआ है। इस अवसर पर मुनेश त्यागी सहित अन्य ने भी विचार व्यक्त किए।
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