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बनैली नदी में उफान आने से ग्रामीणों में खौफ

अमर उजाला/बिजनौर Updated Mon, 13 Aug 2018 12:29 AM IST
अफजलगढ़ क्षेत्र में नचना नदी में आए उफान से  गांव में घुसा पानी।
अफजलगढ़ क्षेत्र में नचना नदी में आए उफान से गांव में घुसा पानी। - फोटो : अमर उजाला
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अफजलगढ़ में बनैली नदी में रविवार दोपहर बाद अचानक उफान आने से आलमपुर के ग्रामीण दहशत में है। नदी के तेज प्रवाह ने तेजी से गांव की ओर से कटान शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि चार पांच दिन से बारिश बंद थी तो ग्रामीणों में राहत थी।
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 ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। आरोप है कि जब सिंचाई विभाग के अधिकारियों को कमजोर तटबंधों पर काम करना चाहिए था। ग्रामीण कमल कुमार, उमेश कुमार, राकेश कुमार, बाबू सिंह, टिकेंद्र कुमार का कहना है    कि उनके गांव में इस नदी में वर्षाकाल के दौरान हर साल बाढ़ आती है। लेकिन विभाग के अधिकारियों ने आज तक प्रोजेक्ट तैयार कर गांव को बचाने का प्रयास करने का काम नहीं किया गया। जिसका नुकसान ग्रामीणों को   भुगतना पड़ता है। अधिकारी और सत्ता पक्ष के नेता उनके पास तब आते है जब वह सब कुछ बाढ़ गंवा चुके होते हैं और अगले साल मजबूती से काम को पूरा कराने की की दुहाई देकर चले जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश से बनैली नदी में अप्रत्याशित पानी आया है। नदी के पानी की तेज धार कटाव कर गांव की ओर से रुख कर रही है। कटाव को देख ग्रामीणों में बेचैनी है।

तटबंध कटाव रोकने के लिए काम शुरू : एक्सईएन
धामपुर। अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर के एक्सईएन रामबाबू का कहना है कि इस बार सरकार की ओर से स्वीकृत दो करोड़ की 34 परियोजनाओं को पूरा कराने को भी धन का आवंटन नहीं हुआ है। जबकि यह धन चालू वित्तीय वर्ष में समय से आवंटित हो जाना चाहिए था। फिर भी विभाग की ओर से जिले में चार स्थानों पर आपातकाल मद के बजट से कटाव निरोधक कार्य करा रहे है। इन कार्यों में गांव आलमपुर गांबड़ी का बनैली तटबंद भी शामिल है। जिस पर चार दिन से काम चल रहा है। बाकी कार्य आपातकाल मद से बिजनौर में गांव फतेहपुर सवाचंद में गंगा के किनारे, नगीना में खो नदी पर गांव चमरोवाला, स्योहारा में खो नदी पर गांव मुकुपुरी के पास तटबंध कटाव को रोकने को काम युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में अभी बाढ़ की स्थिति की आशंका कहीं पर भी नहीं है।

नचना नदी में आए उफान से फसलें बर्बाद
धामपुर। गांव भज्जावाला, सलावतनगर के पूर्व प्रधान कुंवर रोहिताश      सैनी, दिनेश कुमार, रामकिशन, अनचल, प्रधान याकूब अहमद, भूरे, राकेश कुमार, रामेश, ताराचंद, कुंवरपाल,  जसवंत सिंह, लाखन सिंह, टेकचंद    सिंह, रमेश, ऋषिपाल सिंह, विजयपाल सिंह, रामचरन सिंह, असलम, निजामुददीन, आजम, इदरीश का कहना है कि दो दिन से हो रही भारी      बारिश के चलते गांव भज्जावाला से सलावतनगर को जाने वाले मुख्य मार्ग    पर नचना नदी पर बनी पुलिया पानी के तेज प्रवाह के कारण ध्वस्त हो गई    है। इस पुलिया के टूटने से कई गांवों केेे संपर्क कट गया है। इस मुख्य मार्ग    से कई गांवों के ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो गया है। पुलिया के टूटने से क्षेत्रवासियों में प्रशासन के प्रति असंतोष पैदा हो गया है। लोगों का कहना है   कि वह कई बार एसडीएम और तहसीलदार से इन गांवों के बीच के बदहाल मार्ग की मरम्मत कराने की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन किसी ने आज तक नहीं सुनी। बदहाल मार्ग की मरम्मत तो अभी तक प्रशासन करा नहीं पाया था, अब नचना में आए उफान से उनके गांव के मार्ग पर बनी पुलिया को ध्वस्त    हो गई है। एसडीएम आलोक कुमार यादव का कहना है कि ऐसा कोई     मामला ग्रामीणों की ओर से अभी तक संज्ञान में नहीं लाया है। वे जांच कर समस्या का जल्द निदान कराने का प्रयास करेंगे।

कोटवाली नदी के रपटे पर आवागमन ठप
नजीबाबाद में पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में हुई वर्षा से कोटावाली, मालन और सूखा नदी में रूक-रूक कर उफान आ रहा है। भागूवाला क्षेत्र में कोटावाली नदी का 24 घंटे के भीतर दो बार जल स्तर बढ़ने से भारी वाहनों का आवागमन घंटों बंद रहा। शनिवार की रात्रि करीब 11 बजे कोटावाली रपटे पर लगभग दो फीट पानी आ गया। इससे उत्तराखंड और नजीबाबाद दिशा में तैनात दोनों राज्यों की पुलिस ने भारी वाहनों का आवागमन रोक दिया। जल स्तर घटने के बाद वाहनों का आवागमन रविवार की प्रात: पुन: शुरू हुआ लेकिन चार-पांच घंटे बाद फिर से कोटावाली नदी का जल स्तर बढ़ने से प्रात: 11 बजे चार घंटे के लिए रपटे से भारी वाहनों का आवागमन पुलिस को रोकना पड़ा। उधर, मंडावली क्षेत्र में भागूवाला-मोटा महादेव बाइपास मार्ग पर टांडारतन क्षेत्र में स्थित रपटे पर सूखा नदी का जल स्तर बढ़ने से लगभग दो घंटे रपटा क्षेत्र से आवागमन ठप रहा। कांवड़ियों सहित क्षेत्र के गांव टांडारतन, गांवड़ी, जटपुरा बौंडा क्षेत्र के ग्रामीणों ने बाइपास मार्ग से आवागमन किया। नजीबाबाद के मोहल्ला मकबरा, मुगलूशाह सहित कई क्षेत्रों में संपर्क मार्गों पर एक से डेढ़ फीट पानी भर गया। मालन नदी में भी उफान आने से खैरूल्लापुर क्षेत्र में भूमि का कटान हुआ तथा सब्जी की फसल प्रभावित हुई। अजमल खां रोड सहित नगर के कई क्षेत्रों में मकानों में पानी भर गया।

बारिश से नचना नदी में उफान, बाढ़ जैसे हालात  
अफजलगढ़ । पहाड़ी और मैदानी क्षेत्र में हो रही बारिश के चलते नचना नदी उफान पर आने से नगर में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। नगर के मुख्य बाजार में जलभराव की स्थिति बन गई है। क्षेत्र में शुक्रवार रात से लगातार     हो रही तेज बारिश के चलते नचना नदी उफान पर है। सब्जी मंडी, बस स्टैंड रोड व जामा मस्जिद तथा मुस्लिम फंड के समीप बाजार में सड़कों पर पानी जमा है। अभी एक सप्ताह पहले भी पहाड़ों पर भारी वर्षा होने व पीली डैम से 6 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नगर क्षेत्र जलमग्न हो गया था। बाढ़ की आशंका के चलते व्यापारियों ने सामान को सुरक्षित स्थानों पर रखने का काम शुरू कर दिया है। वहीं नचना नदी में पानी उफान पर है। व्यापारी इस्माइल, अनीस, वकील, सकील, खुर्शीद ,जाहिद, अजय सुशील आदि लोगों ने डीएम   से नचना नदी के पानी का रुख अमला नदी में कराने की मांग की है। पीली   डैम पर तैनात सिंचाई विभाग के जेई लोकेंद्र कुमार का कहना है कि पहाड़ों  पर लगातार हो रही बारिश के चलते भारी मात्रा में पानी की आमद होने के कारण पीलीडैम से लगभग दो हजार क्यूसेक पानी को छोड़ा जा रहा है।      ऐसे में यदि पहाड़ों पर और ज्यादा बारिश हो गई और डैम में पानी की     आवक ज्यादा  होने लगी तो डैम को सुरक्षित रखने को नदी में और भी  ज्यादा पानी छोड़ा जा सकता है।

खो नदी का बढ़ा जलस्तर
बढ़ापुर। शनिवार शाम से रुक रुककर हो रही तेज बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। कस्बे के समीप की नदियों का जल स्तर बढ़ने पर बढ़ापुर    कस्बे का क्षेत्र के दर्जनों गांवों से पूरे दिन संपर्क कटा रहा। खो नदी का जलस्तर बढ़ने पर नदी का पानी नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर बहने से कई घंटा मार्ग बाधित हुआ। भारी बारिश से नकटा, ऊनी और पहाड़ा नदी पूरे दिन उफान पर रही। खेतों में खड़ी गन्ना और   धान आदि की फसलें पानी से लबालब हो गई। खो नदी का जलस्तर बढ़ने पर पानी नदी से निकलकर पास के खेतों में होता हुआ इस्लामाबाद चौराहा और उसके समीप बढ़ापुर-नगीना    मार्ग पर बहने लगा। वहीं, गांव रामजीवाला    निवासी मुबारक अली की दो भैंस चरने के दौरान पहाड़ा नदी के तेज बहाव में बह गई। दोनों भैंस बहते-बहते रामजीवाला से लगभग सात किमी दूर कस्बे से सटकर बह रही गूलाह नदी में आ गई। नदी की पुलिया पर खड़े होकर पानी का नजारा देख रहे पक्कातालाब निवासी इरशाद, शहजाद, नसीम और अफसर ने भैंसों के पुलिया के समीप आने पर गूलाह नदी में छलांग लगा दी और दोनो भैंसों को नदी सेे बाहर निकाल लिया। कुछ समय बाद अपनी भैंसों को तलाशता गांव रामजीवाला निवासी मुबारक   अली वहां पहुंचा तो युवकों ने   नदी के पानी से निकाली गई दोनो भैंस उसको सौंप दिया।

बारिश से नदी-नाले उफने
कालागढ़। शनिवार रात से शुरू हुई बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। रविवार दोपहर तक रुक रुक कर हुई बारिश के कारण बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। स्थानीय नदी नाले उफान पर हैं। पुराने कालागढ़ में सूखास्रोत नदी में आए पानी को देखने के लिए काफी जनता पहुंची। वहीं पानी से पुल की    ढांग का कटान जारी है। हालांकि लोकनिर्माण विभाग ने पुल के नीचे रेत   के कट्टे लगा दिए थे। रामगंगा बांध के नियंत्रण कक्ष के अनुसार दोपहर तक कालागढ़ मे लगभग 70 मिमी बारिश  दर्ज की गई। वहीं रामगंगा बांध का जलस्तर भी 335 मीटर हो गया है।

फसलों के जलमग्न होने से किसानों में बेचैनी
हरेवली। राम गंगा बैराज के पौंड क्षेत्र से सटे किसानों की भूमि में खड़ी गन्ने और धान की फसलों के जलमग्न होने से सिंचाई विभाग के अधिकारियों के प्रति किसानों में असंतोष है। आरोप है कि विभाग की ओर से हरसाल 15 जून को रामगंगा के सभी 20 गेटों को उठा दिया जाता था। पर इस बार अभी तक केवल तीन ही गेटों को उठाया है। जिससे रामगंगा का पानी बैराज से आगे जाने के स्थान बैराज के पौंड क्षेत्र में एकत्र होने लगा है। जिसके कारण पौंड क्षेत्र के आसपास किसानों की लगानी जमीन में खड़ी फसलें जलमग्न होने से नष्ट हो रही है।  
क्षेत्र के किसान बब्बन खान, थम्मन सिंह, हुकुम सिंह, हरि सिंह, जग्गू सिंह, कृपाल सिंह, जसवंत सिंह, फरुखा, मो. विशाल खान, ध्यान सिंह, बलवंत सिंह का कहना है कि राम गंगा बैराज के पौंड क्षेत्र से सटी जमीन में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं। जिसे लेकर उनमें सिंचाई विभाग के अधिकारियों के प्रति असंतोष है। आरोप लगाया कि वर्षाकाल के दौरान विभाग की ओर से हर साल 15 जून को बैराज      के सभी 20 गेटों को उठा दिए जाने का नियम है। पर नियमों की अवहेलना कर केवल तीन ही गेटों को अब तक उठाया जा सका है,  जिससे पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश के कारण वर्षा का प्रवाहित होने वाला पानी बैराज से       रामगंगा में आगे को जाने की तुलना में बैराज के पौंड क्षेत्र में ज्यादा एकत्र हो रहा है। पौंड क्षेत्र से ही सटी किसानों की जमीनें हैं, जिनमें उनकी फसलें खड़ी हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से सभी गेटों को उठाने की मांग करने का भी उनके ऊपर कोई असर नहीं हो रहा है। किसानों ने अधिकारियों द्वारा बरती जा रही मनमानी के चलते फसलों के नुकसान की भरपाई विभाग से कराने की मांग की है। चेताया है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन होगा।

किसानों का कहना गलत : एक्सईएन
अधिशासी अभियंता दिनेश प्रताप सिंह का कहना है कि जून में गेटों को उठाना कोई रेगुलर नहीं है। यह गेट तो उठा दिए जाते थे। उस दौरान सिंचाई की मांग नहीं रहती थी। अगर सिंचाई की मांग रहती है तो हम गेटों को नहीं उठाएंगे। हमें तो पोषक नहर से सिंचाई करानी है। अभी कालागढ़ बांध में पानी डैम की क्षमता के 365 के सापेक्ष 336 मीटर है। हरेवली के बैराज पौंड को कालागढ़ डैम में 365 मीटर तक होने पर बाढ़ का खतरा बन सकता है। बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। एक्सईएन ने किसानों के लगे सभी आरोपों को गलत बताया। रविवार को रामगंगा में 5000  क्यूसेक पानी निकासी हो रहा है। यहां पर 10 गेट बिजली के प्रेशर वाले हैं। अगर अधिक पानी आएगा तो शीघ्र ही गेटों को प्रेशर से उठा दिया जाएगा। कम पानी होने की वजह से मात्र तीन ही गेट से पानी पास हो रहा है। 1970 में बने रामगंगा बैराज के 20 गेट तथा पोषक नहर के पांच गेटों का निर्माण करा गया था। उस दौरान से जून में सभी गेटों को उठाया जाता था और नवंबर में गेटों को डाउन कर दिया जाता था।

भारी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त
कासमपुरगढ़ी में बिजली की तेज गड़गड़ाहट के साथ क्षेत्र में शनिवार रात से हो रही तेज बारिश से जन जीवन अस्तव्यस्त रहा। विद्युत ट्रांसफार्मरों पर बिजली गिरने से गांव की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। गांव के सभी रास्तों में पानी की सही प्रकार से निकासी न होने से जलभराव की स्थिति बनी है। खेतों के जलमग्न होने से किसानों में प्रसन्नता है। किसानों का कहना है कि बारिश धान व गन्ने की फसल के लिए वरदान साबित हो रही है। वहीं, विद्युत निगम के जेई चेतराम सिंह ने बताया कि गत बिजली गिरने से उनके क्षेत्र के गांव भिक्कावाला, कासमपुरगढ़ी हरेवली, भक्तावाला में विद्युत ट्रांसफार्मर जमीन पर गिर गए। 33 हजार की लाइन में भी फाल्ट आ गया। जिससे रात से ही विद्युत आपूर्ति ठप है। जिसकी पेट्रोलिंग कर सही कराने का प्रयास किया जा रहा है।
 

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