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Bijnor News: चीनी मिलें नहीं चलने से किसान कोल्हू पर गन्ना बेचने को मजबूर
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पैजनिया। क्षेत्र में चीनी मिलों का संचालन शुरू नहीं होने से किसान मजबूरी में कोल्हुओं पर गन्ना बेचने को विवश हैं। किसानों का आरोप है कि कोल्हू संचालक मनमाने दामों पर गन्ने की खरीद कर रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
क्षेत्र में इन दिनों करीब एक दर्जन कोल्हू संचालित हो रहे हैं। मोनू सिंह, विजय सिंह, प्रेम सिंह, गुलशेर, सुलेमान, इकराम, बरसाम सिंह आदि कोल्हू संचालकों का कहना है कि गन्ने का दाम मंडी के भाव पर निर्भर करता है। वर्तमान में गन्ने का भाव उसकी क्वालिटी के अनुरूप 370 से 390 प्रति क्विंटल के मध्य चल रहा है जबकि शुरुआत में ये 440 रुपये तक था। गुड़ का मंडी भाव पूर्व में छह हजार से ऊपर चल रहा था जो अब 5500 के आसपास आ गया है।
किसानों शमशाद, हरिओम सैनी, सुनील त्यागी, बलराम सिंह, कमलवीर सिंह, रमन आदि ने बताया कि चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू नहीं होने के कारण किसानों के सामने गन्ना बेचने की समस्या खड़ी हो गई है। सरसों की बुवाई के लिए किसानों को खेत खाली करने हैं, इसलिए वे कम दामों पर गन्ना कोल्हू संचालकों को बेचने के लिए विवश हैं।
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किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर अधिक खर्च काफी बढ़ चुका है। ऐसे में कोल्हुओं पर कम दाम में गन्ना बेचने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। किसानों ने संबंधित अधिकारियों और चीनी मिल प्रबंधन से जल्द से जल्द मिल का संचालन शुरू कराने की मांग की है, ताकि उन्हें गन्ना बेचने के लिए उचित विकल्प मिल सके और आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
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क्षेत्र में इन दिनों करीब एक दर्जन कोल्हू संचालित हो रहे हैं। मोनू सिंह, विजय सिंह, प्रेम सिंह, गुलशेर, सुलेमान, इकराम, बरसाम सिंह आदि कोल्हू संचालकों का कहना है कि गन्ने का दाम मंडी के भाव पर निर्भर करता है। वर्तमान में गन्ने का भाव उसकी क्वालिटी के अनुरूप 370 से 390 प्रति क्विंटल के मध्य चल रहा है जबकि शुरुआत में ये 440 रुपये तक था। गुड़ का मंडी भाव पूर्व में छह हजार से ऊपर चल रहा था जो अब 5500 के आसपास आ गया है।
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किसानों शमशाद, हरिओम सैनी, सुनील त्यागी, बलराम सिंह, कमलवीर सिंह, रमन आदि ने बताया कि चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू नहीं होने के कारण किसानों के सामने गन्ना बेचने की समस्या खड़ी हो गई है। सरसों की बुवाई के लिए किसानों को खेत खाली करने हैं, इसलिए वे कम दामों पर गन्ना कोल्हू संचालकों को बेचने के लिए विवश हैं।
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किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर अधिक खर्च काफी बढ़ चुका है। ऐसे में कोल्हुओं पर कम दाम में गन्ना बेचने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। किसानों ने संबंधित अधिकारियों और चीनी मिल प्रबंधन से जल्द से जल्द मिल का संचालन शुरू कराने की मांग की है, ताकि उन्हें गन्ना बेचने के लिए उचित विकल्प मिल सके और आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।