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चिकित्सकों की हड़ताल, मरीज रहे बेहाल
ब्यूरो, अमर उजाला/बिजनौर
Updated Tue, 02 Jan 2018 11:50 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिजनौर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सेंट्रल के आह्वान पर संसद में पेश होने वाले नेशनल मेडिकल कौंसिल बिल के विरोध में बिजनौर के निजी चिकित्सकों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर हड़ताल पर रहे। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के चिकित्सक मंगलवार को अपने अस्पताल बंद कर हड़ताल पर रहे। सभी चिकित्सक पूरे दिन बिजनौर क्लब में एकत्र रहे।
आईएमए बिजनौर के सेक्रेट्री डॉ. उपेंद्र सिंह राणा ने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल आने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। यह बिल प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की जुबान बोलेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। इससे चिकित्सा सेवा महंगी हो जाएगी।
मेडिकल कॉलेजों में गरीब बच्चों को प्रवेश लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। ज्यादा मेडिकल कॉलेज खुलने से चिकित्सा का स्तर खराब हो जाएगा। बिल से राज्य मेडिकल कौंसिल का नियंत्रण भी समाप्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बिल आने से विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके आया छात्रा बिना पंजीयन व परीक्षा के प्रैक्टिस करेगा, जबकि देश में एमबीबीएस करने वाले छात्रों को परीक्षा के साथ-साथ पंजीयन भी कराना होगा।
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उन्होंने बताया कि मंगलवार को नेशनल मेडिकल कौंसिल बिल संसद में पेश नही हुआ, बल्कि बिल को स्थायी समिति के समक्ष पेश किया गया। आईएमए सेंट्रल के निर्देश पर दोपहर तीन बजे हड़ताल को स्थगित कर दिया गया। हड़ताल में अध्यक्ष डॉ. दिनेश डिमरी, डा.नवनीत गर्ग, डा.अनिल अग्रवाल, डा.नगराज, डा.राजीव चौधरी, डा.निकुंज सिंह, डा.बीरबल, डा.राजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
इमरजेंसी सेवा रही बहाल
निजी अस्पताल बंद होने के कराण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी अस्पताल भी सहारा लेना पड़ा। हालांकि हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं बहाल रखी गई।
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आईएमए बिजनौर के सेक्रेट्री डॉ. उपेंद्र सिंह राणा ने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल आने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। यह बिल प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की जुबान बोलेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। इससे चिकित्सा सेवा महंगी हो जाएगी।
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मेडिकल कॉलेजों में गरीब बच्चों को प्रवेश लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। ज्यादा मेडिकल कॉलेज खुलने से चिकित्सा का स्तर खराब हो जाएगा। बिल से राज्य मेडिकल कौंसिल का नियंत्रण भी समाप्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बिल आने से विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके आया छात्रा बिना पंजीयन व परीक्षा के प्रैक्टिस करेगा, जबकि देश में एमबीबीएस करने वाले छात्रों को परीक्षा के साथ-साथ पंजीयन भी कराना होगा।
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उन्होंने बताया कि मंगलवार को नेशनल मेडिकल कौंसिल बिल संसद में पेश नही हुआ, बल्कि बिल को स्थायी समिति के समक्ष पेश किया गया। आईएमए सेंट्रल के निर्देश पर दोपहर तीन बजे हड़ताल को स्थगित कर दिया गया। हड़ताल में अध्यक्ष डॉ. दिनेश डिमरी, डा.नवनीत गर्ग, डा.अनिल अग्रवाल, डा.नगराज, डा.राजीव चौधरी, डा.निकुंज सिंह, डा.बीरबल, डा.राजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
इमरजेंसी सेवा रही बहाल
निजी अस्पताल बंद होने के कराण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी अस्पताल भी सहारा लेना पड़ा। हालांकि हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं बहाल रखी गई।