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बोझ समझकर नहीं, शौक समझकर करें पढ़ाई
Tue, 07 May 2019 01:03 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Tue, 07 May 2019 01:03 AM IST
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आल इंडिया के द्वितीय टॉपर तरूष रजावत को मिठाई खिलाते माता पिता।
- फोटो : अमर उजाला
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धामपुर में प्रियंका मॉडर्न स्कूल के छात्र तरूष रजावत ने सीबीएसई में कक्षा दस में संयुक्त रूप से देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया व जिला टॉप किया है। परिणाम आने के बाद उसके घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। धामपुर के नगीना चौराहे के पास रहने वाले तरूष की बहन यशिका रजावत ने 2017 में सीबीएसई में कक्षा 12 में जिला टॉप किया था। बहन की प्रेरणा से पढ़ाई करने वाले तरूष ने देश में जिले व स्कूल का नाम देशभर में रोशन किया है। तरूष का अगला लक्ष्य अब आईआईटी में प्रवेश है। तरूष रजावत ने 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। पांच में से तीन विषयों में शत प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। तरूष के पिता राजीव रजावत व्यवसायी हैं और उनकी मिष्ठान की दुकान है। मां सुषमा गृहणी हैं। दोनों भाई बहन पढ़ाई में बहुत मेहनती है। उसने जिले में सर्वाधिक अंक लाने में पूरे समर्पण से पढ़ाई की।
सोशल मीडिया से रहा दूर
तरूष अब तक सोशल मीडिया से दूर है। वह केवल शिक्षकों व दोस्तों से बात करने के लिए ही मोबाइल का इस्तेमाल करता है। तरूष का कहना है कि परिजन को बच्चों को सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से रोकना चाहिए।
फुटबॉल का है शौकीन
तरूष स्कूल से अलग तीन से चार घंटे ही पढ़ता था। स्कूल की छुट्टी के दिन वह सात से आठ घंटे पढ़ता था। लगातार एक सा शेड्यूल अपनाने के कारण परीक्षा के दौरान उसने पढ़ाई का बोझ महसूस नहीं किया। तरूष फुटबाल का शौकीन है।
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लक्ष्य : आईआईटी इंजीनियर बनना।
सफलता का मंत्र : पढ़ाई को बोझ समझकर नहीं, शौक समझकर करें।
नाम- तरूष रजावत
प्राप्त अंक-498(500 में से)
प्रतिशत-99.6
लक्ष्य-आईआईटी इंजीनियर बनना।
सफलता का मंत्र-पढ़ाई को बोझ न समझें
प्राप्त अंकों का ब्योरा
विषय अंक
इंग्लिश 99
हिंदी 100
गणित 100
विज्ञान 99
सामाजिक विज्ञान 100
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सोशल मीडिया से रहा दूर
तरूष अब तक सोशल मीडिया से दूर है। वह केवल शिक्षकों व दोस्तों से बात करने के लिए ही मोबाइल का इस्तेमाल करता है। तरूष का कहना है कि परिजन को बच्चों को सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से रोकना चाहिए।
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फुटबॉल का है शौकीन
तरूष स्कूल से अलग तीन से चार घंटे ही पढ़ता था। स्कूल की छुट्टी के दिन वह सात से आठ घंटे पढ़ता था। लगातार एक सा शेड्यूल अपनाने के कारण परीक्षा के दौरान उसने पढ़ाई का बोझ महसूस नहीं किया। तरूष फुटबाल का शौकीन है।
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लक्ष्य : आईआईटी इंजीनियर बनना।
सफलता का मंत्र : पढ़ाई को बोझ समझकर नहीं, शौक समझकर करें।
नाम- तरूष रजावत
प्राप्त अंक-498(500 में से)
प्रतिशत-99.6
लक्ष्य-आईआईटी इंजीनियर बनना।
सफलता का मंत्र-पढ़ाई को बोझ न समझें
प्राप्त अंकों का ब्योरा
विषय अंक
इंग्लिश 99
हिंदी 100
गणित 100
विज्ञान 99
सामाजिक विज्ञान 100