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Bijnor News: बदलते मौसम में खरीफ फसलों पर मंडरा रही बीमारियां

Wed, 20 Aug 2025 11:08 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Wed, 20 Aug 2025 11:08 PM IST
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Diseases are affecting Kharif crops due to changing weather
-अधिकारियों ने जारी की रोग, कीट से बचाव की गाइड लाइन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। वर्तमान समय में तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है। खरीफ की फसलों में सामयिक कीट, अन्य रोग लगने की संभावना ज्यादा है। धान में दीमक एवं जड़ की सूडी, तना बेधक एवं पत्ती लपेटक आदि बीमारी लगती हैं। गन्ना फसल में पोका बोइंग, शीर्ष भेदक कीट (टाॅप बोरर) दिखाई देने लगा है।
फसलों को रोगों से नियंत्रण एवं बचाव के लिए वैज्ञानिक, अधिकारियों ने किसान को सुझाव दिए। फसलों में प्रयोग करके फसलों में होने वाली क्षति को रोक सकें।
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-बीमारी का फोटो भेजे पाएं समाधान
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि फसल में कीट, रोग समस्या के निदान के लिए कृषि विभाग में अपना पंजीकरण नंबर अथवा अपना नाम, ग्राम का नाम, विकास खंड, जिला लिखते हुए मोबाइल संख्या 9452247111 एवं 9452257111 पर एसएमएस, ब्हाट्सऐप के माध्यम से फोटो भेजे। किसान अपनी समस्या का समाधान 48 घंटे के अंदर पा सकते हैं।
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धान की बीमारी रोकने के लिए ऐसा करें
-दीमक एवं जड़ की सूंडी के नियंत्रण के लिए क्लोरपायरीफाॅस 20 प्रतिशत, ईसी की 2.50 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें।
-तना बेधक एवं पत्ती लपेटक के रासायनिक नियंत्रण के लिए क्यूनालफाॅस 25 प्रतिशत, ईसी अथवा क्लोरपायरीफाॅस 20 प्रतिशत, ईसी 1.50 लीटर अथवा फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी 1 से 1.50 लीटर, 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से बिखेरकर प्रयोग करें।

-गन्ना फसल की बीमार पर ऐसे पाए नियंत्रण
जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि पोका बोइंग अधिक तापमान व अधिक आर्द्रता के कारण गन्ने में दिखाई दे रहा हैं।
-इसकी रोकथाम के लिए कार्बेण्डाजिम 12 प्रतिशत, मैंकोजेब 63 प्रतिशत, डब्ल्यूपी की 400 से 500 ग्राम मात्रा का प्रति एकड़ या थायोफिनेट मिथाईल 70 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 400 ग्राम मात्रा 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।
-शीर्ष भेदक कीट (टाॅप बोरर) की रोकथाम के लिए कार्बोसल्फान 25 प्रतिशत ई0सी0 की 400 से 500 एम0एल0 मात्रा का 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।

-लाल सडन रोग की रोकथाम के लिए कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत, डब्ल्यूपी 300 से 400 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ या एजोक्सीस्ट्रोबिन 11 प्रतिशत, टेबुकोनाजोल 18.3 प्रतिशत, एसएसी की 0.1 प्रतिशत मात्रा का प्रयोग करें।
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