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परिस्थिति के अनुरूप चल आगे बढ़ रहे उद्योग

Fri, 26 Jun 2020 11:49 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2020 11:49 PM IST
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Discover new opportunities and markets, industries moving forward
नगीना में काष्ठ कला उद्योग में काम करते श्रमिक। - फोटो : BIJNOR
तलाशे नए अवसर और बाजार, आगे बढ़ रहे उद्योग
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बिजनौर। आज अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) दिवस है। वैसे तो बिजनौर जिले में रोजगार के नाम पर कभी चीनी मिल, गुड़ बनाने वाले कोल्हू व क्रेशर ही चलते थे, मगर काष्ठ कला का उदय होने के बाद अन्य क्षेत्रों में भी उद्यमी आगे बढ़ रहे हैं। बदली परिस्थितियों में खुद को ढाला है, नए अवसर और बाजार तलाश रहे हैं, जिसके बूते जिले में औद्योगिक इकाइयां लगातार बढ़ती जा रही हैं। बावजूद उद्योग जगत की कुछ मांग अधूरी हैं, वह पूरी हो जाएं तो तरक्की में तेजी आएगी।
नगीना के कारीगरों ने पूरी दुनिया में अपने हुनर की छाप छोड़ी। काष्ठ कला में कारीगरी के चीनी नागरिक भी प्रशंसक बन गए। जिले में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की कोशिश भी रंग लाईं और हर साल संख्या बढ़ती गई। अब करीब 6870 उद्योग संचालित हो रहे हैं, जिनका टर्नओवर 3500 करोड़ से भी ज्यादा है। नए उद्योगों की स्थापना के लिए भी लगातार आवेदन हो रहे हैं।
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- चीन के फर्नीचर का देंगे विकल्प
जिले में चीन से बना फर्नीचर आता है। नगीना के काष्ठ कला उद्यमी अब अपने यहां फर्नीचर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी कवायद भी शुरू कर दी है। जिले में ही नगीना से 20 करोड़ से ज्यादा का फर्नीचर आता है।
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- सैनिटाइजर के रूप में मिला नया कारोबार
जिले की चीनी मिल और डिस्टलरी ने सैनिटाइजर भी बनाया है। यहां बना सैनिटाइजर पूरे देश में सप्लाई हुआ। इससे जिले के उद्योगों को नया बाजार मिला है।
- मेडिकल उपकरण भी बनाने की तैयारी
उद्यमी अब मेडिकल उपकरण भी खुद ही बनाना चाहते हैं। पहले मेडिकल का अधिकांश सामान चीन से आता था। अब न केवल जिला आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि दूसरे जिलों में भी अपने लिए बाजार तैयार करेगा।
- यह मांग है अधूरी
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जिले के उद्यमी एक सुविधा केंद्र बनाने की मांग सालों से करते आ रहे हैं। उनकी मांग है कि सुविधा केंद्र में मशीन आदि स्थापित हों, जिनका उद्यमी जरूरत के हिसाब से फायदा उठा सकें। लेकिन मांग पूरी नहीं हुई।
- उद्योगों में अपार संभावनाएं : खन्ना
लघु उद्योग भारती के जिला महासचिव मनी खन्ना का कहना है कि उद्योगों में अपार संभावनाएं हैं। खासतौर से युवा वर्ग इस बात को समझ रहा है। जिला भले ही खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां पर उद्योगों ने अपना अलग मुकाम बना लिया है।
- प्रवासी श्रमिकों को दिलाया काम
उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा रस्तोगी का कहना है कि जिले के उद्यमी नई परिस्थिति के अनुसार काम कर रहे हैं। वे नए बाजार की तलाश में हैं और उस दिशा में काम कर रहे हैं। प्रवासी श्रमिकों को भी उद्योगों में काम दिलाया गया है।

------- जिले के उद्योग एक नजर में
उद्योग - इकाई - रोजगार - टर्नओवर
सूक्ष्म 3558 16878 500 करोड़
लघु 280 5297 130 करोड़
मध्यम 13 620 70 करोड़
बड़े उद्योग 20 22000 3500 करोड़
(नोट: आंकड़े उपायुक्त उद्योग कार्यालय से लिए गए हैं। बड़ी संख्या में उद्योग पंजीकृत नहीं हैं)

नगीना में काष्ठ कला उद्योग में काम करते श्रमिक।

नगीना में काष्ठ कला उद्योग में काम करते श्रमिक।- फोटो : BIJNOR

उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा रस्तोगी।

उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा रस्तोगी।- फोटो : BIJNOR

लघु उद्योग भारती के जिला महासचिव मनी खन्ना।

लघु उद्योग भारती के जिला महासचिव मनी खन्ना।- फोटो : BIJNOR

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