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मौनी अमावस्या पर लगाई आस्था की डुबकी
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मौनी अमावस्या पर लगाई आस्था की डुबकी
बिजनौर। मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पावन गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कुछ श्रद्धालुओं ने गंगा बैराज, दारानगर गंज और कुछ ने अपने घरों पर ही स्नान किया। स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने आटा, चावल, उड़द, गुड़, वस्त्र और दक्षिणा आदि देकर अपने पूर्वजों का नमन किया।
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार माघ महीने की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत रखने और मुख से कटु शब्द न निकलने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। पवित्र नदी में डुबकी लगाने से जीवन सफल हो जाता है। बृहस्पतिवार को मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं गंगा बैराज पर तो कुछ ने घरों में ही गंगा स्नान किया। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात पंडितों को आटा, चावल, उड़द, गुड़, वस्त्र और दक्षिणा आदि दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। गंगा बैराज पर स्नानार्थियों के लिए समुचित व्यवस्था की गई थी। महिलाओं के लिए स्नान के बाद चेंजिंग रूम की भी प्रबंध किया गया। पंडित धर्मेश भारद्वाज ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन सुबह से ही मौन व्रत रखा जाता है। इस दिन ध्यान चिंतन करना चाहिए। डबराल ज्योतिष सदन के प्रभारी पंडित प्रभुदत्त डबराल के अनुसार मौनी अमावस्या का अपना खास महत्व है। मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी तट पर देवी-देवताओं का वास रहता है। नदी में स्नान करना ज्यादा फलदायी होता है। ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनने के कारण इसका महत्व कई गुणा बढ़ गया है।
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बिजनौर। मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पावन गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कुछ श्रद्धालुओं ने गंगा बैराज, दारानगर गंज और कुछ ने अपने घरों पर ही स्नान किया। स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने आटा, चावल, उड़द, गुड़, वस्त्र और दक्षिणा आदि देकर अपने पूर्वजों का नमन किया।
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार माघ महीने की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत रखने और मुख से कटु शब्द न निकलने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। पवित्र नदी में डुबकी लगाने से जीवन सफल हो जाता है। बृहस्पतिवार को मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं गंगा बैराज पर तो कुछ ने घरों में ही गंगा स्नान किया। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात पंडितों को आटा, चावल, उड़द, गुड़, वस्त्र और दक्षिणा आदि दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। गंगा बैराज पर स्नानार्थियों के लिए समुचित व्यवस्था की गई थी। महिलाओं के लिए स्नान के बाद चेंजिंग रूम की भी प्रबंध किया गया। पंडित धर्मेश भारद्वाज ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन सुबह से ही मौन व्रत रखा जाता है। इस दिन ध्यान चिंतन करना चाहिए। डबराल ज्योतिष सदन के प्रभारी पंडित प्रभुदत्त डबराल के अनुसार मौनी अमावस्या का अपना खास महत्व है। मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी तट पर देवी-देवताओं का वास रहता है। नदी में स्नान करना ज्यादा फलदायी होता है। ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनने के कारण इसका महत्व कई गुणा बढ़ गया है।
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