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किसी होटल से कम नहीं बिजनौर की धर्मशालाएं

Wed, 07 Apr 2021 11:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 07 Apr 2021 11:55 PM IST
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Dharamshalas of Bijnor are no less than a hotel
बिजनौर की जैन धर्मशाला। - फोटो : BIJNOR
किसी होटल से कम नहीं बिजनौर की धर्मशालाएं
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बिजनौर। दशकों पहले मुसाफिरों के ठहरने के लिए बनाई गई कई धर्मशालाएं समय के साथ-साथ बदल र्गई। कुछ खंडहर बन गई तो कुछ धर्मशालाएं हाईटेक होटल की तरह नजर आती हैं। इनमें एसी कमरों से लेकर शादी समारोह जैसे आयोजन करने तक की व्यवस्था है। बिजनौर की जैन धर्मशाला इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां पर रुकने के लिए एसी कमरे भी हैं।
जिले में रेल यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों के पास तो धर्मशालाएं बनी ही थी, शहरों के अंदर भी मुनासिब दामों पर यात्रियों को आश्रय देने के लिए कई धर्मशालाओं का निर्माण हुआ था। अब वर्तमान की बात करें तो ऐसी कई धर्मशालाएं या तो खत्म हो गई या फिर सराय में तब्दील हो गई। बिजनौर में रम्मू के चौराहे पर स्थित 100 साल पुरानी अग्रवाल धर्मशाला का भवन खंडहर होने पर गिरवा दिया गया। अब केवल धर्मशाला का मंदिर ही बचा है। हालांकि नए सिरे से धर्मशाला बनवाने की बात कही जरूर की जा रही है। मोहल्ला कुंवर बाल गोविंद में खत्रियों की धर्मशाला को बिरादरी के लोगों ने ही गिरवाकर पार्किंग में बदल दिया। अब यहां किराए पर वाहन खड़े होते हैं।
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जैन धर्मशाला में 900 रुपये में एसी कमरा
बिजनौर में पुराने नीलकमल सिनेमा के पास वर्ष 1915 में जैन धर्मशाला बनी थी। 1933 में धर्मशाला का ट्रस्ट बना। यह धर्मशाला भी बदहाली की ओर जा रही थी, पर बिरादरी के कुछ लोगों ने इसे संवारने का बीड़ा उठाया। अब ये धर्मशाला शहर के हाईटेक होटल से कम नहीं है। वहीं किराये की बात करें तो सुविधाओं के लिहाज से काफी कम है। इसमें 16 कमरे नीचे व आठ कमरे ऊपर हैं। ऊपर के सभी कमरे एसी है। एसी कमरे का किराया 900 रुपये प्रतिदिन और नीचे के कमरे का किराया 400 रुपये प्रतिदिन है। समय के साथ बदलाव होने से इस धर्मशाला का अस्तित्व बच गया। अब इसमें शादी जैसे बड़े आयोजन भी होते रहते हैं। जैन धर्मशाला के मुख्य ट्रस्टी प्रदीप जैन के मुताबिक पिछले दो साल से धर्मशाला को सजाने संवारने का काम चल रहा है। धर्मशाला में अभी और कमरे बनाने की योजना है। जो पैसा आता है वह सब धर्मशाला को संवारने में लगाया जा रहा है।
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