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जिला अस्पताल नहीं भेजे जा रहे डेंगू और मलेरिया के सैंपल
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जिला अस्पताल नहीं भेजे जा रहे डेंगू और मलेरिया के सैंपल
बिजनौर। निजी लैब की जांच रिपोर्ट मरीजों में डेंगू होने की पुष्टि कर रही है, लेकिन डेंगू की न तो रिपोर्ट और न ही सैंपल स्वास्थ्य विभाग भेजा जा रहा है। जिस कारण स्वास्थ्य विभाग जिले में डेंगू होने से इंकार किया है। जबकि निजी अस्पताल डेंगू मानकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
इस समय काफी संख्या में वायरल के मरीज निजी और सरकारी अस्पतालों में जा रहे हैं। चिकित्सक लक्षणों के आधार पर इन मरीजों का डेंगू टेस्ट कराते हैं। कई मरीज निजी लैब पर हुए टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव आ रहे हैं और इनकी प्लेटलेट्स भी कम आती हैं। नियमानुसार जो भी मरीज निजी लैब में डेंगू या मलेरिया का टेस्ट कराने जाएगा उसके लैब द्वारा दो सैंपल लिए जाएंगे। एक सैंपल को जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा जाएगा और दूसरे की जांच लैब खुद करेगी। डेंगू का सबसे पुख्ता माना जाने वाला एलाइजा टेस्ट जिला अस्पताल में ही होता है।
जिला अस्पताल में निजी लैब द्वारा सैंपल ही नहीं भेजा जाता। निजी लैब में जिन लोगों को डेंगू की पुष्टि होती है। जिला अस्पताल में उनका कोई नाम तक नहीं होता। निजी चिकित्सकों की नजर में भले ही डेंगू के मरीज मिल रहे हों, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के हिसाब से जिले में डेंगू या मलेरिया के मरीजों नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने निजी लैब संचालकों को सैंपल भेजने के लिए पत्र तो लिखा है, लेकिन इस पर कोई सख्ती नहीं बरती है।
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दिन में दो बार होता है ब्लड टेस्ट
कई निजी चिकित्सक डेंगू के नाम पर खुलकर खेल रहे हैं। केवल मरीजों की प्लेटलेट्स कम होने पर भी उन्हें डेंगू बता दिया जाता है। ऐसा वायरल में भी हो जाता है। ऐसे में मरीज का दिन में दो-दो बार ब्लड टेस्ट कराया जाता है। प्लेटलेट्स बढ़ने पर ही डिस्चार्ज किया जाता है।
स्वार्थ में बता रहे डेंगू
सीएमओ डा.विजय कुमार गोयल के अनुसार डेंगू का कोई मामला अब तक सामने नहीं आया है। कुछ निजी लैब स्वार्थ में मरीजों को डेंगूू बता रही हैं। जिला अस्पताल में डेंगू का सैंपल न भेजने वाली लैब के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बिजनौर। निजी लैब की जांच रिपोर्ट मरीजों में डेंगू होने की पुष्टि कर रही है, लेकिन डेंगू की न तो रिपोर्ट और न ही सैंपल स्वास्थ्य विभाग भेजा जा रहा है। जिस कारण स्वास्थ्य विभाग जिले में डेंगू होने से इंकार किया है। जबकि निजी अस्पताल डेंगू मानकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
इस समय काफी संख्या में वायरल के मरीज निजी और सरकारी अस्पतालों में जा रहे हैं। चिकित्सक लक्षणों के आधार पर इन मरीजों का डेंगू टेस्ट कराते हैं। कई मरीज निजी लैब पर हुए टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव आ रहे हैं और इनकी प्लेटलेट्स भी कम आती हैं। नियमानुसार जो भी मरीज निजी लैब में डेंगू या मलेरिया का टेस्ट कराने जाएगा उसके लैब द्वारा दो सैंपल लिए जाएंगे। एक सैंपल को जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा जाएगा और दूसरे की जांच लैब खुद करेगी। डेंगू का सबसे पुख्ता माना जाने वाला एलाइजा टेस्ट जिला अस्पताल में ही होता है।
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जिला अस्पताल में निजी लैब द्वारा सैंपल ही नहीं भेजा जाता। निजी लैब में जिन लोगों को डेंगू की पुष्टि होती है। जिला अस्पताल में उनका कोई नाम तक नहीं होता। निजी चिकित्सकों की नजर में भले ही डेंगू के मरीज मिल रहे हों, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के हिसाब से जिले में डेंगू या मलेरिया के मरीजों नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने निजी लैब संचालकों को सैंपल भेजने के लिए पत्र तो लिखा है, लेकिन इस पर कोई सख्ती नहीं बरती है।
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दिन में दो बार होता है ब्लड टेस्ट
कई निजी चिकित्सक डेंगू के नाम पर खुलकर खेल रहे हैं। केवल मरीजों की प्लेटलेट्स कम होने पर भी उन्हें डेंगू बता दिया जाता है। ऐसा वायरल में भी हो जाता है। ऐसे में मरीज का दिन में दो-दो बार ब्लड टेस्ट कराया जाता है। प्लेटलेट्स बढ़ने पर ही डिस्चार्ज किया जाता है।
स्वार्थ में बता रहे डेंगू
सीएमओ डा.विजय कुमार गोयल के अनुसार डेंगू का कोई मामला अब तक सामने नहीं आया है। कुछ निजी लैब स्वार्थ में मरीजों को डेंगूू बता रही हैं। जिला अस्पताल में डेंगू का सैंपल न भेजने वाली लैब के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।