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शहीद अशोक के परिजनों को हक दिलाने की मांग
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शहीद अशोक के परिजनों को हक दिलाने की मांग
बिजनौर। शहीद अशोक कुमार की शहादत के 21 वर्ष बीतने के बाद भी शासन-प्रशासन उनके परिवार की सुध लेने को तैयार नहीं है। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज ने शहीद के परिजनों को उनका हक दिलाने की मांग की है।
मंगलवार को भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज कार्यकर्ता प्रदेश सचिव संदीप कुमार के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में एकत्रित हुए। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। जिसमें बताया गया कि गोरखा रेजीमेंट की तीसरी बटालियन में नायक के पद पर तैनात गांव फीना निवासी अशोक कुमार अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। दस जुलाई 1999 को कारगिल में वे शहीद हो गए थे। उस दौरान शासन-प्रशासन ने उन्हें 50 बीघा कृषि योग्य भूमि देने, अशोक वाल्मीकि डिग्री कॉलेज खोलने, उनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने एवं परिवार को पेट्रोल पंप का लाइसेंस देने का वादा किया था। 21 वर्ष बीतने के बाद भी शासन-प्रशासन ने अपना वादा पूरा नहीं किया। वर्तमान में शहीद अशोक के परिवार की हालत ये है चार हजार रुपये महीने की मिलने वाली पेंशन भी लॉकडाउन में रोक दी गई। ज्ञापन में अशोक वाल्मीकि महाविद्यालय की अनुमति दिलाने, मैनुअल स्क्वेंजर के छूटे लाभार्थी को फार्म जमा कर लाभ दिलाने, नगर पालिका परिषद बिजनौर में कारगिल शहीद अशोक वाल्मीकि चौक/मुख्य द्वार बनवाने आदि की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में प्रदेश सचिव संदीप कुमार, दीपक कुमार, रूपेश कुमार, कन्हैयालाल, सोनू कुमार आदि शामिल रहे।
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बिजनौर। शहीद अशोक कुमार की शहादत के 21 वर्ष बीतने के बाद भी शासन-प्रशासन उनके परिवार की सुध लेने को तैयार नहीं है। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज ने शहीद के परिजनों को उनका हक दिलाने की मांग की है।
मंगलवार को भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज कार्यकर्ता प्रदेश सचिव संदीप कुमार के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में एकत्रित हुए। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। जिसमें बताया गया कि गोरखा रेजीमेंट की तीसरी बटालियन में नायक के पद पर तैनात गांव फीना निवासी अशोक कुमार अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। दस जुलाई 1999 को कारगिल में वे शहीद हो गए थे। उस दौरान शासन-प्रशासन ने उन्हें 50 बीघा कृषि योग्य भूमि देने, अशोक वाल्मीकि डिग्री कॉलेज खोलने, उनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने एवं परिवार को पेट्रोल पंप का लाइसेंस देने का वादा किया था। 21 वर्ष बीतने के बाद भी शासन-प्रशासन ने अपना वादा पूरा नहीं किया। वर्तमान में शहीद अशोक के परिवार की हालत ये है चार हजार रुपये महीने की मिलने वाली पेंशन भी लॉकडाउन में रोक दी गई। ज्ञापन में अशोक वाल्मीकि महाविद्यालय की अनुमति दिलाने, मैनुअल स्क्वेंजर के छूटे लाभार्थी को फार्म जमा कर लाभ दिलाने, नगर पालिका परिषद बिजनौर में कारगिल शहीद अशोक वाल्मीकि चौक/मुख्य द्वार बनवाने आदि की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में प्रदेश सचिव संदीप कुमार, दीपक कुमार, रूपेश कुमार, कन्हैयालाल, सोनू कुमार आदि शामिल रहे।
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