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Bijnor News: साहिल बोकराडे की मौत की सीबीआई जांच की मांग
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नगीना। नगीना के सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद ने आईआईटी-बॉम्बे के विद्यार्थी साहिल बोकराडे की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है।
सांसद ने पत्र में कहा कि 18 सितंबर 2026 को आईआईटी-बॉम्बे में साहिल बोकराडे की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला गंभीर और चिंताजनक है। घटना के बाद से साहिल के माता-पिता न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। न्याय की मांग को लेकर उनके भूख हड़ताल करने से परिवार की पीड़ा का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घटना को एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच किसी निर्णायक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। साहिल का मोबाइल फोन भी अब तक अनलॉक नहीं किया जा सका है।
चंद्रशेखर आजाद ने पत्र में आईआईटी-बॉम्बे प्रशासन के कथित गैर-जिम्मेदाराना बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि साहिल के साथ निर्धारित प्रक्रिया से हटकर जरूरत से ज्यादा सख्ती बरते जाने के आरोपों की गहन जांच होनी चाहिए, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके। सांसद ने 18 अक्तूबर को न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के साथ पुलिस-प्रशासन के कथित बर्बरतापूर्ण व्यवहार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग करने वाले विद्यार्थियों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
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उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से मांग की कि साहिल की मौत की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। साथ ही घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों, मोबाइल फोन, परीक्षा कक्ष के रिकॉर्ड और संस्थान के संबंधित दस्तावेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सांसद ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और मामले से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आने चाहिए।
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सांसद ने पत्र में कहा कि 18 सितंबर 2026 को आईआईटी-बॉम्बे में साहिल बोकराडे की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला गंभीर और चिंताजनक है। घटना के बाद से साहिल के माता-पिता न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। न्याय की मांग को लेकर उनके भूख हड़ताल करने से परिवार की पीड़ा का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घटना को एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच किसी निर्णायक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। साहिल का मोबाइल फोन भी अब तक अनलॉक नहीं किया जा सका है।
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चंद्रशेखर आजाद ने पत्र में आईआईटी-बॉम्बे प्रशासन के कथित गैर-जिम्मेदाराना बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि साहिल के साथ निर्धारित प्रक्रिया से हटकर जरूरत से ज्यादा सख्ती बरते जाने के आरोपों की गहन जांच होनी चाहिए, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके। सांसद ने 18 अक्तूबर को न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के साथ पुलिस-प्रशासन के कथित बर्बरतापूर्ण व्यवहार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग करने वाले विद्यार्थियों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए। किसी भी स्थिति में उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
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उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से मांग की कि साहिल की मौत की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। साथ ही घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों, मोबाइल फोन, परीक्षा कक्ष के रिकॉर्ड और संस्थान के संबंधित दस्तावेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सांसद ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और मामले से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आने चाहिए।