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Bijnor News: दौर गांव... जहां खामोश हो जाती थी सपेरों की बीन
Tue, 29 Jul 2025 12:54 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 29 Jul 2025 12:54 AM IST
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अफजलगढ़ में द्वारिकेश चीनी मिल के पास स्थित नाग मंदिर। संवाद
अफजलगढ़। ब्लॉक क्षेत्र में एक ऐसा स्थान है जहां आते ही सपेरों की बीन के स्वर खामोश हो जाते थे। दौर गांव के क्षेत्र के बारे में बुजुर्गाें के पास तमाम किस्से हैं। वे बताते हैं कि यहां चारों ओर घना जंगल था, जिसमें सांपों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती थीं। इस भूमि को नागराज वासुकी से शापित माना जाता है।
यह स्थान धामपुर-अफजलगढ़ मार्ग पर शुगर मिल से दक्षिण-पश्चिम में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे मौजूद है। बुजुर्ग मास्टर खुशीराम गौतम, बलराम सिंह गांधी तथा ठाकुर नरेशकांत सिंह बताते हैं कि प्राचीन काल में दौर गांव की भूमि पर सपेरा बीन बजाने की कोशिश करता तो उससे स्वर नहीं निकलते थे। शापित मानी जाने वाले इस क्षेत्र की सीमा कहां तक है इसकी सटीक जानकारी नहीं है।
द्वारिकेश शुगर मिल के पास ठाकुर नरेशकांत की भूमि पर नागपंचमी पर एक नाग दिखाई दिया था। इसके बाद 15 दिसंबर 2013 को इस स्थान पर वासुकीनाथ मंदिर का निर्माण कराया गया। यहां हर वर्ष पर श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाते हैं। बताया जाता है कि सावन माह में यहां नाग मंदिर की परिक्रमा करते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि अफजलगढ़ जाने के लिए इसी शापित भूमि से होकर एक पगडंडी गुजरती थी। साधन न होने की वजह से लोग यहां से होकर जाते थे। तब उन्हें दौर गांव के निकट विभिन्न प्रजातियों के सांप देखने को मिल जाते थे। ये किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते थे। गांव के निकट स्थित एक कुएं से पानी बहता रहता था।
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काल सर्प दोष निवारण के लिए आते हैं श्रद्धालु : काल सर्प दोष के निवारण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मत्था टेकने आते हैं। भगवान वासुकीनाथ उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। मान्यता है कि यहां पूजा करने से काल सर्प दोष का निवारण हो जाता है।
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यह स्थान धामपुर-अफजलगढ़ मार्ग पर शुगर मिल से दक्षिण-पश्चिम में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे मौजूद है। बुजुर्ग मास्टर खुशीराम गौतम, बलराम सिंह गांधी तथा ठाकुर नरेशकांत सिंह बताते हैं कि प्राचीन काल में दौर गांव की भूमि पर सपेरा बीन बजाने की कोशिश करता तो उससे स्वर नहीं निकलते थे। शापित मानी जाने वाले इस क्षेत्र की सीमा कहां तक है इसकी सटीक जानकारी नहीं है।
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द्वारिकेश शुगर मिल के पास ठाकुर नरेशकांत की भूमि पर नागपंचमी पर एक नाग दिखाई दिया था। इसके बाद 15 दिसंबर 2013 को इस स्थान पर वासुकीनाथ मंदिर का निर्माण कराया गया। यहां हर वर्ष पर श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाते हैं। बताया जाता है कि सावन माह में यहां नाग मंदिर की परिक्रमा करते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि अफजलगढ़ जाने के लिए इसी शापित भूमि से होकर एक पगडंडी गुजरती थी। साधन न होने की वजह से लोग यहां से होकर जाते थे। तब उन्हें दौर गांव के निकट विभिन्न प्रजातियों के सांप देखने को मिल जाते थे। ये किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते थे। गांव के निकट स्थित एक कुएं से पानी बहता रहता था।
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काल सर्प दोष निवारण के लिए आते हैं श्रद्धालु : काल सर्प दोष के निवारण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मत्था टेकने आते हैं। भगवान वासुकीनाथ उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। मान्यता है कि यहां पूजा करने से काल सर्प दोष का निवारण हो जाता है।

अफजलगढ़ में द्वारिकेश चीनी मिल के पास स्थित नाग मंदिर। संवाद