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Bijnor News: बिजनौर - अभिशाप को बनाएंगे वरदान, गाजर घास से बनेगा खाद
Tue, 22 Aug 2023 11:59 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 22 Aug 2023 11:59 PM IST
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- फसल ही नहीं मनुष्य के लिए भी खतरनाक मानी जाती है गाजर घास
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। गाजर घास यानी पार्थेनियम पिछले कई वर्षों से फसलों एवं बागों में प्रकोप के साथ-साथ मनुष्य की त्वचा संबंधी बीमारियों, एग्जिमा, एलर्जी, बुखार तथा दमा जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण है। वर्षा ऋतु में इसका अधिक अंकुरण होता है। अब इस घास से जिले में खाद बनाए जाने की तैयारी है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने किसान को बताया कि गाजर घास को विभिन्न नामों से जाना जाता है। भारत में पहली बार 1950 के दशक में यह घास आई थी। इसमें एक पौधे से 5000 से 25000 पौधे तैयार हो जाते हैं। बीजों का प्रकीर्णन हवा द्वारा होता है, जिससे इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी तेजी से होती है। उन्होंने बताया कि किसानों को बीज आने से पहले इसे उखाड़कर इसका कंपोस्ट एवं वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना चाहिए। साथ ही शीघ्र बढ़ने वाली फसलें जैसे- ज्वार, बाजरा, मक्का आदि में इसका प्रयोग किया जा सकता है।
इस खरपतवार को नष्ट करने के लिए किसान ग्लाइफोसेट (1.0 से 1.5 प्रतिशत) अथवा मैट्रीब्यूजिन 70 प्रतिशत (0.3 से 0.5 प्रतिशत) का छिड़काव भी कर सकते हैं।
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बिजनौर। गाजर घास यानी पार्थेनियम पिछले कई वर्षों से फसलों एवं बागों में प्रकोप के साथ-साथ मनुष्य की त्वचा संबंधी बीमारियों, एग्जिमा, एलर्जी, बुखार तथा दमा जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण है। वर्षा ऋतु में इसका अधिक अंकुरण होता है। अब इस घास से जिले में खाद बनाए जाने की तैयारी है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने किसान को बताया कि गाजर घास को विभिन्न नामों से जाना जाता है। भारत में पहली बार 1950 के दशक में यह घास आई थी। इसमें एक पौधे से 5000 से 25000 पौधे तैयार हो जाते हैं। बीजों का प्रकीर्णन हवा द्वारा होता है, जिससे इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी तेजी से होती है। उन्होंने बताया कि किसानों को बीज आने से पहले इसे उखाड़कर इसका कंपोस्ट एवं वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना चाहिए। साथ ही शीघ्र बढ़ने वाली फसलें जैसे- ज्वार, बाजरा, मक्का आदि में इसका प्रयोग किया जा सकता है।
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इस खरपतवार को नष्ट करने के लिए किसान ग्लाइफोसेट (1.0 से 1.5 प्रतिशत) अथवा मैट्रीब्यूजिन 70 प्रतिशत (0.3 से 0.5 प्रतिशत) का छिड़काव भी कर सकते हैं।