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दंपति की मौत पर फफक पड़े लोग
अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Mon, 24 Oct 2016 11:59 PM IST
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बिजनौर के रेहड़ में क्षेत्र के हरिकिशनपुर निवासी पति-पत्नी की लखनऊ में मौत होने से परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। दोनों का शव यहां पहुंचते ही घर में कोहराम मच गया। गांव के ही पास में फीका नदी के तट पर दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मृतक के पिता वेदप्रकाश ने बताया कि उनके 26 वर्षीय पुत्र पुष्पेंद्र कुमार की आरपीएफ तृतीय वाहिनी लखनऊ में सिपाही के पद पर एक साल पहले नौकरी
लगी थी। उसकी शादी छह माह पहले काशीपुर में 24 वर्षीय प्रियंका के साथ हुई थी। पिछले तीन माह से वह पत्नी के साथ सरकारी आवास में रहता था। दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों ने जीवन लीला खत्म कर ली। इस घटना का पता लगते ही घर में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही परिवार के लोग रविवार की रात में ही लखनऊ पहुंचे। दोनों का पोस्टमार्टम कराने के बाद तड़के तीन बजे पैतृक गांव हरिकिशनपुर लेकर आए। दोनों के शवों को देख गांव में शोक छा गया। परिवार के सदस्यों में चीखपुकार मच गई। परिवार के सदस्य रोते हुए कह रहे थे कि इनके उपर ऐसी कौन की मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था, जिसके कारण इन्हें जान देनी पड़ी। शवों को हर कोई फफक फफक कर रो पड़ा।
ग्रामीणों के सहयोग से परिवार के लोग शवों को गांव के पास ही गुजर रही फीका नदी के तट पर ले गए, जहां पर परिजनों ने दोनों का अंतिम संस्कार किया। मृतक के भाई मोनू का कहना है कि इस घटनाक्रम ने उन्हें व उनके परिवार को पूरी तरह से तोड़ दिया है। हाल ये है कि परिवार का कोई भी इस बारे में कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।
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मृतक के पिता वेदप्रकाश ने बताया कि उनके 26 वर्षीय पुत्र पुष्पेंद्र कुमार की आरपीएफ तृतीय वाहिनी लखनऊ में सिपाही के पद पर एक साल पहले नौकरी
लगी थी। उसकी शादी छह माह पहले काशीपुर में 24 वर्षीय प्रियंका के साथ हुई थी। पिछले तीन माह से वह पत्नी के साथ सरकारी आवास में रहता था। दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों ने जीवन लीला खत्म कर ली। इस घटना का पता लगते ही घर में कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही परिवार के लोग रविवार की रात में ही लखनऊ पहुंचे। दोनों का पोस्टमार्टम कराने के बाद तड़के तीन बजे पैतृक गांव हरिकिशनपुर लेकर आए। दोनों के शवों को देख गांव में शोक छा गया। परिवार के सदस्यों में चीखपुकार मच गई। परिवार के सदस्य रोते हुए कह रहे थे कि इनके उपर ऐसी कौन की मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था, जिसके कारण इन्हें जान देनी पड़ी। शवों को हर कोई फफक फफक कर रो पड़ा।
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ग्रामीणों के सहयोग से परिवार के लोग शवों को गांव के पास ही गुजर रही फीका नदी के तट पर ले गए, जहां पर परिजनों ने दोनों का अंतिम संस्कार किया। मृतक के भाई मोनू का कहना है कि इस घटनाक्रम ने उन्हें व उनके परिवार को पूरी तरह से तोड़ दिया है। हाल ये है कि परिवार का कोई भी इस बारे में कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।
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