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खुल सकता है आतंकियों की मौजूदगी का राज

Thu, 18 Feb 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर Updated Thu, 18 Feb 2016 12:48 AM IST
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May open secret of the presence of militants
बिजनौर में उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले से महिला के साथ दबोचे गए चार आतंकी विस्फोट के बाद बिजनौर से फरार हुए थे। इनके दो साथी तेलंगाना राज्य में मुठभेड़ के दौरान मारे गए। चार आतंकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरा बने थे और देश में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में लगे थे। आतंकियों के पकड़े जाने से अब यह भी राज खुल सकेंगे कि बिजनौर में किस इरादे से आतंकी पनाह लिए हुए थे।
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बिजनौर के मोहल्ला जाटान में 12 सितंबर 2014 को बम बनाते समय विस्फोट होने से एक आतंकी महबूब अली गंभीर रूप से झुलस गया था। इस घटना के बाद आतंकी मकान को छोड़कर झुलसे साथी के साथ फरार हो गए थे। तीन आतंकी मोहल्ला जाटान के मकान में लीलो देवी के मकान में व तीन आतंकी मोहल्ला भाटान में रईस के घर में किराए पर रहते थे। किसी को नहीं मालूम था कि किराए पर रहने वाले आतंकी हैं। एक सप्ताह बाद सुरक्षा एजेंसी व एटीएस को आतंकियों के मोहल्ला भाटान स्थित दूसरे ठिकाने का पता चला था। तब तक आतंकी बिजनौर से निकल चुके थे। भाटान के मकान से भी आतंकियों का सामान मिला था।
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 पुलिस ने आतंकियों को पनाह देने में मकान स्वामी रईस, उसके पुत्र अब्दुल्ला, गांव ऊमरी की हुस्ना व उसके भाई नदीम, कस्बा झालू के फुरकान को दबोचा था। फरार आतंकियों में गैंग का सरगना एजाजुद्दीन, असलम, अमजद, महबूब अली, सालिक व जाकिर हुसैन शामिल थे। पकड़े गए मददगारों से आतंकियों के डेटोनेटर, मोटी रकम समेत भारी सामान मिला था। यह सभी मददगार इन दिनों लखनऊ की जेल में बंद हैं। पिछले दिनों इन्हें बिजनौर जेल से लखनऊ भेजा गया है। लखनऊ में अलग से गठित कोर्ट इस केस की सुनवाई कर रही है। जांच के दौरान पाया गया था कि फरार आतंकियों में सालिक को छोड़कर सभी मध्य प्रदेश की खंडवा जेल से दो लोगों की हत्या करके फरार हुए थे। बिजनौर में करीब एक महीने से ज्यादा समय से पनाह लिए हुए थे।
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अपनी वेशभूषा बदलकर बिजनौर में रहते थे। मोहल्ला जाटान में हिंदू इलाके में रहने के कारण ये आतंकी हिंदुओं के त्योहार मनाते थे, ताकि कोई उन पर शक न कर सके। मोहल्ले के लोगों से ये बात तो नहीं करते थे, पर छोटे बच्चों से घुले मिले रहते थे। सुबह को निकलकर शाम को मकान पर लौटते थे। मोहल्ले के लोगों को बता रखा था कि एक फैक्ट्री में ये नौकरी करते हैं। चार अप्रैल 2015 को तेलंगाना राज्य के नलगौंडा में पुलिस से हुई मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए थे। बाकी चारों वहां से भाग निकले थे। तब से पुलिस व सुरक्षा एजेंसी इन फरार आतंकियों की तलाश में लगी थीं, पर ये हत्थे नहीं चढ़ रहे थे। फरार आतंकियों पर एनआईए ने दस-दस लाख का इनाम घोषित कर रखा था। फरार  आतंकी सिमी संगठन से जुड़े थे। वहीं बिजनौर से फरार आतंकी महिला की आड़ में हर जगह पनाह लेते आए हैं। बिजनौर में हुस्ना उनके लिए ढाल बनी थी।

 उड़ीसा में भी नजमा नाम की एक महिला आतंकियों के साथ पकड़ी। यह महिला कहां की है, पता नहीं चला  उधर, एसपी सुभाष सिंह बघेल के मुताबिक उड़ीसा के राउरकेला में बिजनौर से फरार आतंकियों के पकड़े जाने की सूचना मिली है। एजाजुद्दीन व असलम तेलंगाना राज्य में मुठभेड़ में मारे गए थे, जबकि अमजद, महबूब, सालिक व जाकिर हुसैन फरार थे। फरार चार आतंकियों के पकड़े जाने का पता चला है।

मुजफ्फरनगर दंगे का लेना चाहते थे बदला
बिजनौर में छिपे आतंकी मुजफ्फरनगर के जानसठ में आरएसएस के शिविर को उड़ाने की फिराक में लगे थे। इसके लिए वह बम बना रहे थे। आतंकियों ने आरएसएस के कैंप उड़ाने की बात मददगार अब्दुल्ला से शेयर की थी। पकड़े जाने के बाद अब्दुल्ला ने ये राज खोला था।आतंकी मोहल्ला जाटान के मकान में सिलेंडर बम बना रहे थे। बम बनाते समय ही विस्फोट हुआ था। माचिस की तिल्ली के मसाले से बम बनाया जा रहा था। बड़ी तादाद में मकान से तिल्ली का मसाला व बम बनाने का अन्य सामान मिला था। इसके अलावा पाकिस्तान निर्मित घरेलू सामान भी आतंकियों के कमरे से बरामद हुआ था। आतंकी पूरे वेस्ट यूपी की रैकी करते घूमते थे। यह बात पकड़े गए मददगारों ने भी सुरक्षा एजेंसियों को बताई थी। मेरठ, मुरादाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली, मुजफ्फरनगर ये आतंकी कई बार गए थे। वेस्ट यूपी में स्लीपिंग माड्यूल तैयार करने में जुटे थे। ये आतंकी मुजफ्फरनगर दंगे का बदला लेना चाहते थे। इसी इरादे से बिजनौर में छिपे थे। आतंकियों के कमरे से रोडवेज बसों के कई जिलों में आने जाने के टिकट भी बरामद हुए थे।

उमरी के जंगल में ली थी पनाह
बिजनौर से फरार होने के बाद मददगार हुस्ना के गांव उमरी के जंगल में पनाह लिए रहे। असलम व सालिक महबूब को लेकर उमरी गांव के जंगल में छिप गए। हुस्ना के पकड़े जाने के बाद आतंकियों के उमरी में रहने की पुष्टि हुई थी। जंगल से आतंकियों की इस्तेमाल की गई दवाई व अन्य सामान भी मिला था। हुस्ना आतंकियों से पूरी तरह घुल मिल गई थी। वह उनके सारे राज जानती थी।


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