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तबस्सुम की मौत पर परिवार में शोक
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Tue, 15 Sep 2015 12:36 AM IST
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नजीबाबाद। मक्का में हुए हादसे में नजीबाबाद की मूल निवासी तबस्सुम की मृत्यु से परिजन एवं संबंधी आहत हैं। तबस्सुम की मौत की खबर मिलते ही संबंधियों में शोक छा गया।
चंडीगढ़ के साफ्टवेयर इंजीनियर वसीम जावेद और उनकी पत्नी तबस्सुम एक साथ हज के लिए गए थे। मक्का में क्रेन गिरने से हुए हादसे में तबस्सुम की मौत हो गई। दो दिन बाद वसीम जावेद ने अपनी पत्नी के शव की पहचान की।
वसीम के संबंधी नजीबाबाद निवासी मुस्लिम फंड कर्मी मो. कामिल ने बताया कि वसीम एवं तबस्सुम मूल रूप से नजीबाबाद के निवासी हैं। दोनों के परिजन चंडीगढ़ एवं खुर्जा में रह रहे हैं।
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तबस्सुम और वसीम नजीबाबाद में उनके घर से रवाना हुए थे। तबस्सुम की मौत की खबर से संबंधियों एवं परिजनों को गहरा सदमा पहुंचा है। उन्होंने बताया कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय बीमारी के कारण वसीम पत्नी के साथ नहीं था।
रिश्तेदार की कॉल ने बचाई तीनों की जान
स्योहारा। शुक्रवार को मक्का के क्रेन हादसे में लकड़ी व्यापारी परवेज अख्तर, उसकी मां और पत्नी की जान रिश्तेदार की कुछ देर पहले मोबाइल पर आई एक कॉल ने बचाई थी। हादसे से पांच मिनट पहले ही ये तीनों मौके से हटे थे ,वरना ये भी हादसे की चपेट में आ जाते।
स्योहारा निवासी परवेज अख्तर, उसकी मां वकीला और पत्नी शहाना भी हज करने मक्का मदीने हुए गए हैं। क्रेन हादसे से ये बच निकले।
परवेज अख्तर ने अपने बड़े भाई फिरोज अख्तर और छोटे भाई जावेद अख्तर को फोन कर बताया जहां क्रेन हादसा हुआ है, वहां मां और पत्नी के साथ उसने भी नमाज पढ़ी थी। हादसे से पांच मिनट पहले एक रिश्तेदार मोहम्मद रफी की उसके मोबाइल पर कॉल आई और उसने अपने पास बुलाया। रफी मक्का में ही रहता है। वह तीनों रफी से मिलने घर चले गए। तभी हादसा हुआ। गनीमत रही कि तीनों वहां से निकल गए।
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चंडीगढ़ के साफ्टवेयर इंजीनियर वसीम जावेद और उनकी पत्नी तबस्सुम एक साथ हज के लिए गए थे। मक्का में क्रेन गिरने से हुए हादसे में तबस्सुम की मौत हो गई। दो दिन बाद वसीम जावेद ने अपनी पत्नी के शव की पहचान की।
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वसीम के संबंधी नजीबाबाद निवासी मुस्लिम फंड कर्मी मो. कामिल ने बताया कि वसीम एवं तबस्सुम मूल रूप से नजीबाबाद के निवासी हैं। दोनों के परिजन चंडीगढ़ एवं खुर्जा में रह रहे हैं।
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तबस्सुम और वसीम नजीबाबाद में उनके घर से रवाना हुए थे। तबस्सुम की मौत की खबर से संबंधियों एवं परिजनों को गहरा सदमा पहुंचा है। उन्होंने बताया कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय बीमारी के कारण वसीम पत्नी के साथ नहीं था।
रिश्तेदार की कॉल ने बचाई तीनों की जान
स्योहारा। शुक्रवार को मक्का के क्रेन हादसे में लकड़ी व्यापारी परवेज अख्तर, उसकी मां और पत्नी की जान रिश्तेदार की कुछ देर पहले मोबाइल पर आई एक कॉल ने बचाई थी। हादसे से पांच मिनट पहले ही ये तीनों मौके से हटे थे ,वरना ये भी हादसे की चपेट में आ जाते।
स्योहारा निवासी परवेज अख्तर, उसकी मां वकीला और पत्नी शहाना भी हज करने मक्का मदीने हुए गए हैं। क्रेन हादसे से ये बच निकले।
परवेज अख्तर ने अपने बड़े भाई फिरोज अख्तर और छोटे भाई जावेद अख्तर को फोन कर बताया जहां क्रेन हादसा हुआ है, वहां मां और पत्नी के साथ उसने भी नमाज पढ़ी थी। हादसे से पांच मिनट पहले एक रिश्तेदार मोहम्मद रफी की उसके मोबाइल पर कॉल आई और उसने अपने पास बुलाया। रफी मक्का में ही रहता है। वह तीनों रफी से मिलने घर चले गए। तभी हादसा हुआ। गनीमत रही कि तीनों वहां से निकल गए।