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तभी मिलेगा सुकून जब फांसी पर लटकेगा इरफान
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:16 AM IST
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नजीबाबाद (बिजनौर)। पुत्र और दो सगे भाइयों के हत्यारे मुगलूशाह नजीबाबाद निवासी इरफान उर्फ नाका की मौत की सजा हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा बरकरार रखने से परिजन खुश हैं। वादी एवं हत्यारे इरफान के ताऊ मो.यूनुस का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को तभी सुकून मिलेगा, जब इरफान फांसी पर लटका दिया जाएगा।
नजीबाबाद के मुगलूशाह निवासी इरफान उर्फ नाका को बिजनौर के एडीजे रजनीश कुमार ने दो सगे भाइयों नौशाद व इरशाद और सगे पुत्र इस्लामुद्दीन को ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आग लगाने के सनसनीखेज मामले में 31 जुलाई 2017 को फांसी की सजा सुनाई थी। छह अगस्त 2016 को हुई घटना में गंभीर रूप से घायल भाई इरशाद की सात अगस्त को और दूसरे भाई नौशाद व पुत्र इस्लामुद्दीन की दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में 18 अगस्त 2016 को मृत्यु हुई थी।
बिजनौर न्यायालय से फांसी की सजा होने के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद ने दुर्दांत अपराधी इरफान उर्फ नाका की फांसी की सजा बरकरार रखी है। हाईकोर्ट से फांसी की सजा बरकरार रहने से इरफान के परिजन एवं संबंधियों ने राहत की सांस ली है। इरफान का पुत्र इस्लामुद्दीन पहली बीवी से जन्मा था। वह मकान में अपना हक मांग रहा था। उसके सगे भाई इरशाद और नौशाद उसका साथ दे रहे थे, जिससे नाराज होकर इरफान ने तीनों को मौत के घाट उतारने की दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम दिया।
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वादी ने ली राहत की सांस
नजीबाबाद। तिहरे हत्याकांड के वादी मो.यूनुस ने बिजनौर के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद से भी फांसी की सजा पर मुहर लगने पर राहत महसूस की। हत्यारे इरफान के ताऊ व ससुर मो.यूनुस कहते हैं कि उनकी नजरों के सामने से वो दिन नहीं हटता जब इरफान ने सोते हुए दो भाइयों और पुत्र को आग के हवाले कर दिया था। उन्हें और उनके परिवार को उस दिन सुकून मिलेगा, जब इरफान को फांसी पर लटका दिया जाएगा।
मजबूत साक्ष्य दिलाएंगे फांसी
नजीबाबाद। इरफान द्वारा अपने सगे पुत्र और दो भाइयों को सोते समय कमरे में बंद कर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर जलाने के मामले में मजबूत साक्ष्य उसे फांसी के फंदे तक पहुंचा रहे हैं। घटना के अगले ही दिन इरफान के एक भाई इरशाद की मौत हो गई थी, जबकि 12 दिन बाद दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में दूसरे भाई नौशाद और पुत्र इस्लामुद्दीन की एक ही दिन मृत्यु हुई थी। विवेचक दरोगा विष्णु गोपाल उपाध्याय ने तीनों के बयान की वीडियोग्राफी कराई थी। उधर, इरफान के ताऊ मो.यूनुस, भाई शानू, बहन सोनी ने भी अपने निर्भीक बयान दिए। परिजनों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी उनको न्याय दिलाएगी।
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नजीबाबाद के मुगलूशाह निवासी इरफान उर्फ नाका को बिजनौर के एडीजे रजनीश कुमार ने दो सगे भाइयों नौशाद व इरशाद और सगे पुत्र इस्लामुद्दीन को ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर आग लगाने के सनसनीखेज मामले में 31 जुलाई 2017 को फांसी की सजा सुनाई थी। छह अगस्त 2016 को हुई घटना में गंभीर रूप से घायल भाई इरशाद की सात अगस्त को और दूसरे भाई नौशाद व पुत्र इस्लामुद्दीन की दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में 18 अगस्त 2016 को मृत्यु हुई थी।
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बिजनौर न्यायालय से फांसी की सजा होने के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद ने दुर्दांत अपराधी इरफान उर्फ नाका की फांसी की सजा बरकरार रखी है। हाईकोर्ट से फांसी की सजा बरकरार रहने से इरफान के परिजन एवं संबंधियों ने राहत की सांस ली है। इरफान का पुत्र इस्लामुद्दीन पहली बीवी से जन्मा था। वह मकान में अपना हक मांग रहा था। उसके सगे भाई इरशाद और नौशाद उसका साथ दे रहे थे, जिससे नाराज होकर इरफान ने तीनों को मौत के घाट उतारने की दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम दिया।
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वादी ने ली राहत की सांस
नजीबाबाद। तिहरे हत्याकांड के वादी मो.यूनुस ने बिजनौर के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद से भी फांसी की सजा पर मुहर लगने पर राहत महसूस की। हत्यारे इरफान के ताऊ व ससुर मो.यूनुस कहते हैं कि उनकी नजरों के सामने से वो दिन नहीं हटता जब इरफान ने सोते हुए दो भाइयों और पुत्र को आग के हवाले कर दिया था। उन्हें और उनके परिवार को उस दिन सुकून मिलेगा, जब इरफान को फांसी पर लटका दिया जाएगा।
मजबूत साक्ष्य दिलाएंगे फांसी
नजीबाबाद। इरफान द्वारा अपने सगे पुत्र और दो भाइयों को सोते समय कमरे में बंद कर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर जलाने के मामले में मजबूत साक्ष्य उसे फांसी के फंदे तक पहुंचा रहे हैं। घटना के अगले ही दिन इरफान के एक भाई इरशाद की मौत हो गई थी, जबकि 12 दिन बाद दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में दूसरे भाई नौशाद और पुत्र इस्लामुद्दीन की एक ही दिन मृत्यु हुई थी। विवेचक दरोगा विष्णु गोपाल उपाध्याय ने तीनों के बयान की वीडियोग्राफी कराई थी। उधर, इरफान के ताऊ मो.यूनुस, भाई शानू, बहन सोनी ने भी अपने निर्भीक बयान दिए। परिजनों को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी उनको न्याय दिलाएगी।