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तलबा को आधुनिक बनाने में जुटे तीन सौ हिंदू शिक्षक
Updated Sun, 22 Jul 2018 01:24 AM IST
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अमरोहा। मदरसा आधुनिकीकरण के तहत जिले के मदरसों में तलबा को दीन के साथ दुनियावी तालीम दी जा रही है। मदरसों में ये तालीम मुस्लिम शिक्षकों के साथ हिंदू शिक्षक भी दे रहे हैं। वह तलबा को अधुनिक बनाने में लगे हैं। जिले के 246 आधुनिक मदरसों में करीब तीन सौ हिंदू शिक्षकों की तैनाती है। जबकि कुल शिक्षकों की तैनाती 710 है। जिलेभर में आधुनिक शिक्षा के 246 मदरसे संचालित हैं। इनमें तैनात कुल 710 शिक्षकों में से मुस्लिम के बाद दूसरे नंबर सबसे ज्यादा हिंदू शिक्षक हैं। दरअसल मदरसों को सर्वसमाज के बच्चों की प्राथमिक शिक्षा का केंद्र बनाने के मकसद से एनडीए सरकार ने सभी धर्मों के शिक्षकों को इन मदरसों में तैनाती दी थी। फिलहाल जिलेभर के आधुनिक शिक्षा के मदरसों में 35 से 40 फीसदी हिंदू शिक्षक ही हैं। ऑल इंडिया मदरसा मॉडर्न टीचर एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष मोहम्मद मुस्तकीम ने सरकार मदरसा शिक्षा को एक विशेष वर्ग का मानकर भेदभाव कर रही है। जबकि जिले में आधुनिक मदरसों में करीब तीन सौ हिंदू शिक्षक बच्चों को दुनियावी तालीम दे रहे हैं। शिक्षकों की समस्याओं की अनदेखी न की जाए।
सरकार के अनदेखी का शिकार मदरसा आधुनिक शिक्षा
अमरोहा। मदरसों को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर सर्वसमाज के बच्चों को मूलभूत शिक्षा दिलाने के मकसद से सन् 1998 में एनडीए सरकार में मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षा योजना लाई गई थी। योजना के तहत मदरसों का कायाकल्प करते हुए इनमें शिक्षकों की संख्या तीन कर दी गई। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों से प्राइमरी स्तर पर शिक्षक का मानदेय तीन हजार और जूनियर स्तर पर छह हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया था। बाद में सपा सरकार ने इसमें दो हजार रुपये राज्यांश और यूपीए सरकार ने तीन हजार रुपये केंद्रांश भी जोड़ दिया था।
मदरसा शिक्षकों का दर्द
अमरोहा। आधुनिक मदरसा शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश सरकार बनने के बाद पिछले साल ईद से पहले रूका हुआ मानदेय देने का वायदा किया था। जबकि मानदेय मिलना तो दूर पिछले दस माह से शिक्षकों को हर माह मिलने वाला राज्यांश और केंद्रांश भी रोक दिया है। इन हालातों में मदरसा शिक्षकों के सामने भयंकर आर्थकि संकट पैदा हो गया है। इसके चलते बिना किसी पारिश्रमिक के ही वे बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इसके चलते कई मदरसा शिक्षकों की सदमे से मौत हो चुकी है। मानदेय सहित कई मांगों को लेकर मदरसा शिक्षकों ने सांसद जगदंबिका पाल से पिछले महीने मुलाकात की थी। इसमें प्रदेश के 30 हजार मदरसा शिक्षकों को जल्द मानदेय दिलाने का आश्वासन दिलाया गया था।
सरकार के अनदेखी का शिकार मदरसा आधुनिक शिक्षा
अमरोहा। मदरसों को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर सर्वसमाज के बच्चों को मूलभूत शिक्षा दिलाने के मकसद से सन् 1998 में एनडीए सरकार में मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षा योजना लाई गई थी। योजना के तहत मदरसों का कायाकल्प करते हुए इनमें शिक्षकों की संख्या तीन कर दी गई। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों से प्राइमरी स्तर पर शिक्षक का मानदेय तीन हजार और जूनियर स्तर पर छह हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया था। बाद में सपा सरकार ने इसमें दो हजार रुपये राज्यांश और यूपीए सरकार ने तीन हजार रुपये केंद्रांश भी जोड़ दिया था।
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मदरसा शिक्षकों का दर्द
अमरोहा। आधुनिक मदरसा शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश सरकार बनने के बाद पिछले साल ईद से पहले रूका हुआ मानदेय देने का वायदा किया था। जबकि मानदेय मिलना तो दूर पिछले दस माह से शिक्षकों को हर माह मिलने वाला राज्यांश और केंद्रांश भी रोक दिया है। इन हालातों में मदरसा शिक्षकों के सामने भयंकर आर्थकि संकट पैदा हो गया है। इसके चलते बिना किसी पारिश्रमिक के ही वे बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इसके चलते कई मदरसा शिक्षकों की सदमे से मौत हो चुकी है। मानदेय सहित कई मांगों को लेकर मदरसा शिक्षकों ने सांसद जगदंबिका पाल से पिछले महीने मुलाकात की थी। इसमें प्रदेश के 30 हजार मदरसा शिक्षकों को जल्द मानदेय दिलाने का आश्वासन दिलाया गया था।
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