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ग्रामीणों के हंगामे के बाद पुलिस ने हिरासत में पूछताछ को लिए दोनों युवकों को छोड़ा
Updated Tue, 10 Apr 2018 12:28 AM IST
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धामपुर। पुलिस ने गांव अजीतपुर दासी निवासी गौरव हत्याकांड में पूछताछ के लिए दो दिन पहले थाना क्षेत्र के गांव कोटरा टप्पा निवासी दो युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। इस दौरान पुलिस की पिटाई से एक युवक की हालत बिगड़ गई। पुलिस ने दोनों को उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां अभी भी उनका उपचार चल रहा है। उधर, मामले की जानकारी होते ही परिजनों ने थाने पहुंचकर हंगामा कर दिया।
गौरतलब है कि तीन महीने पहले गांव अजीतपुर दासी निवासी 22 वर्षीय गौरव पुत्र राजवीर सिंह का शव नींदडू में पेट्रोल पंप के पास मिला था। युवक के परिजनों की ओर से घटना की अज्ञात में रिपोर्ट कायम कराई गई थी। पुलिस ने कोटरा टप्पा निवासी प्रदीप और रिंकू को कुछ दिनों पहले भी पकड़ कर पूछताछ की थी। कोतवाल मनोज कुुमार ने बताया कि पुलिस के पास जो वीडियो है, उसमें यह युवक मृतक के साथ नजर आ रहे हैं। इसलिए पुलिस ने इन युवकों को रविवार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। पुलिस ने युवकों की पिटाई नहीं की। युवकों ने पुलिस हिरासत से मुक्त होने के लिए ड्रामा किया है। सीओ अर्चना सिंह ने कहा कि युवकों से मारपीट करने का कोई मतलब ही नहीं बनता। पुलिस तो केवल उनसे पूछताछ कर रही थी।
उधर, जब ग्रामीणों को पुलिस द्वारा युवकों की पिटाई करने से हालत बिगड़ने का पता लगा तो उनमें गुस्सा फैल गया। वे रात में ट्रैक्टर ट्रॉली से कोतवाली पहुंचे और जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों के हंगामे को देख अधिकांश पुलिस अधिकारी इधर-उधर चले गए। बाद में थाने के एक दो पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत किया। कोतवाल ने बताया कि ग्रामीणों के हंगामे को देख दोनों युवकों को उनके परिजनों की सुपुर्दगी में देकर रिहा कर दिया है।
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गौरतलब है कि तीन महीने पहले गांव अजीतपुर दासी निवासी 22 वर्षीय गौरव पुत्र राजवीर सिंह का शव नींदडू में पेट्रोल पंप के पास मिला था। युवक के परिजनों की ओर से घटना की अज्ञात में रिपोर्ट कायम कराई गई थी। पुलिस ने कोटरा टप्पा निवासी प्रदीप और रिंकू को कुछ दिनों पहले भी पकड़ कर पूछताछ की थी। कोतवाल मनोज कुुमार ने बताया कि पुलिस के पास जो वीडियो है, उसमें यह युवक मृतक के साथ नजर आ रहे हैं। इसलिए पुलिस ने इन युवकों को रविवार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। पुलिस ने युवकों की पिटाई नहीं की। युवकों ने पुलिस हिरासत से मुक्त होने के लिए ड्रामा किया है। सीओ अर्चना सिंह ने कहा कि युवकों से मारपीट करने का कोई मतलब ही नहीं बनता। पुलिस तो केवल उनसे पूछताछ कर रही थी।
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उधर, जब ग्रामीणों को पुलिस द्वारा युवकों की पिटाई करने से हालत बिगड़ने का पता लगा तो उनमें गुस्सा फैल गया। वे रात में ट्रैक्टर ट्रॉली से कोतवाली पहुंचे और जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों के हंगामे को देख अधिकांश पुलिस अधिकारी इधर-उधर चले गए। बाद में थाने के एक दो पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत किया। कोतवाल ने बताया कि ग्रामीणों के हंगामे को देख दोनों युवकों को उनके परिजनों की सुपुर्दगी में देकर रिहा कर दिया है।
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