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गैर इरादतन हत्या में मां-बेटी को दस-दस साल की सजा
Updated Fri, 15 Sep 2017 01:05 AM IST
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बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश गैर इरादतन हत्या के मामले में एक महिला व उसकी पुत्री को दस-दस वर्ष के कारावास व 15-15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता श्यामस्वरूप शर्मा के अनुसार कस्बा स्योहारा के मोहल्ला सोतीयान निवासी मिश्री सिंह चौहान ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 22 फरवरी 2012 की सुबह साढ़े नौ बजे वह घर से नाश्ता करके बाजार में अपनी हार्डवेयर की दुकान पर आ गया था। उसने दोपहर को अपनी पत्नी 65 वर्षीय मक्खनी देवी को भोजन के बारे में पता करने के लिए फोन किया तो उसने फोन नहीं उठाया। जब दोपहर को डेढ़ बजे वह घर पहुंचा तो देखा कि घर के आंगन में एक गिलास पानी व मिठाई रखी है। उसने पत्नी को तलाश किया तो एक कमरे में खून से लथपथ मक्खनी देवी का शव पड़ा था। उसके गले की चेन, अंगूठी व कुंडल गायब थे। घर की अलमारियों के ताले टूटे पड़े थे। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जब विवेचना की तो यह बात सामने आई कि मृतका मक्खनी देवी महिलाओं के जेवर गिरवी रखकर लेनदेन का काम करती थी। पड़ोस की लक्ष्मी देवी ने अपने कुंडल गिरवी रखकर 1200 रुपये उधार लिए थे। घटना के दिन लक्ष्मी को किसी शादी में जाना था। लक्ष्मी अपनी पुत्री साक्षी के साथ मक्खनी देवी के पास पहुंची और उससे कुंडल मांगे। मक्खनी देवी ने कुंडल देने से इंकार कर दिया। दोनों में विवाद हो गया। लक्ष्मी देवी और साक्षी ने मक्खनी देवी को धक्का दे दिया। मक्खनी देवी के सिर में चोट आई। बाद में बेलन से मक्खनी देवी पर प्रहार किया गया। इससे मक्खनी देवी की मौत हो गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इसे गैर इरादतन हत्या का मामला माना और धारा 304/34 आईपीसी में दस-दस वर्ष व धारा 352 में तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई। दोनों सजा एक साथ चलेंगी। साक्षी के दो बच्चे हैं। एक बच्चा डेढ़ साल का व दूसरा करीब एक माह का है। दोनों बच्चों को भी अपनी मां के साथ जेल ले जाया गया है।
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शासकीय अधिवक्ता श्यामस्वरूप शर्मा के अनुसार कस्बा स्योहारा के मोहल्ला सोतीयान निवासी मिश्री सिंह चौहान ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 22 फरवरी 2012 की सुबह साढ़े नौ बजे वह घर से नाश्ता करके बाजार में अपनी हार्डवेयर की दुकान पर आ गया था। उसने दोपहर को अपनी पत्नी 65 वर्षीय मक्खनी देवी को भोजन के बारे में पता करने के लिए फोन किया तो उसने फोन नहीं उठाया। जब दोपहर को डेढ़ बजे वह घर पहुंचा तो देखा कि घर के आंगन में एक गिलास पानी व मिठाई रखी है। उसने पत्नी को तलाश किया तो एक कमरे में खून से लथपथ मक्खनी देवी का शव पड़ा था। उसके गले की चेन, अंगूठी व कुंडल गायब थे। घर की अलमारियों के ताले टूटे पड़े थे। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जब विवेचना की तो यह बात सामने आई कि मृतका मक्खनी देवी महिलाओं के जेवर गिरवी रखकर लेनदेन का काम करती थी। पड़ोस की लक्ष्मी देवी ने अपने कुंडल गिरवी रखकर 1200 रुपये उधार लिए थे। घटना के दिन लक्ष्मी को किसी शादी में जाना था। लक्ष्मी अपनी पुत्री साक्षी के साथ मक्खनी देवी के पास पहुंची और उससे कुंडल मांगे। मक्खनी देवी ने कुंडल देने से इंकार कर दिया। दोनों में विवाद हो गया। लक्ष्मी देवी और साक्षी ने मक्खनी देवी को धक्का दे दिया। मक्खनी देवी के सिर में चोट आई। बाद में बेलन से मक्खनी देवी पर प्रहार किया गया। इससे मक्खनी देवी की मौत हो गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इसे गैर इरादतन हत्या का मामला माना और धारा 304/34 आईपीसी में दस-दस वर्ष व धारा 352 में तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई। दोनों सजा एक साथ चलेंगी। साक्षी के दो बच्चे हैं। एक बच्चा डेढ़ साल का व दूसरा करीब एक माह का है। दोनों बच्चों को भी अपनी मां के साथ जेल ले जाया गया है।
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