{"_id":"5acd20b44f1c1b613e8b4787","slug":"101523392692-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं थम रहा ढबारसी में बंदरों की मौत का सिलसिला","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नहीं थम रहा ढबारसी में बंदरों की मौत का सिलसिला
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ढबारसी/ अमरोहा। आखिर ढबारसी में बंदरों की मौत का सिलसिला कब थमेगा। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है। क्योंकि, मंगलवार को भी एक बंदर ने दम तोड़ दिया। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर काल के गाल में समा चुके हैं। वहीं दर्जनों बंदर बीमारी से जूझ रहे हैं।
ढबारसी के मोहल्ला होलीवाला में मंगलवार की दोपहर एक बंदर ने दम तोड़ दिया। वहीं कई की हालत नाजुक बनी हुई है। बंदरों की मौत का यह सिलसिला पिछले बीस दिनों से चल रहा है। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर मर चुके हैं। बंदरों की मौत पर हल्ला हुआ तो पशुपालन विभाग ने डाक्टरों का अमला गांव में उतार दिया। डाक्टरों की टीम पिछले बीस दिनों से गांव में डटी हुई है।
इलाज के शुरुआती दौर में ग्लूकोज, इंजेक्शन और दवाइयां दी गई। उम्मीद जगी कि शायद अब बंदर बच जाएंगेे। लेकिन, बीमार बंदर भी एक एक कर दम तोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि एक बंदर का पोस्टमार्टम करते हुए विसरा आईवीआरई बरेली भेजा गया। जहां के वैज्ञानिकों ने बंदरों को जहर दिए जाने की पुष्टि की है। इसके बाद आईवीआरई की टीम भी दो बार गांव में आ चुकी है। इस घटना को लेकर फिलहाल आईवीआरआई में रिसर्च चल रहा है जल्द ही फाइनल रिपोर्ट आ सकती है। पहले दौ सौ मीटर के दायरे में बंदर बीमार पड़ रहे थे अब ये दायरा भी बढ़ गया है। पांच सौ मीटर के दायरे वाले बंदर भी बीमारी की चपेट में हैं। आईवीआरआई से दूसरी रिपोर्ट में भी चूहे मार दवाई के सेवन से बंदरों की मौत होना बताया गया है।
विज्ञापन
एसडीएम सीओ ने ली बैठक
ढबारसी। एसडीएम हर्षवर्धन सिंह और सीओ अजय राय मंगलवार को ढबारसी पहुंचे। इन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठक कर बंदरों की मौत पर विचार विमर्श किया। ग्रामीणों से सुझाव मांगे कि किस तरह बंदरों की मौत को रोका जा सकता है। क्योंकि इलाज के बाद भी बंदरों की मौत का सिलसिला नहीं रुक रहा है। वहीं गांव के तीनों राशन डीलरों को निर्देश दिए कि हर महीने बीस बीस किलो आटे की रोटी बंदरों को खिलाई जाएं। जिससे बंदरों खाने की व्यवस्था बनी रहे।
विज्ञापन
ढबारसी के मोहल्ला होलीवाला में मंगलवार की दोपहर एक बंदर ने दम तोड़ दिया। वहीं कई की हालत नाजुक बनी हुई है। बंदरों की मौत का यह सिलसिला पिछले बीस दिनों से चल रहा है। अब तक डेढ़ सौ से ज्यादा बंदर मर चुके हैं। बंदरों की मौत पर हल्ला हुआ तो पशुपालन विभाग ने डाक्टरों का अमला गांव में उतार दिया। डाक्टरों की टीम पिछले बीस दिनों से गांव में डटी हुई है।
विज्ञापन
इलाज के शुरुआती दौर में ग्लूकोज, इंजेक्शन और दवाइयां दी गई। उम्मीद जगी कि शायद अब बंदर बच जाएंगेे। लेकिन, बीमार बंदर भी एक एक कर दम तोड़ रहे हैं। गौरतलब है कि एक बंदर का पोस्टमार्टम करते हुए विसरा आईवीआरई बरेली भेजा गया। जहां के वैज्ञानिकों ने बंदरों को जहर दिए जाने की पुष्टि की है। इसके बाद आईवीआरई की टीम भी दो बार गांव में आ चुकी है। इस घटना को लेकर फिलहाल आईवीआरआई में रिसर्च चल रहा है जल्द ही फाइनल रिपोर्ट आ सकती है। पहले दौ सौ मीटर के दायरे में बंदर बीमार पड़ रहे थे अब ये दायरा भी बढ़ गया है। पांच सौ मीटर के दायरे वाले बंदर भी बीमारी की चपेट में हैं। आईवीआरआई से दूसरी रिपोर्ट में भी चूहे मार दवाई के सेवन से बंदरों की मौत होना बताया गया है।
विज्ञापन
एसडीएम सीओ ने ली बैठक
ढबारसी। एसडीएम हर्षवर्धन सिंह और सीओ अजय राय मंगलवार को ढबारसी पहुंचे। इन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठक कर बंदरों की मौत पर विचार विमर्श किया। ग्रामीणों से सुझाव मांगे कि किस तरह बंदरों की मौत को रोका जा सकता है। क्योंकि इलाज के बाद भी बंदरों की मौत का सिलसिला नहीं रुक रहा है। वहीं गांव के तीनों राशन डीलरों को निर्देश दिए कि हर महीने बीस बीस किलो आटे की रोटी बंदरों को खिलाई जाएं। जिससे बंदरों खाने की व्यवस्था बनी रहे।