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कोरोना ने रोकी राह, अपनों से दूर हुए लाड़ले

Fri, 08 Jan 2021 11:35 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Jan 2021 11:35 PM IST
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Corona stopped the road, loved ones away from their loved ones
कनाडा में रहने वाले बिजनौर के कबीर सिंह ढिल्लो। - फोटो : BIJNOR
कोरोना ने रोकी राह, अपनों से दूर हुए लाड़ले
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बिजनौर। विदेशों में रह रहे जिले के युवक-युवतियां कोरोना के चलते इस बार त्योहारों पर भी घर नहीं आ सके। अपने परिजनों के हालचाल वीडियो कॉल के माध्यम से ही जान पाते हैं। कोरोना के चलते उनके परिजन चिंतित रहते हैं। वीडियो कॉल करके ही उन्हें संतोष करना पड़ता है।
विदेशों में रह रहे भारतीय अपने वतन की माटी से जुडे़ हैं। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते विदेशों में रहने वाले त्योहारों पर भी घर नहीं आ पाए हैं। जिले के कई युवक-युवतियां विदेशों में रह रहे हैं। कई युवा पढ़ाई करने के इरादे से विदेश में हैं तो कई विदेश में जॉब कर रहे हैं। गांव आलमपुर नीला निवासी सरदार उत्तम सिंह का बेटा विक्रम जीत सिंह कनाडा के एडमिंटन में ट्रांसपोर्ट का कारोबार करता है। उत्तम सिंह बताते हैं कि उसका कारोबार तो ठीक चल रहा है। लेकिन बेटा काफी समय से घर नहीं आया। बीच में कोरोना बीमारी के कारण भी घर आने में बाधा आई। व्हाट्सएप के माध्यम व वीडियो काल के द्वारा उत्तम से परिजनों की बात होती रहती है।
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आवास विकास कॉलोनी निवासी मास्टर हरवंत सिंह ढिल्लो की बेटी हरनूर कनाडा के नेल्सन सिटी से नर्सिंग का कोर्स कर रही है। एक साल पूर्व वह अपने घर चचेरी बहन की शादी में आई थी। पिता हरवंत सिंह ढिल्लो बताते हैं कि उनका बेटा कबीर सिंह ढिल्लो भी कनाडा के मांट्रीयाल में वेब डिजाइनिंग का कोर्स कर रहा है। कबीर मार्च 2020 में ही कनाडा गया था। दोनों बच्चों से वीडियो कॉल के माध्यम से ही बात होती है।
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गांव रसीदपुर गढ़ी निवासी शिक्षिका सुलक्षणा आर्य का पुत्र शास्वत कुमार स्वीटजर लैंड के क्वांटम में फिजिक्स विषय में पीएचडी कर रहा है। शिक्षिका सुलक्षणा आर्य बताती है कि त्योहार पर शास्वत को वीडियो कॉल के माध्यम से ही रस्म पूरी कराते हैं। गीता नगरी कॉलोनी निवासी स्वास्थ्य एवं सूचना अधिकारी चंद्रपाल सिंह ने बताया कि उनका पुत्र अंकुर चौधरी उर्फ शिवा खंडा 2008 से स्वीटजरलैंड के ज्यूरिक में रह रहा है। वह साल में लगभग दो बार जरूर घर आता है पर कोरोना के चलते इस बार घर नहीं आ पाया है। वहां पर वह योग की शिक्षा देता है। आए दिन उससे मोबाइल के माध्यम से ही बात की जाती है।

जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ मनोज सेन का बेटा ईशान सेन अमेरिका के सैनफांसिस्कों में एक्सपीरियंस डिजाइनर है। डॉ. सेन कहते हैं के कोरोना काल में आना जाना तो हो नहीं रहा बस वीडियो काल से बात हो जाती है। वे कहते हैं कि विज्ञान की ये देन बात करने का कारगर साधन बन गई है।

कनाड़ा में रहने वाली बिजनौर की हरनूर ढिल्लो।

कनाड़ा में रहने वाली बिजनौर की हरनूर ढिल्लो।- फोटो : BIJNOR

कनाड़ा में रहने वाले बिजनौर के विक्रमजीत सिंह।

कनाड़ा में रहने वाले बिजनौर के विक्रमजीत सिंह।- फोटो : BIJNOR

स्विट्जरलैंड में रहने वाले बिजनौर शाश्वत कुमार।

स्विट्जरलैंड में रहने वाले बिजनौर शाश्वत कुमार।- फोटो : BIJNOR

स्विट्जरलैंड में रहने वाले बिजनौर के अंकुर चौधरी उर्फ योगी शिवा खंडा।

स्विट्जरलैंड में रहने वाले बिजनौर के अंकुर चौधरी उर्फ योगी शिवा खंडा।- फोटो : BIJNOR

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