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धामपुर - पुरुषों से कम नहीं महिलाओं का योगदान : डॉ. निशा सिंह
Fri, 03 Feb 2023 09:21 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 03 Feb 2023 09:21 AM IST
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धामपुर एसबीडी कॉलेज में आयोजित सेमिनार में विचार रखती वक्ता
- एसबीडी कॉलेज में महिलाओं का साहित्यिक योगदान और उपलब्धियां विषय पर गोष्ठी
फोटो एक
संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। एसबीडी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की ओर से 75 वर्षों में महिलाओं का साहित्यिक योगदान और उपलब्धियां विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें डाॅ. निशा सिंह ने कहा कि आज बेटी बचाओ-ंबेटी पढ़ाओ के नारे लगते हैं, लेकिन आज महिला अपने पूरे सशक्त कदमों से खड़ी है। पुरुष विरोधी मानसिकता को आज स्त्री विमर्श का नाम दिया जाता है।
कॉलेज में बृहस्पतिवार से आयोजित हुई दो दिवसीय गोष्ठी के पहले दिन डाॅ. चारु अग्रवाल ने बाहर से आए अतिथियों का परिचय कराया। प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि प्राचीन भारतीय साहित्य में महिला व पुरुष दोनों ही साहित्य में रूचि रखते थे। अपाला वैदिक काल की विदुषी थीं। भक्तिकाल में अनेक कवयित्री भारत की सभी भाषाओं में हुई हैं। प्रो. मोनिका गुप्ता ने कहा कि जब हम महिला और महिला लेखन पर विचार करते हैं। तो महिलाओं की तुलना पुरुषों से की जाती है। उन्होंने भक्तिकाल से लेकर महिला लेखकों का परिचय दिया। स्त्री विमर्श आज का कोई नया विषय नहीं हैं। बल्कि यह विषय रामायण और महाभारत में भी वर्णित है।
प्रो. विकास शर्मा ने कहा कि आज महिला लेखिकाएं परंपरागत लेखन से हटकर लेखन कर रही हैं। वर्तमान में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है। जिसमें महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान न दे रही हों। सेमिनार में संकलित शोध पुस्तकों का अतिथियों ने विमोचन किया। कॉलेज की ओर से प्रबंधक विजय कुमार अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर छात्रा अजरा, तनिषा विष्ट, जिया सैनी, अंशिका वर्मा, निशा, दिपांशी अग्रवाल ने गीत पेश किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। एसबीडी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की ओर से 75 वर्षों में महिलाओं का साहित्यिक योगदान और उपलब्धियां विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें डाॅ. निशा सिंह ने कहा कि आज बेटी बचाओ-ंबेटी पढ़ाओ के नारे लगते हैं, लेकिन आज महिला अपने पूरे सशक्त कदमों से खड़ी है। पुरुष विरोधी मानसिकता को आज स्त्री विमर्श का नाम दिया जाता है।
कॉलेज में बृहस्पतिवार से आयोजित हुई दो दिवसीय गोष्ठी के पहले दिन डाॅ. चारु अग्रवाल ने बाहर से आए अतिथियों का परिचय कराया। प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि प्राचीन भारतीय साहित्य में महिला व पुरुष दोनों ही साहित्य में रूचि रखते थे। अपाला वैदिक काल की विदुषी थीं। भक्तिकाल में अनेक कवयित्री भारत की सभी भाषाओं में हुई हैं। प्रो. मोनिका गुप्ता ने कहा कि जब हम महिला और महिला लेखन पर विचार करते हैं। तो महिलाओं की तुलना पुरुषों से की जाती है। उन्होंने भक्तिकाल से लेकर महिला लेखकों का परिचय दिया। स्त्री विमर्श आज का कोई नया विषय नहीं हैं। बल्कि यह विषय रामायण और महाभारत में भी वर्णित है।
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प्रो. विकास शर्मा ने कहा कि आज महिला लेखिकाएं परंपरागत लेखन से हटकर लेखन कर रही हैं। वर्तमान में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है। जिसमें महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान न दे रही हों। सेमिनार में संकलित शोध पुस्तकों का अतिथियों ने विमोचन किया। कॉलेज की ओर से प्रबंधक विजय कुमार अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर छात्रा अजरा, तनिषा विष्ट, जिया सैनी, अंशिका वर्मा, निशा, दिपांशी अग्रवाल ने गीत पेश किया।
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