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आस्था का संगम : साथ चलेगी इबादत और आराधना

Sat, 02 Apr 2022 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 12:18 AM IST
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Confluence of faith: Worship and worship will go together
बिजनौर में नवरात्रों पर सजा मां काली माता का मंदिर। - फोटो : BIJNOR
आस्था का संगम : साथ चलेगी इबादत और आराधना
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बिजनौर। अबकी बार आस्था के संगम का अनूठा संयोग बन रहा है। जी हां, इबादत और आराधना एक साथ चलेगी। दरअसल, आज से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो जाएगी। वहीं, अगर चांद दिखा तो कल से माह ए रमजान भी शुरू हो जाएगा। मां के भक्त मंदिरों में पहुंच व्रत रखेंगे और मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखेंगे।
पंडित सोमदत्त शर्मा ने बताया कि आज नवरात्र पहले दिन कलश स्थापना और माता की चौकी लगाकर विधि विधान से पूजा अर्चना करने पर शुभ फल मिलते हैं। उन्होंने बताया कि कलश स्थापना का शुभ समय सुबह छह बजे से साढ़े आठ तक रहेगा। माता की चौकी के पास ही एक छोटी चौकी जमाकर उस पर अष्टदल कमल बनाएं, जिस पर कलश स्थापित करें। नव संवत्सर का राजा शनि है। अन्न आदि का उत्पादन मध्यम रहेगा। अति वर्षा, आंधी तूफान और भूकंप के यदा कदा योग बनेंगे। नेताओं में परस्पर वैमनस्य बढ़ेंगे। हालांकि गुरु बृहस्पति के पास मंत्री पद होने से राष्ट्र शक्तियों का उत्थान होगा।
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शनि व गुरु के राशि प्रभाव
पंडित सोमदत्त शर्मा के अनुसार शनि व गुरु के प्रभाव से मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, कुंभ तथा मीन राशि वालों के लिए नया वर्ष शुभ रहेगा। संवत 2079 में दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे। भारत में दो ग्रहण दिखाई देंगे। इनमें 25 अक्टूबर का खंड ग्रास सूर्यग्रहण तथा आठ नवंबर खग्रास चंद्रग्रहण भारत में दिखाई पड़ेगा।
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रमजान का पहला रोजा कल, तरावीह आज
गजरौला शिव/बिजनौर। पवित्र रमजान का चांद दो अप्रैल (आज) नजर आता है तो पहला रोजा तीन अप्रैल को होगा। चांद देखने के बाद उसी दिन ईशा की नमाज के बाद 20 रकअत तरावीह (विशेष नमाज) पढ़ने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। बिजनौर चाहशीरी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना वरीस अहमद बताते हैं कि रोजा व्यवहार, इंसाफ, इंसानियत व हमदर्दी की सीख देता है। अल्लाह ने रमजान का रोजा फर्ज किया है, ताकि उसके बंदे नेक बन जाएं। इस महीने में की जाने वाली हर इबादत का सवाब बढ़ा दिया जाता है। रमजान के महीने में रोजा छोड़ना गुनाह है। इस महीने के अंदर खासतौर से गरीबों, मिस्कीनों व बेसहारा लोगों का ख्याल रखना चाहिए। इसीलिए इसे गमख्वारी का महीना कहा जाता है। रोजा रखने के बाद अमीरों को इस बात का एहसास हो जाता है कि गरीब लोग भूखे-प्यासे रहकर कैसे अपना वक्त गुजारते हैं। रोजा सुबह से शाम तक सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि रोजा रखने के बाद किसी को सताना, धोखा देना, बेइज्जती करना, गीबत करना, किसी गलत चीज को देखना इन सब चीजों से बचना जरूरी है, तभी रोजा माना जाएगा।

सजाए गए मंदिर, बाजारों में उमड़ी भीड़
बिजनौर। जिलेभर में नवरात्र से एक दिन पहले मंदिरों को फूल मालाओं से सजा दिया गया। वहीं, बाजारों में भी पूजा का सामान खरीदने के लिए पूरे दिन भीड़ रही। जिससे बाजारों में रौनक लौट आई। सामान लेने के लिए दुकानों पर ग्राहकों की खूब भीड़ दिखाई दी। कोरोना के कारण करीब दो साल बाद मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने जा रही है। शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने पूजा पाठ की सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों का रुख किया। बिजनौर शहर के मां काली मंदिर को झालरों, चुनरी आदि से सजाया गया। मां चामुंडा मंदिर को भव्य तरीके से सजाने का कार्य पूरे दिन होता रहा।
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