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सीएमओ ने नियमों का कर दिया ‘पोस्टमार्टम’
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Tue, 22 Dec 2015 12:42 AM IST
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नजीबाबाद में सरकारी फरमानों को दरकिनार कर जिले के आला अधिकारी मनमानी करने में जुटे हैं। दरअसल सीएमओ ने जनपद के ग्रामीण अंचलों व कस्बों के उन नौ चिकित्सकों को पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी सौंप दी है, जो अभी अनट्रेंड हैं। सात चिकित्सक पांच वर्ष या उससे कम सेवाकाल होने के कारण पोस्टमार्टम करने की पात्रता भी नहीं रखते हैं।
जनपद के ग्रामीण अंचलों व कस्बों के अस्पतालों में तैनात चिकित्सक संसाधनों के अभाव में पहले ही परेशान हैं। अब उनकी तकलीफ सीएमओ ने और भी बढ़ा दी है। जिला चिकित्सालय बिजनौर पर स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर अब तक जिला चिकित्सालय पर तैनात चिकित्सक ही पोस्टमार्टम की ड्यूटी करते आए हैं। मगर अब व्यवस्था को बदला गया है। जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से नौ चिकित्सकों को माह में दो-दो दिन पोस्टमार्टम हाउस पर ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं।
पीएचसी नजीबाबाद से डॉ. गुरचरण, सीएचसी समीपुर से डॉ. शील, डॉ. इमरान हसन, सीएचसी कोतवाली से डॉ. ईश्वरानंद, सीएचसी किरतपुर से डॉ. सुमित राठी, सीएचसी नूरपुर से शक्तिनाथ, पीएचसी नगीना से डॉ.मानस चौहान, पीएचसी स्योहारा से डॉ.खालिद, पीएचसी शेरकोट से डॉ.पवन जायसी को पोस्टमार्टम हाउस बिजनौर से जोड़ा गया है। इनमेें डॉ. शील व डॉ. पवन जायसी सीनियर डॉक्टर हैं।
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शेष सात चिकित्सकों का सेवाकाल पांच वर्ष या उससे कम है। इन चिकित्सकों को हाल ही में पोस्टमार्टम का कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। सभी चिकित्सक मनमानी के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि उनके द्वारा अस्पतालों पर की जाने वाली ओपीडी, इमरजेंसी ड्यूटी एवं राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी को नजरअंदाज कर संसाधन उपलब्ध कराए बगैर ड्यूटी कराकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।
उधर, डॉ.शील गौतम, डॉ.गुरचरन, डॉ.इमरान हसन, डॉ.खालिद, डॉ.ईश्वरानंद ने पांच वर्ष से कम सेवाकाल होने के बावजूद पोस्टमार्टम हाउस पर ड्यूटी लगाने को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि हाल-फिलहाल में पोस्टमार्टम का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है।
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जनपद के ग्रामीण अंचलों व कस्बों के अस्पतालों में तैनात चिकित्सक संसाधनों के अभाव में पहले ही परेशान हैं। अब उनकी तकलीफ सीएमओ ने और भी बढ़ा दी है। जिला चिकित्सालय बिजनौर पर स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर अब तक जिला चिकित्सालय पर तैनात चिकित्सक ही पोस्टमार्टम की ड्यूटी करते आए हैं। मगर अब व्यवस्था को बदला गया है। जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से नौ चिकित्सकों को माह में दो-दो दिन पोस्टमार्टम हाउस पर ड्यूटी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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पीएचसी नजीबाबाद से डॉ. गुरचरण, सीएचसी समीपुर से डॉ. शील, डॉ. इमरान हसन, सीएचसी कोतवाली से डॉ. ईश्वरानंद, सीएचसी किरतपुर से डॉ. सुमित राठी, सीएचसी नूरपुर से शक्तिनाथ, पीएचसी नगीना से डॉ.मानस चौहान, पीएचसी स्योहारा से डॉ.खालिद, पीएचसी शेरकोट से डॉ.पवन जायसी को पोस्टमार्टम हाउस बिजनौर से जोड़ा गया है। इनमेें डॉ. शील व डॉ. पवन जायसी सीनियर डॉक्टर हैं।
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शेष सात चिकित्सकों का सेवाकाल पांच वर्ष या उससे कम है। इन चिकित्सकों को हाल ही में पोस्टमार्टम का कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। सभी चिकित्सक मनमानी के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि उनके द्वारा अस्पतालों पर की जाने वाली ओपीडी, इमरजेंसी ड्यूटी एवं राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी को नजरअंदाज कर संसाधन उपलब्ध कराए बगैर ड्यूटी कराकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।
उधर, डॉ.शील गौतम, डॉ.गुरचरन, डॉ.इमरान हसन, डॉ.खालिद, डॉ.ईश्वरानंद ने पांच वर्ष से कम सेवाकाल होने के बावजूद पोस्टमार्टम हाउस पर ड्यूटी लगाने को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि हाल-फिलहाल में पोस्टमार्टम का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है।