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पैमाड़ की फली ने ली जान
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Tue, 27 Oct 2015 11:48 PM IST
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बिजनौर। मासूमों की जान की दुश्मन बनी पैमाड़ की फली ने जिले में फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। खेल-खेल में कसौंदी की फली खाने से एक बालक की मौत हो गई।
क्षेत्र के गांव सेेवारामपुर निवासी फुरकान के पुत्र रियाज चार वर्ष ने सोमवार को खेल में कसौंदी की फली खा ली। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बिजनौर निजी चिकित्सक के यहां ले गए, वहां उपचार के दौरान सोमवार की रात उसकी मौत हो गई।
बालक की मौत से परिजनों में कोहराम है। इस वर्ष 15 अक्टूबर को हल्दौर क्षेत्र के गांव खासपुरा में आदेश कुमार की चार वर्षीय पुत्री प्रीति ने कसौंदी की फली खा ली थी।
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उपचार के दौरान उसकी 16 अक्टूबर को मौत हो गई थी। वहीं चांदपुर के मुहल्ला काजीजादगान निवासी पांच वर्षीय मुस्कान ने भी 21 अक्टूबर को कसौंदी की फली खा ली थी। डॉक्टरों ने उसे बचा लिया। इस वर्ष कसौंदी दो बच्चों की जान ले चुकी है।
आशाओं व एएनएम को गांवों में कसौंदी की फली के बारे में प्रसार-प्रसार कराने और जागरूक करने के निर्देश दिए गए थे। उन्हें पुन: इस संबंध में चेतावनी दी जाएगी। स्कूलों के आस-पास कसौंदी के पौधों को नष्ट कराया जाएगा तथा गांव के आस-पास कसौंदी के पौधे को नष्ट कराने में ग्राम प्रधानों का सहयोग लिया जाएगा। - सीएमओ डा. मनमोहन अग्रवाल
हर साल मासूमों की जान ले रही कसौंदी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कसौंदी के खिलाफ किए गए व्यापक प्रचार-प्रसार की पोल खुल गई है। बरसात का मौसम समाप्त होते ही विभाग को कसौंदी के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने व उसे नष्ट कराने के निर्देश है।
कसौंदी की फसली का सीजन शुरू होते ही दो बच्चे की मौत हो गई, जबकि तीसरे बच्चे की जान बमुश्किल बची। कसौंदी की फली को बच्चे खेल-खेल में खा जाते हैं।
बच्चों का यही खेल उनके लिए जानलेवा साबित हो जाता है। इसके लिए शासन स्वास्थ्य विभाग को कसौंदी के खिलाफ व्यापक प्रचार करने निर्देश दे रखे हैं।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में पंफ्लेट बंटवाकर, आशाओं व एएनएम के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के निर्देश हैं।
बरसात समाप्त होते ही अभियान चलवाकर स्कूलों के आसपास कसौंदी के पौधों को नष्ट कराने की जिम्मेदारी भी है, लेकिन विभाग अपनी जिम्मेदारियों पर खरा उतरता नजर नहीं आ रहा है।
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क्षेत्र के गांव सेेवारामपुर निवासी फुरकान के पुत्र रियाज चार वर्ष ने सोमवार को खेल में कसौंदी की फली खा ली। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बिजनौर निजी चिकित्सक के यहां ले गए, वहां उपचार के दौरान सोमवार की रात उसकी मौत हो गई।
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बालक की मौत से परिजनों में कोहराम है। इस वर्ष 15 अक्टूबर को हल्दौर क्षेत्र के गांव खासपुरा में आदेश कुमार की चार वर्षीय पुत्री प्रीति ने कसौंदी की फली खा ली थी।
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उपचार के दौरान उसकी 16 अक्टूबर को मौत हो गई थी। वहीं चांदपुर के मुहल्ला काजीजादगान निवासी पांच वर्षीय मुस्कान ने भी 21 अक्टूबर को कसौंदी की फली खा ली थी। डॉक्टरों ने उसे बचा लिया। इस वर्ष कसौंदी दो बच्चों की जान ले चुकी है।
आशाओं व एएनएम को गांवों में कसौंदी की फली के बारे में प्रसार-प्रसार कराने और जागरूक करने के निर्देश दिए गए थे। उन्हें पुन: इस संबंध में चेतावनी दी जाएगी। स्कूलों के आस-पास कसौंदी के पौधों को नष्ट कराया जाएगा तथा गांव के आस-पास कसौंदी के पौधे को नष्ट कराने में ग्राम प्रधानों का सहयोग लिया जाएगा। - सीएमओ डा. मनमोहन अग्रवाल
हर साल मासूमों की जान ले रही कसौंदी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कसौंदी के खिलाफ किए गए व्यापक प्रचार-प्रसार की पोल खुल गई है। बरसात का मौसम समाप्त होते ही विभाग को कसौंदी के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने व उसे नष्ट कराने के निर्देश है।
कसौंदी की फसली का सीजन शुरू होते ही दो बच्चे की मौत हो गई, जबकि तीसरे बच्चे की जान बमुश्किल बची। कसौंदी की फली को बच्चे खेल-खेल में खा जाते हैं।
बच्चों का यही खेल उनके लिए जानलेवा साबित हो जाता है। इसके लिए शासन स्वास्थ्य विभाग को कसौंदी के खिलाफ व्यापक प्रचार करने निर्देश दे रखे हैं।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में पंफ्लेट बंटवाकर, आशाओं व एएनएम के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के निर्देश हैं।
बरसात समाप्त होते ही अभियान चलवाकर स्कूलों के आसपास कसौंदी के पौधों को नष्ट कराने की जिम्मेदारी भी है, लेकिन विभाग अपनी जिम्मेदारियों पर खरा उतरता नजर नहीं आ रहा है।