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चाइनीज मांझा गुरगल को कर रहा है विकलांग
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चाइनीज मांझा गुरगल को कर रहा है विकलांग
बिजनौर। भारत में सभी प्रजाति की चिड़ियों की संख्या घट रही है लेकिन इस समय सबसे ज्यादा संकट में घर के आसपास कूड़े के ढेर के नजदीक रहने वाली गुरगल है। चाइनीज मांझा आज इसे अपाहिज कर रहा है। कूड़े में खाने की तलाश में इस चिड़िया चाइनीज मांझे व अन्य धागों के पंजों से लिपटने से पंजों से हाथ धो रही है। चाइनीज मांझा तो गुरगल के पंजों को काटकर अलग कर देता है।
बिजनौर में गुरगल कहलाने वाली चिड़िया को मेरठ के आसपास इसे गुरसल कहते हैं। अंग्रेजी में बैंक मैना के नाम से नाम से मशहूर है। आंखों की खूबसूरती के कारण इसे खंजन भी कहा जाता है। ये चिड़िया आम तौर पर समूह में रहती है। कूड़े के आसपास घूमने वाली गुरगल कीड़े मकौड़े खाकर पेट भरती है। बिजनौर में प्राय: कम पतंगबाजी होती है किंतु लॉकडाउन में शहरों में जमकर पतंगबाजी हुई, जिसमें लोगों ने चाइनीज मांझे का जमकर प्रयोग किया। चाइनीज मांझा बहुत मजबूत होता है। यह सरलता से टूटता-कटता नहीं। इससे वाहन चालक तो घायल हो ही रहे हैं, गुरगल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। कटी पतंग और गुड़डे लड़ाने के बाद इस चाइनीज मांझे के टुकड़े कूड़े में डाल दिए जाते हैं। भोजन की तलाश में कूड़े के आसपास पहुंचने पर गुरगल की टांग में मांझा फंस जाता है। जोर लगाते पर इसकी पकड़ और कसती जाती है। धीरे-धीरे टांग बेकार हो जाती है। मांझा फंसी टांग वाली गुरगल किसी कांटेदार तार पर बैठी और मांझे का कोई सिरा तार में फंस गया तो फिर टांग कटती ही है।
मोहल्ला अचारजान में पुराने शिव मंदिर के पास 10- 2 गुरगल का एक झुंड है। इसमें एक की दोनों टांग खराब हैं। एक की एक टांग खराब है। एक की एक टांग घुटने के ऊपर से कटी है। मोहल्ले वाले इनके विकलांग होने का कारण कूड़े के ढेर और उसके आसपास के चाइनीज मांझे को देते हैं। राम के चौराहे के पास रहने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता नीरज विश्नोई कहते हैं कि हमारे चौराहे पर काफी गुरगल आती हैं। उन्हें भी चाइनीज मांझे में फंसी एक गुरगल हाल में दिखी थी। उन्होंने टांग से मांझा निकालने के लिए उसे पकड़ना चाहा लेकिन वह पकड़ में नहीं आई और उड़ गई।
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नमकीन भुजिया ज्यादा पसंद
ग़ुरगल को नमकीन भुजिया पसंद होती है। यह इसे बहुत चाव से खाता है। पक्षी प्रेमी जगह -जगह भुजिया डालते हैं तो तुरंत ही वहां गुरगल के झुंड आ जाते हैं। इनमें भी एक दो दादा होता है। वह दूसरों को नहीं खाने देता। उनपर हमला करता है।
चाइनीज मांझा पांव काट देता हैं
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक चाइनीज मांझा गुरगल का पैर काट देता है। इसके अलावा अन्य धागे भी उसके पंजे से लिपटकर उसे खराब कर देते हैं। यह सभी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे कूड़े में चाइजनीज मांझा व अन्य धागे न डालें।
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बिजनौर। भारत में सभी प्रजाति की चिड़ियों की संख्या घट रही है लेकिन इस समय सबसे ज्यादा संकट में घर के आसपास कूड़े के ढेर के नजदीक रहने वाली गुरगल है। चाइनीज मांझा आज इसे अपाहिज कर रहा है। कूड़े में खाने की तलाश में इस चिड़िया चाइनीज मांझे व अन्य धागों के पंजों से लिपटने से पंजों से हाथ धो रही है। चाइनीज मांझा तो गुरगल के पंजों को काटकर अलग कर देता है।
बिजनौर में गुरगल कहलाने वाली चिड़िया को मेरठ के आसपास इसे गुरसल कहते हैं। अंग्रेजी में बैंक मैना के नाम से नाम से मशहूर है। आंखों की खूबसूरती के कारण इसे खंजन भी कहा जाता है। ये चिड़िया आम तौर पर समूह में रहती है। कूड़े के आसपास घूमने वाली गुरगल कीड़े मकौड़े खाकर पेट भरती है। बिजनौर में प्राय: कम पतंगबाजी होती है किंतु लॉकडाउन में शहरों में जमकर पतंगबाजी हुई, जिसमें लोगों ने चाइनीज मांझे का जमकर प्रयोग किया। चाइनीज मांझा बहुत मजबूत होता है। यह सरलता से टूटता-कटता नहीं। इससे वाहन चालक तो घायल हो ही रहे हैं, गुरगल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। कटी पतंग और गुड़डे लड़ाने के बाद इस चाइनीज मांझे के टुकड़े कूड़े में डाल दिए जाते हैं। भोजन की तलाश में कूड़े के आसपास पहुंचने पर गुरगल की टांग में मांझा फंस जाता है। जोर लगाते पर इसकी पकड़ और कसती जाती है। धीरे-धीरे टांग बेकार हो जाती है। मांझा फंसी टांग वाली गुरगल किसी कांटेदार तार पर बैठी और मांझे का कोई सिरा तार में फंस गया तो फिर टांग कटती ही है।
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मोहल्ला अचारजान में पुराने शिव मंदिर के पास 10- 2 गुरगल का एक झुंड है। इसमें एक की दोनों टांग खराब हैं। एक की एक टांग खराब है। एक की एक टांग घुटने के ऊपर से कटी है। मोहल्ले वाले इनके विकलांग होने का कारण कूड़े के ढेर और उसके आसपास के चाइनीज मांझे को देते हैं। राम के चौराहे के पास रहने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता नीरज विश्नोई कहते हैं कि हमारे चौराहे पर काफी गुरगल आती हैं। उन्हें भी चाइनीज मांझे में फंसी एक गुरगल हाल में दिखी थी। उन्होंने टांग से मांझा निकालने के लिए उसे पकड़ना चाहा लेकिन वह पकड़ में नहीं आई और उड़ गई।
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नमकीन भुजिया ज्यादा पसंद
ग़ुरगल को नमकीन भुजिया पसंद होती है। यह इसे बहुत चाव से खाता है। पक्षी प्रेमी जगह -जगह भुजिया डालते हैं तो तुरंत ही वहां गुरगल के झुंड आ जाते हैं। इनमें भी एक दो दादा होता है। वह दूसरों को नहीं खाने देता। उनपर हमला करता है।
चाइनीज मांझा पांव काट देता हैं
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक चाइनीज मांझा गुरगल का पैर काट देता है। इसके अलावा अन्य धागे भी उसके पंजे से लिपटकर उसे खराब कर देते हैं। यह सभी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे कूड़े में चाइजनीज मांझा व अन्य धागे न डालें।