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स्मृति वन में जीवंत होंगे अभिज्ञान शाकुंतलम के पात्र

Fri, 09 Jul 2021 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jul 2021 11:24 PM IST
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Characters of Abhigyan Shakuntalam will come alive in Smriti Van
स्मृति वन में जीवंत होंगे अभिज्ञान शाकुंतलम के पात्र
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बिजनौर। मालन और गंगा के मिलन के पास महाकवि कालीदास की अभिज्ञान शाकुंतलम के पात्रों को फिर से जीवंत किया जाएगा। इसके लिए वहां हो रहे पौधरोपण को राजा दुष्यंत, चकवर्ती सम्राट भरत, शकुंतला, कण्व ऋषि के स्मृृति वन तैयार होंगे। वहीं, इस जमीन पर बाढ़ का पानी रोकने के लिए जनसयोग से शीघ्र ही तटबंध बनाने की तैयारी की जा रही है। जनसहयोग का एक मकसद इस पौराणिक भूमि से जिले के लोगों को जोड़ना है।
महाकवि कालीदास की महान रचना अभिज्ञान शाकुंतलम में राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रणय स्थली गंगा और मालन के मिलन पर ही बताई गई है। यह मिलन बिजनौर के रावली क्षेत्र में ही है। जहां मालन नदी गंगा में गिर रही है। वर्तमान की बात करें तो कण्व ऋषि के नाम से मालन किनारे करीब 60 बीघा जमीन भी है, लेकिन तत्कालीन नेताओं और अफसरों की उदासीनता के चलते यह क्षेत्र अपनी पहचान ही खो चुका था। अब वर्तमान प्रशासनिक अधिकारियों ने इस क्षेत्र में पहचान दिलाने के साथ-साथ यहां पर्यटन की संभावनाएं भी तलाशनी शुरू कर दी हैं।
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मालन और गंगा की ओर से इस जमीन पर बरसात में बाढ़ का पानी भर जाता है। ऐसे में यहां पर्यटन के लिहाज से क्षेत्र को विकसित करना मुश्किल है। कुछ दिन पहले यहां निरीक्षण के दौरान तटबंध की आवश्यकता देखी गई, लेकिन सरकारी प्रोजेक्ट में इसमें काफी समय लग सकता है। इसे शीघ्र पूरा करने के लिए अधिकारी इसमें जनसहयोग लेने की तैयारी कर रहे हैं। इससे लोग यहां की पौराणिकता को नजदीक से जान सकेंगे। वहीं, इस क्षेत्र को आने वाली बरसात से पहले ही बाढ़ में डूबने से बचाया जा सकेगा।
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जिन पात्रों को अभी तक हम महाकवि कालीदास की अभिज्ञान शाकुंतलम या अन्य किताबों में पढ़ते आ रहे हैं, उन्हें अब जीवंत किया जाएगा। राजा दुष्यंत, शकुंतला, चक्रवर्ती सम्राट भरत, कण्व ऋषि सभी की स्मृतियां यहां पर लगाई जाएगी। सभी को एक कहानी के रूप में क्रमवार लगाया जाएगा। यहां पौधरोपण चल रहा है और आने वाले समय में और भी पौधे लगाए जाने हैं। जहां शकुंतला की याद में सरोवर बनेगा, वहीं जंगल में शेर के दांत गिनते बाल भरत भी पर्यटक देख सकेंगे।

हमने कण्व ऋषि आश्रम की जमीन का निरीक्षण किया था। यह पौराणिक दृष्टि से पवित्र भूमि है और यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां तटबंध की आवश्यकता है, जिसे बनवाने के लिए तैयारी की जा रही है। इसमें यहां के स्थानीय और जिले के दूसरे लोगों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि सभी इस पौराणिक भूमि से जुड़ाव महसूस करें। इसकी पूरी रूप रेखा तैयार की जा रही है - उमेश मिश्रा, डीएम
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