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Bijnor News: खोदाई में निकली मूर्ति तो अनवरपुर के साथ जुड़ गया चंडिका

Tue, 30 Sep 2025 12:22 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Tue, 30 Sep 2025 12:22 AM IST
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Chandika became associated with Anwarpur when an idol was found during excavation.
कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद
कादराबाद। गांव अनवरपुर में खोदाई के दौरान चंडी देवी की मूर्ति मिली तो इसका गांव का नाम अनवरपुर चंडिका पड़ गया। यहां पर करीब 200 साल पहले बनाया गया मंदिर आज श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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गांव कादराबाद से करीब पांच किलोमीटर दूर ग्राम अनवरपुर चंडिका स्थित है। गांव के प्रारंभ में ही माता चंडिका देवी का मंदिर है। यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगता है। ग्रामीण बुजुर्ग रमेश सिंह की माने तो इस स्थान पर दूर तक जंगल हुआ करता था। एक ऊंचे टीले को समतल करने का प्रयास करते समय यंहा चंडी देवी की मूर्ति व बड़ी शिला निकली और खोदाई के दौरान पत्थरों पर गुदी अन्य मूर्तियां भी निकलीं। गांव के प्रधान रह चुके रामनाथ सिंह ने बताया कि मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है।
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करीब 400 साल पूर्व खोदाई में निकली चंडी देवी की मूर्ति एवं शिला के संबंध में बुजुर्गों का कहना है कि रामायण काल में भगवान राम व लक्ष्मण को हरकर रावण का भाई अहिरावण ले गया था। जो एक देवी मठ में छिपकर पूजा के बाद राम-लक्ष्मण की बलि देने की तैयारी कर रहा था। इसी समय हनुमान जी ने वहां पहुंचकर अहिरावण को मार डाला और मठ को तोड़कर शिलाओं को इधर-उधर फेंक दिया। जिन स्थानों पर मठ की शिला गिरी कालांतर में वहां देवी मंदिर बनाए गए। इसमें एक उत्तराखंड देव नगरी हरिद्वार में गिरी जहां आज चंडी देवी का मंदिर है। दूसरी उत्तराखंड के काशीपुर में, जहां विशाल चेती मेला लगता है तथा देवी का मठ स्थित है।
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एक शिला बिजनौर के अफजलगढ़ ब्लॉक के अनवरपुर में गिरी जो खोदाई में भूमि से निकली और गांव का नाम अनवरपुर से अनवरपुर चंडिका पड़ गया। गांव निवासी नरेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 200 वर्ष पूर्व एक बैल यहां स्थित कुएं में गिर गया था। इस पर ताजपुर रियासत के कुंवर ने देवी से मन्नत मांगी कि बैल के सलामत बाहर निकलने पर वह देवी के मंदिर का निर्माण कराएंगे। मन्नत पूर्ण हुई तो यहां छत्र चढ़ाकर मंदिर का निर्माण कराया गया। ध्यान सिंह ने बताया की भादो माह की दोयज को देवी की विशेष पूजा होती है।



खोदाई में मिले थे पशुपति नाथ का चित्र बने सिक्के
इस स्थान की खोदाई के दौरान यहां पशुपति नाथ का चित्र बने सिक्के मिले थे। यह पता नहीं लग पाया कि ये किस धातु से बने थे। बताया जाता है कि ये सिक्के आज भी बुजुर्गों के पास धरोहर हैं। मंदिर के सेवक महाराज मोहन लाल के अनुसार करीब एक वर्ष से मंदिर के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है।

कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद

कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद

कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद

कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद

कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद

कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद

कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद

कादराबाद के गांव अनवरपुर चंडिका में स्थापित मूर्ति। संवाद

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