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Ram Mandir Ayodhya: राम मंदिर के लिए त्याग का अभिप्राय बन गए चंपत राय, कहे जाते हैं रामलला के पटवारी

Mon, 08 Jan 2024 01:21 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Mon, 08 Jan 2024 01:21 PM IST
सार

Ram Mandir Ayodhya : बिजनौर के नगीना निवासी चंपत राय ने 43 साल पहले राम मंदिर की खातिर अपना घर-परिवार छोड़ दिया था। उन्होंने सरकारी नौकरी से भी इस्तीफा दे दिया था। अब चपंत राय अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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Ram Mandir Ayodhya News: Champat Rai became the symbol of sacrifice for Ram temple.
नगीना के चंपत राय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लगभग पांच सौ साल के दौरान अनगिनत सनातन मनीषियों की त्याग और तपस्या का परिणाम है कि आज भव्य राम मंदिर साकार रूप ले चुका है। अब प्राण प्रतिष्ठा होना शेष है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गर्व की बात यह है कि राम मंदिर निर्माण की श्रंखला में नगीना निवासी चंपत राय का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा है।

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सर्वविदित है कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक मुकदमे की विजय और फिर राममंदिर निर्माण में चंपत राय बंसल भी प्रमुख पात्र रहे हैं। वह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव भी हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन की खातिर 43 साल पहले घर-परिवार और सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी। नगीना के लोग 22 जनवरी के कार्यक्रम को टीवी पर लाइव देखने के लिए बहुत उल्लासित हैं।
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अयोध्या में ही है प्रवास
सुप्रीम कोर्ट से राम लला (श्री रामजन्म भूमि) के पक्ष में निर्णय आने के बाद से ही चंपत राय अयोध्या में प्रवास कर रहे हैं। भव्य मंदिर के नक्शे को अंतिम रूप देने, श्री राम मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि निर्धारण कराने से लेकर हजारों अतिविशिष्ट अतिथियों को 22 जनवरी के लिए आमंत्रित करने में व्यस्त हैं।

विरासत में मिले संघ के संस्कार
विहिप नेता चंपत राय का जन्म 18 नवम्बर 1946 को नगीना के मोहल्ला सरायमीर निवासी रामेश्वर प्रसाद व सावित्री देवी के साधारण परिवार में हुआ था। चंपत राय परिवार के 10 भाई-बहनों में दूसरे नंबर के हैं। उनके नगीना स्थित पैतृक आवास पर उनके छोटे भाई बर्तन व्यापारी सुनील बंसल अपने परिवार के साथ रहते हैं। पिता रामेश्वर प्रसाद बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। इसलिए चंपत राय को संघ की शाखा में जाने की प्रेरणा अपने पिता से ही मिली थी।

उनकी प्राथमिक शिक्षा नगीना की प्राथमिक पाठशाला से हुई। हिंदू इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। वर्ष 1967 में मेरठ कॉलेज, मेरठ से बीएससी और 1969 में एमएससी वर्धमान कॉलेज, बिजनौर से करने के बाद 1970-71 में रोहतक के एक डिग्री कॉलेज में पढ़ाया। 1972 में आरएसएम कॉलेज, धामपुर में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता बन गए। वर्ष 1980-81 में उन्होंने प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति समर्पित करते हुए प्रचारक जीवन जीने का व्रत लिया।

आपातकाल में जाना पड़ा था जेल
1975 में आपातकाल के दौरान चंपत राय आरएसएम कॉलेज, धामपुर में प्रवक्ता थे। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने कॉलेज पहुंची। चंपत राय को प्राचार्य के कक्ष में बुलाया गया। वहां उन्होंने पुलिस से कहा कि घर से वे कपड़े लेकर पुलिस कोतवाली में पहुंच रहे हैं। घर से विदाई लेते समय माता-पिता ने उनका तिलक किया और कोतवाली तक साथ गए। चंपत राय करीब 18 महीने जेल में रहे।

1991 में चले गए थे अयोध्या
वर्ष 1980-81 में चंपत राय जिला देहरादून, सहारनपुर में प्रचारक रहे। 1985 में मेरठ के विभाग प्रचारक रहे। वर्ष 1986 में संघ के शीर्ष नेतृत्व ने विश्व हिंदू परिषद का प्रांत संगठन मंत्री बनाया। इसके बाद 1991 में क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया। 1996 में विहिप के केंद्रीय मंत्री बने। वर्ष 2002 में संयुक्त महामंत्री और फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए।

चंपत राय को बोला जाता है रामलला का पटवारी
चंपत राय का कक्ष श्री रामजन्मभूमि केस की फाइलों और साक्ष्यों से पटा पड़ा है। दशकों से उनका हर पल मुकदमे की कारगुजारी में गुजरा। अर्थात वकीलों को साक्ष्य उपलब्ध कराना, सुबह सुप्रीम कोर्ट जाना और सुनवाई के दौरान धैर्यपूर्वक बैठे रहना उनका नियमित काम रहा। यही वजह है कि प्यार से लोग उन्हें रामलला का पटवारी पुकारते हैं।

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