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Bijnor News: हौंसले के चप्पू से पानी की लहरों पर पकड़ी रफ्तार, पिछड़ गई दिव्यांगता
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-आत्मबल के आगे हारी दिव्यांगता, कयाकिंग कैनोइंग सीख रहा सोनू
-सिलाई का काम छोड़ कयाकिंग कैनोइंग खेल भी तरफ बढ़ा रुझान
अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। आत्मबल के आगे बड़ी से बड़ी परेशानी कुछ नहीं है। इसका सबूत अम्हेड़ा का सोनू है। एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद भी सोनू कयाकिंग कैनोइंग खेल में अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहा है। तैरना नहीं आता है, फिर भी वह कयाकिंग कैनोइंग का प्रशिक्षण ले रहा है।
अम्हेड़ा निवासी सोनू कुमार सिंह (18) पुत्र ऋषिपाल सिंह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। कक्षा सात पढ़ाई की। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। उसके पिता मजदूरी का काम करते हैं। सोनू पैर से दिव्यांग है। दिव्यांग होने के बावजूद भी उसके हौसले बुलंद हैं।
सोनू ने कहा वह सिलाई का काम करता था। मगर, कोच फिरोज खान के समझाने के बाद उसने कयाकिंग कैनोइंग खेल की तरफ अपना रुख कर लिया। पिछले डेढ़ माह से वह रोजाना कयाकिंग कैनोइंग का प्रशिक्षण ले रहा है। उसके तीन भाई और एक बहन हैं। दो भाई और बहन की शादी हो गई है। सोनू का कहना है कि मेहनत करेंगे, तभी तो कुछ सीखेंगे। बिना मेहनत कुछ हासिल नहीं होता है।
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दिन में साढ़े छह घंटे कयाकिंग कैनोइंग की तैयारी
सोनू ने बताया कि वह दिन में करीब साढ़े छह घंटे कयाकिंग कैनोइंग का प्रशिक्षण ले रहा है। कोच फिरोज सुबह पांच बजे से नौ बजे तक प्रशिक्षण देते हैं। इसके बाद शाम को साढ़े तीन बजे से छह बजे तक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण ले रहा है। वह सुबह और शाम दोनों समय प्रशिक्षण ले रहा है। तैराकी तो सीख ही रहा है। साथ ही कयाकिंग कैनाइंग नाव में बैठकर संतुलन बनाने की भी कोशिश कर रहा है।
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अम्हेड़ा में है पश्चिमी यूपी का पहला कयाकिंग कैनोइंग प्रशिक्षण केंद्र-
बिजनौर के अम्हेड़ा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला कयाकिंग कैनोइंग प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। यहां कोच भी तैनात है। कयाकिंग कैनाेइंग प्रशिक्षण केंद्र में इस समय करीब 40 खिलाड़ी तैयारी कर रहे हैं। कोच खिलाड़ियों को सुबह-शाम कयाकिंग कैनाेइंग खेल की तैयारी करा रहे हैं।
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सोनू में कयाकिंग कैनोइंग खेल सीखने की लगन : फिरोज खान
कयाकिंग कैनोइंग के प्रशिक्षक फिरोज खान ने बताया कि दिव्यांग होने के बावूजद भी साेनू कयाकिंग कैनोइंग खेल की तैयारी कर रहा है। सभी खिलाड़ियों को सोनू को देखकर खेल के प्रति जागरूक होना चाहिए। पैरा खिलाड़ी होने की वजह से आगे खेल में अपार संभावनाएं हैं।
भारत सरकार की ओर से खेल नीति में सुधार करते हुए पैरा खेलों को भी बराबर की मान्यता प्रदान की गई है। जिले में कयाकिंग कैनोइंग का पश्चिमी यूपी का पहला प्रशिक्षण केंद्र है। इस खेल की तरफ खिलाड़ियों का रुझान है। यह गर्व का विषय है कि इस कठिन खेल में एक दिव्यांग ने आगे बढ़ने की जिज्ञासा है। ....जयवीर सिंह, जिला क्रीड़ाधिकारी, बिजनौर
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-सिलाई का काम छोड़ कयाकिंग कैनोइंग खेल भी तरफ बढ़ा रुझान
अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। आत्मबल के आगे बड़ी से बड़ी परेशानी कुछ नहीं है। इसका सबूत अम्हेड़ा का सोनू है। एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद भी सोनू कयाकिंग कैनोइंग खेल में अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहा है। तैरना नहीं आता है, फिर भी वह कयाकिंग कैनोइंग का प्रशिक्षण ले रहा है।
अम्हेड़ा निवासी सोनू कुमार सिंह (18) पुत्र ऋषिपाल सिंह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। कक्षा सात पढ़ाई की। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। उसके पिता मजदूरी का काम करते हैं। सोनू पैर से दिव्यांग है। दिव्यांग होने के बावजूद भी उसके हौसले बुलंद हैं।
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सोनू ने कहा वह सिलाई का काम करता था। मगर, कोच फिरोज खान के समझाने के बाद उसने कयाकिंग कैनोइंग खेल की तरफ अपना रुख कर लिया। पिछले डेढ़ माह से वह रोजाना कयाकिंग कैनोइंग का प्रशिक्षण ले रहा है। उसके तीन भाई और एक बहन हैं। दो भाई और बहन की शादी हो गई है। सोनू का कहना है कि मेहनत करेंगे, तभी तो कुछ सीखेंगे। बिना मेहनत कुछ हासिल नहीं होता है।
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दिन में साढ़े छह घंटे कयाकिंग कैनोइंग की तैयारी
सोनू ने बताया कि वह दिन में करीब साढ़े छह घंटे कयाकिंग कैनोइंग का प्रशिक्षण ले रहा है। कोच फिरोज सुबह पांच बजे से नौ बजे तक प्रशिक्षण देते हैं। इसके बाद शाम को साढ़े तीन बजे से छह बजे तक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण ले रहा है। वह सुबह और शाम दोनों समय प्रशिक्षण ले रहा है। तैराकी तो सीख ही रहा है। साथ ही कयाकिंग कैनाइंग नाव में बैठकर संतुलन बनाने की भी कोशिश कर रहा है।
अम्हेड़ा में है पश्चिमी यूपी का पहला कयाकिंग कैनोइंग प्रशिक्षण केंद्र-
बिजनौर के अम्हेड़ा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला कयाकिंग कैनोइंग प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। यहां कोच भी तैनात है। कयाकिंग कैनाेइंग प्रशिक्षण केंद्र में इस समय करीब 40 खिलाड़ी तैयारी कर रहे हैं। कोच खिलाड़ियों को सुबह-शाम कयाकिंग कैनाेइंग खेल की तैयारी करा रहे हैं।
सोनू में कयाकिंग कैनोइंग खेल सीखने की लगन : फिरोज खान
कयाकिंग कैनोइंग के प्रशिक्षक फिरोज खान ने बताया कि दिव्यांग होने के बावूजद भी साेनू कयाकिंग कैनोइंग खेल की तैयारी कर रहा है। सभी खिलाड़ियों को सोनू को देखकर खेल के प्रति जागरूक होना चाहिए। पैरा खिलाड़ी होने की वजह से आगे खेल में अपार संभावनाएं हैं।
भारत सरकार की ओर से खेल नीति में सुधार करते हुए पैरा खेलों को भी बराबर की मान्यता प्रदान की गई है। जिले में कयाकिंग कैनोइंग का पश्चिमी यूपी का पहला प्रशिक्षण केंद्र है। इस खेल की तरफ खिलाड़ियों का रुझान है। यह गर्व का विषय है कि इस कठिन खेल में एक दिव्यांग ने आगे बढ़ने की जिज्ञासा है। ....जयवीर सिंह, जिला क्रीड़ाधिकारी, बिजनौर