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कैंडल मार्च निकाल शहीदों को याद किया
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बिजनौर में कैंडल मार्च निकालते युवा किसान।
- फोटो : BIJNOR
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कैंडल मार्च निकाल शहीदों को याद किया
बिजनौर। देश के लिए जान कुर्बान करने वाले अर्द्धसैनिक बल के जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए अटेवा के बैनर तले कैंडल मार्च निकाला गया। साथ ही केंद्र सरकार से और पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की गई। कर्मचारियों ने बाकी हमलों में शहीद हुए अर्द्धसैनिक बल के जवानों को शहीद का दर्जा देने की भी मांग उठाई।
अटेवा की ओर से पुराना महिला अस्पताल स्थित कार्यालय पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। प्रदेश मंत्री श्रवण कुशवाहा ने कहा कि अर्द्धसैनिक बल अपनी जान जोखिम में डालकर कठिन सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वे उपेक्षा के शिकार हैं। सरकार उन्हें शहीद कहती है किंतु शहीद का कानूनी दर्जा नहीं देती। यह दुखद है कि संसद और सांसदों की सुरक्षा करते हुए जिन अर्द्धसैनिक बलों ने अपनी शहादत दे दी, उसी संसद ने कानून बनाकर उनकी पेंशन छीन ली। प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रहास सिंह ने कहा कि पुरानी पेंशन से ही सैनिकों व कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित है। उत्तर प्रदेश कर्मचारी महासंघ जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि सरकार को एनपीएस व्यवस्था को बंद कर पुरानी पेंशन बहाल करनी होगी। जिलाध्यक्ष योगेश यादव, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजेश कुमार रवि ने कहा पुरानी पेंशन राष्ट्र एवं सैनिकों व कार्मिकों की हितकारी है, जिसे सरकार को बहाल करना होगा। कैंडल व शांति मार्च शहर भर की सड़कों से होकर शहीद स्तंभ के पास जाकर संपन्न हुआ। संयुक्त राज्य कर्मचारी परिषद जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह, अधीनस्थ कृषि सेवा संघ प्रांतीय संरक्षक योगेंद्र पाल सिंह योगी, प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष सुधाकर, मंत्री जेपी गहलोत, कलक्ट्रेट संघ की कामिनी दिवाकर, जिला मंत्री बीना रानी आदि मौजूद रहे। अटेवा जिलाध्यक्ष रजनीश कुमार, करतार सिंह के नेतृत्व में मार्च निकाला गया।
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बिजनौर। देश के लिए जान कुर्बान करने वाले अर्द्धसैनिक बल के जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए अटेवा के बैनर तले कैंडल मार्च निकाला गया। साथ ही केंद्र सरकार से और पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की गई। कर्मचारियों ने बाकी हमलों में शहीद हुए अर्द्धसैनिक बल के जवानों को शहीद का दर्जा देने की भी मांग उठाई।
अटेवा की ओर से पुराना महिला अस्पताल स्थित कार्यालय पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। प्रदेश मंत्री श्रवण कुशवाहा ने कहा कि अर्द्धसैनिक बल अपनी जान जोखिम में डालकर कठिन सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वे उपेक्षा के शिकार हैं। सरकार उन्हें शहीद कहती है किंतु शहीद का कानूनी दर्जा नहीं देती। यह दुखद है कि संसद और सांसदों की सुरक्षा करते हुए जिन अर्द्धसैनिक बलों ने अपनी शहादत दे दी, उसी संसद ने कानून बनाकर उनकी पेंशन छीन ली। प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रहास सिंह ने कहा कि पुरानी पेंशन से ही सैनिकों व कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित है। उत्तर प्रदेश कर्मचारी महासंघ जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि सरकार को एनपीएस व्यवस्था को बंद कर पुरानी पेंशन बहाल करनी होगी। जिलाध्यक्ष योगेश यादव, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजेश कुमार रवि ने कहा पुरानी पेंशन राष्ट्र एवं सैनिकों व कार्मिकों की हितकारी है, जिसे सरकार को बहाल करना होगा। कैंडल व शांति मार्च शहर भर की सड़कों से होकर शहीद स्तंभ के पास जाकर संपन्न हुआ। संयुक्त राज्य कर्मचारी परिषद जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह, अधीनस्थ कृषि सेवा संघ प्रांतीय संरक्षक योगेंद्र पाल सिंह योगी, प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष सुधाकर, मंत्री जेपी गहलोत, कलक्ट्रेट संघ की कामिनी दिवाकर, जिला मंत्री बीना रानी आदि मौजूद रहे। अटेवा जिलाध्यक्ष रजनीश कुमार, करतार सिंह के नेतृत्व में मार्च निकाला गया।
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