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चार साल से कंपोनेंट मशीन की बाट जोह रहा ब्लड बैंक
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चार साल से कंपोनेंट मशीन की बाट जोह रहा ब्लड बैंक
बिजनौर। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट के लिए चार साल पहले कक्ष तो बनाकर तैयार कर दिया गया, लेकिन अभी तक ब्लड कंपोनेंट मशीन न मिलने से यह प्रयोगहीन है। इस कारण जनपद में एक रक्तदान, बचाए चार जान का नारा फलीभूत नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जरूरतमंद लोगों को पूरी यूनिट ब्लड ही दिया जाता है, जिससे तीन अन्य लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ब्लड कंपोनेंट मशीन से रक्त को लाल रक्त कणिकाएं, श्वेत रक्त कणिकाएं, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स को अलग करने का काम किया जाता है। ब्लड कंपोनेंट मशीन मिलने से जरूरत पड़ने पर ब्लड का संबंधित भाग मरीज को आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है और उसके तीन हिस्सों का सदुपयोग हो सकता है। जिला ब्लड बैंक अधिकारी डा. संजय कुमार शंकर ने बताया कि शासन ने करीब दो साल पहले प्रदेश के 14 जिलों को ब्लड कंपोनेंट मशीन देने की घोषणा की थी। इससे पूर्व कंपोनेंट मशीन स्थापित करने के लिए ब्लड बैंक में ही कक्ष बनाकर तैयार कर दिया गया था, लेकिन कोरोना महामारी शुरू होने के कारण इस पर कुछ काम नहीं हो पाया। तब से यह अधर में ही लटका है।
वर्तमान में जिला रक्त कोष की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर डेंगू में ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। जब से कोरोना महामारी शुरु हुई है, तब से डेंगू का प्रकोप भी काफी कम हुआ है। इस कारण प्लेट्लेटस की उपयोगिता वाले मरीजों की संख्या काफी कम हुई है। हालांकि कोरोना काल में निजी स्तर पर जिला मुख्यालय पर संचालित पुलकित मेमोरियल ब्लड बैंक और शुभम सर्वम ब्लड बैंक ने कंपोनेंट मशीनें लगाकर प्लाज्मा थेरेपी शुरू की है।
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बिजनौर। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट के लिए चार साल पहले कक्ष तो बनाकर तैयार कर दिया गया, लेकिन अभी तक ब्लड कंपोनेंट मशीन न मिलने से यह प्रयोगहीन है। इस कारण जनपद में एक रक्तदान, बचाए चार जान का नारा फलीभूत नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जरूरतमंद लोगों को पूरी यूनिट ब्लड ही दिया जाता है, जिससे तीन अन्य लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ब्लड कंपोनेंट मशीन से रक्त को लाल रक्त कणिकाएं, श्वेत रक्त कणिकाएं, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स को अलग करने का काम किया जाता है। ब्लड कंपोनेंट मशीन मिलने से जरूरत पड़ने पर ब्लड का संबंधित भाग मरीज को आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है और उसके तीन हिस्सों का सदुपयोग हो सकता है। जिला ब्लड बैंक अधिकारी डा. संजय कुमार शंकर ने बताया कि शासन ने करीब दो साल पहले प्रदेश के 14 जिलों को ब्लड कंपोनेंट मशीन देने की घोषणा की थी। इससे पूर्व कंपोनेंट मशीन स्थापित करने के लिए ब्लड बैंक में ही कक्ष बनाकर तैयार कर दिया गया था, लेकिन कोरोना महामारी शुरू होने के कारण इस पर कुछ काम नहीं हो पाया। तब से यह अधर में ही लटका है।
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वर्तमान में जिला रक्त कोष की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर डेंगू में ही प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। जब से कोरोना महामारी शुरु हुई है, तब से डेंगू का प्रकोप भी काफी कम हुआ है। इस कारण प्लेट्लेटस की उपयोगिता वाले मरीजों की संख्या काफी कम हुई है। हालांकि कोरोना काल में निजी स्तर पर जिला मुख्यालय पर संचालित पुलकित मेमोरियल ब्लड बैंक और शुभम सर्वम ब्लड बैंक ने कंपोनेंट मशीनें लगाकर प्लाज्मा थेरेपी शुरू की है।
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