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ब्लैक फंगस: सरकारी आंकड़ा शून्य, फिर कैसे हो इलाज की व्यवस्था
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ब्लैक फंगस: सरकारी आंकड़ा शून्य, फिर कैसे हो इलाज की व्यवस्था
बिजनौर। जिले में ब्लैक फंगस को लेकर अभी तक तैयारी पूरी नहीं हो पाई है। न तो अभी तक जिला अस्पताल में चिकित्सकों का कोरम पूरा हो पाया है और न ही इलाज में काम आने वाले इंजेक्शन ही मिल पाए हैं। अब तक पांच से ज्यादा मरीज दूसरे जिलों में इलाज करा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लिस्ट में अभी भी मरीजों की संख्या शून्य ही है।
ब्लैक फंगस का ताजा मामला सोमवार को ही सामने आया था। बिजनौर के एक मरीज का मेरठ के एक अस्पताल में ऑपरेशन किया गया। उसकी आंखों की रोशनी बचा ली गई। इससे पहले न्यूट्रीमा हॉस्पिटल मेरठ, गाजियाबाद के एक अस्पताल में दो मरीज भर्ती हुए थे। दो दिन पहले जयपुर में इलाज कराकर लौटे एक अन्य मरीज का मामला भी सामने आया था। शहर के कुछ प्राईवेट ईएनटी सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ तो दस से ज्यादा मरीजों को हायर सेंटर भेजने तक का दावा कर चुके हैं। डीआई आशुतोष मिश्रा ने बताया कि शासन स्तर से ब्लैक फंगस के इंजेक्शन मंडल स्तर से देने का निर्देश हुआ है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित मंडल स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारियों को इंजेक्शन देने का अधिकार दिया गया है।
आंकड़े नहीं तो बीमारी भी नहीं
भले ही जिले के मरीज दूसरी जगहों पर इलाज करा रहे हो, लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े तो शून्य ही हैं। ऐसे में जब जिले में अधिकारिक तौर पर मरीज मिले ही नहीं तो इलाज की व्यवस्था भी कैसे हो पाएगी। जिले को ब्लैक फंगस के इलाज के लिए इंजेक्शन न मिलने का एक बड़ा कारण यहां आंकड़ों में मरीज न होना माना जा रहा है।
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अलर्ट कर दिया गया है। सभी एमओआईसी को निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह का कोई मामला आता है तो उन्हें बताया जाएगा। अभी तक अधिकारिक तौर पर कोई मरीज न मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
विजय कुमार गोयल, सीएमओ बिजनौर
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बिजनौर। जिले में ब्लैक फंगस को लेकर अभी तक तैयारी पूरी नहीं हो पाई है। न तो अभी तक जिला अस्पताल में चिकित्सकों का कोरम पूरा हो पाया है और न ही इलाज में काम आने वाले इंजेक्शन ही मिल पाए हैं। अब तक पांच से ज्यादा मरीज दूसरे जिलों में इलाज करा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लिस्ट में अभी भी मरीजों की संख्या शून्य ही है।
ब्लैक फंगस का ताजा मामला सोमवार को ही सामने आया था। बिजनौर के एक मरीज का मेरठ के एक अस्पताल में ऑपरेशन किया गया। उसकी आंखों की रोशनी बचा ली गई। इससे पहले न्यूट्रीमा हॉस्पिटल मेरठ, गाजियाबाद के एक अस्पताल में दो मरीज भर्ती हुए थे। दो दिन पहले जयपुर में इलाज कराकर लौटे एक अन्य मरीज का मामला भी सामने आया था। शहर के कुछ प्राईवेट ईएनटी सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ तो दस से ज्यादा मरीजों को हायर सेंटर भेजने तक का दावा कर चुके हैं। डीआई आशुतोष मिश्रा ने बताया कि शासन स्तर से ब्लैक फंगस के इंजेक्शन मंडल स्तर से देने का निर्देश हुआ है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित मंडल स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारियों को इंजेक्शन देने का अधिकार दिया गया है।
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आंकड़े नहीं तो बीमारी भी नहीं
भले ही जिले के मरीज दूसरी जगहों पर इलाज करा रहे हो, लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े तो शून्य ही हैं। ऐसे में जब जिले में अधिकारिक तौर पर मरीज मिले ही नहीं तो इलाज की व्यवस्था भी कैसे हो पाएगी। जिले को ब्लैक फंगस के इलाज के लिए इंजेक्शन न मिलने का एक बड़ा कारण यहां आंकड़ों में मरीज न होना माना जा रहा है।
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अलर्ट कर दिया गया है। सभी एमओआईसी को निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह का कोई मामला आता है तो उन्हें बताया जाएगा। अभी तक अधिकारिक तौर पर कोई मरीज न मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
विजय कुमार गोयल, सीएमओ बिजनौर