फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   BJP had won six, SP had won two seats.

भाजपा ने छह, सपा ने जीती थीं दो सीट

Sun, 09 Jan 2022 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 12:39 AM IST
विज्ञापन
BJP had won six, SP had won two seats.
भाजपा ने छह, सपा ने जीती थीं दो सीटें
विज्ञापन

रजनीश त्यागी
बिजनौर। आचार संहित लागू होते ही जिले के सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। जिले में दूसरे चरण (14 फरवरी) में चुनाव होना है। 2017 के चुनाव की बात करें तो जिले में आठ विधानसभा सीटों में से छह भाजपा के खाते में गई थीं। नगीना और नजीबाबाद सीट पर सपा ने बाजी मारी थी। बसपा और कांग्रेस का जिले में खाता नहीं खुला था।
2022 के चुनाव में भाजपा अपना आंकड़ा छह से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। वहीं, सपा इस बार रालोद के साथ मिलकर आठों सीट जीतने का दावा कर रही है। इन दोनों पार्टियों के साथ-साथ बसपा जिले में सभी प्रत्याशी घोषित कर चुकी है और न सिर्फ खाता खोलने, बल्कि 2007 के चुनाव के आंकड़े दोहराने का दावा कर रही है। हालांकि राजनीति के जानकार माहौल और जनता के मूड के साथ-साथ अलग-अलग समीकरण बनाते दिख रहे हैं। आइए डालते हैं पिछले चुनाव के परिणामों पर नजर (संवाद)
विज्ञापन

बिजनौर में सुचि को मिली थी जीत, दूसरे नंबर पर थीं सपा प्रत्याशी
2017 के चुनाव में भाजपा की सुचि मौसम चौधरी को जीत मिली थी। उन्हें एक लाख पांच हजार 548 वोट मिले थे, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी रूचि वीरा को 78 हजार 257 वोट मिले थे। सुचि मौसम चौधरी पहली बार ही चुनाव लड़ी थीं और जीत हासिल की थी। बिजनौर सीट के इतिहास पर नजर डालें तो पहले यह सीट कांग्रेेस का गढ़ मानी जाती थी, बाद में भाजपा का प्रभाव भी इस पर बढ़ा। इस सीट पर कांग्रेस सात बार, बीकेडी और सपा एक-एक बार, जनता पार्टी दो बार, भाजपा चार बार और बसपा दो बार चुनाव जीती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नहटौर में भाजपा के ओमकुमार ने सपा के मुन्नालाल को हराया
नहटौर विधानसभा पर 2012 में बसपा से चुनाव लड़कर विधायक बनने वाले ओम कुमार ने 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। ओमकुमार को करीब 80 हजार मत मिले, उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी सपा के मुन्ना लाल को 23151 मतों से हराया। इस सीट का इतिहास बहुत पुराना नहीं है।
चांदपुर में भाजपा से कमलेश सैनी को मिली थी जीत
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की कमलेश सैनी चुनाव जीती थीं। दो बार बसपा से विधायक रहे इकबाल ठेकेदार को कमलेश सैनी ने हराया था। कमलेश सैनी को 92 हजार 345 और मोहम्मद इकबाल ठेकेदार को 56 हजार 696 वोट मिले थे। कमलेश सैनी पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ीं थीं। इससे पहले वे दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी थीं। चांदपुर सीट पर शुरूआत में निर्दलियों का कब्जा रहा। सबसे पहला चुनाव कांग्रेस जीती, लेकिन बाद के तीन चुनाव निर्दलीय नरदेव सिंह जीते। यहां कांग्रेस तीन बार, निर्दलीय प्रत्याशी पांच बार, भारतीय क्रांति दल दो, लोकदल एक, जनता दल एक, रालोद एक, भाजपा दो, बसपा प्रत्याशी दो बार चुनाव जीते हैं।
बढ़ापुर पर भी खिला था कमल, कांग्रेस से थी टक्कर
2017 के चुनाव में भाजपा के मुरादाबाद से सांसद कुंवर सर्वेेश के बेटे सुशांत राजपूत को बढ़ापुर विधानसभा से जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को हराया। सुशांत सिंह को 79 हजार वोट मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी हुसैन अहमद अंसारी को 68 हजार वोट मिले थे। सुशांत राजपूत ने पहला विस चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। बढ़ापुर विधानसभा सीट का पुनर्गठन साल 2012 में हुआ। यहां से बसपा के मोहम्मद गाजी विधायक बने। 2017 के चुनाव में यहां भाजपा के सुशांत सिंह चुनाव जीते।
नगीना से मनोज पारस बने थे विधायक
2017 के चुनाव में सपा के पूर्व मंत्री व विधायक मनोज पारस को नगीना विधानसभा से लगातार दूसरी बार जीत मिली थी। उन्होंने भाजपा से चुनाव लड़ीं पूर्व मंत्री ओमवती को हराया। मनोज पारस को 77 हजार 145 और भाजपा से ओमवती को 69 हजार 178 वोट मिले। नगीना विधानसभा सुरक्षित सीट पर कांग्रेस का ही दबदबा रहा था। कांग्रेस यहां सात बार, सपा चार बार, भाजपा व बसपा दो-दो बार, जनता पार्टी और जनता दल के प्रत्याशी एक-एक बार चुनाव जीत चुके हैं।
नूरपुर में पहले भाजपा, उपचुनाव में सपा को मिली जीत
2017 के विधानसभा चुनाव में नूरपुर विधानसभा सीट से लोकेंद्र चौहान भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर दूसरी बार विधायक बने थे। उन्होंने सपा के नईमुल हसन को हराया। लोकेंद्र चौहान की एक हादसे में मौत के बाद 2018 के विधानसभा उपचुनाव में नईमुल हसन ने लोकेंद्र चौहान की पत्नी अवनी सिंह को हराया। नईमुल हसन को 94 हजार 875 और अवनी सिंह को 89 हजार 213 वोट मिले। इसमें खासबात यह थी कि 2017 के चुनाव में पति लोकेंद्र चौहान से दस हजार वोट ज्यादा पाने के बावजूद अवनी सिंह हार गई थीं। नूरपुर विधानसभा सुरक्षित सीट पहले स्योहारा सीट थी। साल 2012 में इसका गठन हुआ।
नजीबाबाद में सपा को मिली जीत, दूसरे नंबर पर रही भाजपा
2017 के विधानसभा चुनाव में नजीबाबाद सीट से सपा के तसलीम अहमद लगातार दूसरी बार चुनाव जीते। उन्होंने भाजपा के राजीव अग्रवाल को हराया। तसलीम अहमद को 81 हजार 82 व राजीव अग्रवाल को 79 हजार 80 वोट मिले। तसलीम अहमद नजीबाबाद के चेयरमैन रहे व दूसरी बार विधायक बने थे। नजीबाबाद सीट की बात करें तो एक समय माकपा का गढ़ रही। इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी ने पांच बार, जनसंघ ने एक, निर्दलीय ने एक, बसपा ने तीन, जनता दल ने एक, भाजपा ने एक, माकपा ने तीन बार परचम लहराया है।

धामपुर में भाजपा जीती, सपा दूसरे नंबर पर रही
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से अशोक राणा ने सपा के मंत्री मूलचंद चौहान को हराया। अशोक राणा को 82 हजार 169 और मूलचंद चौहान को 64 हजार 305 वोट मिले।
इस सीट से अशोक राणा तीसरी बार विधायक बने थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed