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जन्मदिन पर विशेष : गजल के लिए गोपालदास की गाड़ी में पंक्चर कर देते थे छात्र

Tue, 04 Jan 2022 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jan 2022 12:21 AM IST
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Birthday special: Students used to puncture Gopaldas's car for Ghazal
धामपुर में शंकर लाल शर्मा के आवास पर गोपाल दास नीरज। (फाइल फोटो) - फोटो : BIJNOR
जन्मदिन पर विशेष : गजल के लिए गोपालदास की गाड़ी में पंक्चर कर देते थे छात्र
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बिजनौर। सिर्फ गजल सुनने के लिए गोपालदास नीरज की गाड़ी में छात्र पंक्चर कर देते थे। जब तक पंक्चर जुड़ता था, तब तक क्लास में गजल और गीतों का दौर चलता रहता था। यह संस्मरण सुनाते हुए धामपुर निवासी शंकर लाल शर्मा ने गोपालदास नीरज की यादों को जीवंत कर दिया। दरअसल, गीतों का राजकुमार कहलाए जाने वाले गोपालदास कई बार बिजनौर आए थे।
शंकर लाल शर्मा अलीगढ़ में गोपाल दास नीरज के शिष्य रहे हैं। नीरज दो बार उनके आवास पर धामपुर आए। जनपद के साहित्यकार गोपालदास नीरज के जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। शंकर लाल शर्मा धामपुर के आरएसएम कॉलेज में साढ़े तीन दशक तक हिंदी के विभागाध्यक्ष रहे। वह उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ तथा उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ के कार्यकारिणी सदस्य भी रह चुके हैं। वह धर्म समाज कॉलेज अलीगढ़ में पढ़ते थे, वहां गोपालदास नीरज हिंदी के प्रोफेसर थे। उस दौरान नीरज ने गीत लिखने शुरू कर दिए थे। बीए प्रथम वर्ष में नीरज ने कम ही क्लास लीं, क्योंकि वह ज्यादा समय मुंबई में रहते थे। उस दौरान उनके लिखे गीत ‘शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब’ और ‘आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं’ प्रसिद्ध हो चुके थे। गोपालदास नीरज एकमात्र ऐसे प्रोफेसर थे, जिन पर फिएट कार थी। छात्र-छात्राएं पाठ्यक्रम से इतर भी गीत और गजलें सुनाने का अनुरोध गोपाल दास नीरज से करते थे।
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गोपालदास नीरज के गीत छात्रों के सिर चढ़कर बोलते थे। कई बार नीरज जी को रोकने के लिए शंकर लाल शर्मा उनकी फिएट गाड़ी में पंक्चर कर देते थे, नीरज पंक्चर जोड़ने तक कविताएं सुनाते रहते थे। वह दो बार शंकर लाल शर्मा के आवास पर धामपुर आए। धामपुर में गोपाल दास नीरज को सारस्वत सम्मान भी प्रदान किया गया था। गोपालदास नीरज का जन्म चार जनवरी 1925 को हुआ था। उनकी मृत्यु 19 जुलाई 2018 को हुई।
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नीरज के कहने पर लिया था हिंदी में प्रवेश
शंकर लाल शर्मा बताते हैं कि स्नातक में उन्हें आगरा विश्वविद्यालय में भूगोल विषय में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ था। स्नातकोत्तर में परिजनों के कहने पर उन्होंने भूगोल विषय में प्रवेश ले लिया था। लेकिन जब गोपाल दास नीरज को पता चला तो उन्होंने उनका प्रवेश भूगोल के बजाय हिंदी में कराया। हिंदी से स्नातकोत्तर करने के तुरंत बाद ही उन्हें नौकरी मिल गई थी। शंकर लाल शर्मा बताते हैं कि गोपालदास नीरज के काव्य पर दो शोध उनके निर्देशन में संपन्न हो चुके हैं।
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