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बर्ड फेस्टिवल पर होगी पक्षियों की पहचान
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Thu, 26 Nov 2015 11:50 PM IST
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बिजनौर। जिले में प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा शुरू हो गया है। चार दिसंबर को बर्ड फेस्टिवल पर प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की पहचान की जाएगी।
शासन के निर्देश पर वन विभाग ने पक्षियों की पहचान और गणना के लिए हरेवली डैम का चयन किया।
सर्द मौसम के शुरू होते ही उत्तरार्ध और शीत प्रदेशों से पक्षी प्रवास के लिए दक्षिण और उत्तरी भारत, हिमालय की तलहटी आदि में प्रवास करते हैं।
इनमें से काफी संख्या में पक्षी बिजनौर के गंगा बैराज, धामपुर क्षेत्र के हरेवली डैम और पीली डैम में प्रति वर्ष पहुंचते हैं।
सूत्रों के अनुसार शासन ने इस दौरान पक्षियों की गणना और पहचान के निर्देश दिए है। डीएफओ सलील कुमार शुक्ला ने बताया चार दिसंबर को पक्षियों की पहचान एवं गणना होगी।
शासन के निर्देश पर वन अधिकारियों ने पक्षियों की पहचान के लिए विशेषज्ञ की टीम गठन तैयारियां की गई हैं। उन्होंने कहा चार दिसंबर को हरेवली डैम पर पक्षी विशेषज्ञ पक्षियों की पहचान करेंगे।
ये पक्षी हैं प्रमुख रूप से
सर्वे टीम ने जिन चिड़ियों की प्रजाति की पहचान की हैं, उनमें टाइटोनीनी, टिक्नोटीडी, रेलिडी, ग्लूईडी, कुकुलिटी, टरनीसिडी, कोलूविडी, आरडेईडी, आल्कोनिडी, कोरवीडी, ऑसियानिडी, अस्टरलीनी, स्ट्रीडीडी, फासियानिडी, स्कोलेप्रोसीनी, एक्सीप्रेट्रीडी, प्लेसेईडी, पीसीडी, ट्रोग्लोडईडीडी आदि प्रमुख थी। इस दौरान क्षेत्र में भारत के पहाड़ी, मैदानी और दक्षिण क्षेत्रों की चिड़िया भी देखी गई।
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2014 में 96 प्रजाति की हुई थी पहचान
वाइड लाइफ की टीम ने अमानगढ़ रेंज में 14 मई 2014 को चिड़ियों की प्रजातियों की पहचान थी। इस दौरान टीम द्वारा करीब 96 भारतीय और विदेशी प्रजातियों की चिड़िया की पहचान हुई थी।
टीम के मुताबिक क्षेत्र में भारत की 250 से भी अधिक प्रजाति की चिड़िया मौजूद है। प्रवासी पक्षी उत्तर भारत समेत अन्य क्षेत्रों में नवंबर माह में आना शुरू होते है। ये पक्षी मार्च माह के अंत तक अपने गृह क्षेत्रों में चले जाते है। इस तरफ करीब चार माह पक्षी क्षेत्र में रहते हैं। दिन गर्म होते ही अपने अपने क्षेत्र की तरफ लौट जाते हैं।
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शासन के निर्देश पर वन विभाग ने पक्षियों की पहचान और गणना के लिए हरेवली डैम का चयन किया।
सर्द मौसम के शुरू होते ही उत्तरार्ध और शीत प्रदेशों से पक्षी प्रवास के लिए दक्षिण और उत्तरी भारत, हिमालय की तलहटी आदि में प्रवास करते हैं।
इनमें से काफी संख्या में पक्षी बिजनौर के गंगा बैराज, धामपुर क्षेत्र के हरेवली डैम और पीली डैम में प्रति वर्ष पहुंचते हैं।
सूत्रों के अनुसार शासन ने इस दौरान पक्षियों की गणना और पहचान के निर्देश दिए है। डीएफओ सलील कुमार शुक्ला ने बताया चार दिसंबर को पक्षियों की पहचान एवं गणना होगी।
शासन के निर्देश पर वन अधिकारियों ने पक्षियों की पहचान के लिए विशेषज्ञ की टीम गठन तैयारियां की गई हैं। उन्होंने कहा चार दिसंबर को हरेवली डैम पर पक्षी विशेषज्ञ पक्षियों की पहचान करेंगे।
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ये पक्षी हैं प्रमुख रूप से
सर्वे टीम ने जिन चिड़ियों की प्रजाति की पहचान की हैं, उनमें टाइटोनीनी, टिक्नोटीडी, रेलिडी, ग्लूईडी, कुकुलिटी, टरनीसिडी, कोलूविडी, आरडेईडी, आल्कोनिडी, कोरवीडी, ऑसियानिडी, अस्टरलीनी, स्ट्रीडीडी, फासियानिडी, स्कोलेप्रोसीनी, एक्सीप्रेट्रीडी, प्लेसेईडी, पीसीडी, ट्रोग्लोडईडीडी आदि प्रमुख थी। इस दौरान क्षेत्र में भारत के पहाड़ी, मैदानी और दक्षिण क्षेत्रों की चिड़िया भी देखी गई।
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2014 में 96 प्रजाति की हुई थी पहचान
वाइड लाइफ की टीम ने अमानगढ़ रेंज में 14 मई 2014 को चिड़ियों की प्रजातियों की पहचान थी। इस दौरान टीम द्वारा करीब 96 भारतीय और विदेशी प्रजातियों की चिड़िया की पहचान हुई थी।
टीम के मुताबिक क्षेत्र में भारत की 250 से भी अधिक प्रजाति की चिड़िया मौजूद है। प्रवासी पक्षी उत्तर भारत समेत अन्य क्षेत्रों में नवंबर माह में आना शुरू होते है। ये पक्षी मार्च माह के अंत तक अपने गृह क्षेत्रों में चले जाते है। इस तरफ करीब चार माह पक्षी क्षेत्र में रहते हैं। दिन गर्म होते ही अपने अपने क्षेत्र की तरफ लौट जाते हैं।